बिहार :फेसबुक पर सबसे सटीक ओपिनियन पोल के नतीजे
फेसबुक (Facebook) पर किए गए इस ओपिनियन पोल (Opinion Poll) के नतीजे को गंभीरता से लें। इसमें फेसबुक मित्रों के अलावा बिहार के सभी 38 जिलों में तैनात संवाददाताओं और स्ट्रींगर्स की राय को भी आखिरी गणना में शामिल किया गया है।
सर्वे में सबसे खास बात सामने आई है कि बिहार के युवा वोटरों के सामने धारा 370, राम मंदिर, मथुरा-काशी मंदिर, लव जिहाद, ट्रिपल तलाक, सीएए, सुशांत की मौत, चीन से तकरार. पाकिस्तान जैसे मुद्दों की कोई अहमियत नहीं है।
यानी कोई असर नहीं है। इनकी जगह रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन, मकान, महंगाई और बिहारी सम्मान सबसे बड़े चुनावी मुद्दे हैं।
कृषि कानूनों को लेकर भी यहां कोई उत्साह या निरुत्साह जैसी बात नहीं है, क्योंकि यहां पहले से ही न्यूनतम समर्थन मूल्य और एपीएमसी नहीं है। लिहाजा बुनियादी मुद्दों से यहां के वोटरों को भटकाने की कोई भी साजिश कामयाब होता दिखाई नहीं दे रहा है।
केंद्र सरकार की योजनाओं के लिए लोग मोदीजी को वोट दे चुके हैं। उसी पर बार-बार वोट की उम्मीद रखना बेमानी है। जाति बिहार में एक अहम फैक्टर है लेकिन सरकारी नौकरी के सामने ये फीका पड़ता दिखाई दे रहा है।
पत्रकारों से बात
इस सर्वे में स्ट्रींगर्स या जिला संवाददाताओं से बातचीत में एक अहम बात सामने आई, जिसका उल्लेख जरूरी है। गांव में पैदल लौटे ज्यादातर प्रवासी मजदूरों का कहना है कि मोदी और नीतीश सरकार ने उनकी बेइज्जती की है। जिसका बदला लेना जरूरी है। एक खास बात और कि अगर रोटी एक ही तरफ से पकती रही तो उसका जलकर बेस्वाद होना लाजिमी है। लिहाजा रोटी को तवे पर उलटते-पलटते रहना चाहिए।
लोगों की सोच आगे चलकर मोदीजी के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है। बिहार विधानसभा चुनाव के असली मुद्दे क्या हैं?सरकारी नौकरी, रोजगार के अवसर, शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन, आवास, महंगाई और बिहारी सम्मान सबसे बड़े चुनावी मुद्दे हैं। 90 फीसदी लोग इससे इत्तेफाक रखते हैं। बाकी के 10 फीसदी लोग इनसे इतर मुद्दों की बात करते हैं।

मुख्यमंत्री के तौर पर पहली पसंद:-
तेजस्वी यादव : 70 फीसदी
नीतीश कुमार : 20 फीसदी
सुशील मोदी : 5 फीसदी
चिराग पासवान : 3 फीसदी

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