एशिया टाइम्स वीकली फोटो फीचर : दिल्ली की ' सुंदर नर्सरी ‘ का मन मोहक दृश्य
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नई दिली : हवा संग लहराती, इठलाती पेड़ों की शाखाएं। पक्षियों की चहचहाट में खुशियों के पलों की फुलझड़ी, जो ना केवल बच्चों बल्कि बड़ों को सुकून देती है। 300 से ज्यादा पेड़ों की छांव में निखरता, चमकता और अपनी ऐतिहासिक विरासत को संजोते सुंदर नर्सरी की खूबसूरती की तारीफ जितनी की जाए कम है। 90 एकड़ में बने हेरिटेज पार्क की खूबसूरती काबिले तारीफ है। हेरिटेज पार्क में 400 बोनसाई पेड़, 300 पेड़, 80 पक्षी और तितलियों की 36 प्रजातियां इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाती है। सुंदर बुर्ज, सुंदर महल, गार्ड पवेलियन, आर्च प्लेटफार्म, लक्कड़वाला बुर्ज, बताशेवाला कांप्लेक्स, अजीमगंज सराय समेत करीब 15 स्मारक इतिहास की गाथा सुना रहे हैं। करीब दस सालों के संरक्षण कार्य के बाद सुंदर नर्सरी लोगों के लिए खोला गया है। हालांकि अभी सप्ताहांत ही इस खूबसूरत हेरिटेज पार्क में जाया जा सकता है। मुगलकाल में ग्रांड ट्रंक रोड किनारे स्थित इस पार्क को ब्रितानिया हुकूमत ने नर्सरी में तब्दील कर दिया था। सबरंग के इस अंक में हम आगा खां ट्रस्ट द्वारा सम्पन्न संरक्षण कार्य के बाद निखरी सुंदर नर्सरी की खूबसूरती व इसके ऐतिहासिक महत्व से रूबरू कराएंगे।
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Photo: Mohsin Javed[/caption]
लुटियन दिल्ली के निर्माण की कहानी
आगा खां ट्रस्ट के प्रोजेक्ट निदेशक रतीश नंदा कहते हैं कि सुंदर नर्सरी को पहले अजीम बाग और ग्रेट गार्डन के नाम से जाना जाता था। दरअसल, बीसवीं सदी में जब लुटियन दिल्ली बनाई जा रही थी तो सड़क किनारे लगाए जाने वाले पौधों की नर्सरी यहीं सुंदर नर्सरी में बनाई गई थी। जबकि नर्सरी के परिसर में स्थित बताशेवाला कांम्पेक्स तो मुगल काल में खूबसूरत बाग था। यहां से पौधे विभिन्न वाहनों पर लादकर लुटियन दिल्ली पहुंचाए जाते थे।
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Photo: Mohsin Javed[/caption]
मन मोह लेता सुंदरवाला बुर्ज और महल
रतीश नंदा कहते हैं कि सुंदर नर्सरी के उत्तरी दिशा में सुंदरवाला बुर्ज और महल स्थित है। अभिलेखागार स्थित दस्तावेजों की मानें तो 20वीं सदी के शुरूआती समय तक दोनों के मौजूद होने के साक्ष्य मिलते हैं। दक्षिण की तरफ से आते एक रास्ते से इसमें प्रवेश किया जा सकता था। सुंदरवाला महल में कुल आठ कमरे हैं। यह कमरे एक गोलाकार स्वरूप में बने हैं। यह निर्माण सन 2002-04 में क्षतिग्रस्त हो गया था। संरक्षण के दौरान क्षतिग्रस्त हिस्सा दोबारा बनाया गया। इसे बनाते समय पूरा ध्यान रखा गया कि यह मूल सुंदरवाला महल से तनिक भी अलग ना दिखे। स्टार पैटर्न वाले छत ईरान से कश्मीर तक दिखाई देने वाले सजावटी लकड़ी के छत के मानिंद थे। हुमायूं के मकबरे में भी इसी तरह का पैटर्न दिखा। हालांकि गुंबद और छतों में दरार थी जिसे मुगल पैटर्न के विशेषज्ञों की मदद से भरवाया गया।
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Photo: Mohsin Javed[/caption]
लक्कड़वाला बुर्ज
सुंदरवाला बुर्ज के साथ लक्कड़वाला बुर्ज भी है। दोनों के नाम ऐसे क्यों पड़े इसके पीछे की कहानी तो लोगों को नहीं मालूम लेकिन दोनों बुर्ज लगभग एक जैसे दिखते हैं। सन 1600 ईवी में मुगलकाल में दोनों बुर्ज बनवाए गए। सुंदरवाला बुर्ज के उत्तर पश्चिम दिशा में सुंदर बाग नर्सरी के बीचों बीच से होकर गुजरने वाला रास्ता लक्कड़वाला बुर्ज की तरफ ले जाता है। यह बुर्ज एक चौकोर चबूतरे पर अनगढ़े पत्थरों से निर्मित है। इस चबूतरे पर महराबी आले बने हुए हैैं। मकबरे के भीतरी हिस्से में गोल गुंबद में वनस्पतियों तथा अभिलिखित शानदार ढंग से अलंकृत किया गया है। हालांकि सब्ज बुर्ज, नीला गुंबद, सुंदरवाला बुर्ज समेत अन्य की तरह इसका निर्माण किसने किया था यह ठीक ठीक नहीं पता है।
बताशेवाला कांप्लेक्स
इसमें मिर्जा मुजफ्फर हुसैन की कब्र है। जो मिर्जा कामरान के मातृ पोते थे। इसका नाम बताशेवाला क्यों पड़ा इसकी जानकारी नहीं मिलती है। ऐसा कहा जाता है कि इसकी डिजाइन बताशे की तरह है। शायद इसलिए इसकी डिजाइन बताशे से मिलती थी? या फिर बताशे से सजाया गया था। इसी के ठीक पास एक अन्य छोटा बताशेवाला भी मौजूद है। ऐसा कहा जाता है कि यहां आजादी के पहले तक बताशे का ताजिया भी निकाला जाता था। इतिहासकारों की मानें तो पुरानी दिल्ली स्थित गली बताशां का भी इससे संबंध हो सकता है। कारण,शाहजहां के समय में यह बहुत प्रसिद्ध थी।
अजीम गंज सराय
इतिहासकार कहते हैं कि 16वीं सदी में निजामुद्दीन इलाके से ग्रांड टंक रोड गुजरता था। इस मार्ग पर थोड़ी दूर के अंतराल पर यात्रियों के लिए सराय भी बनाई गई थी। जहां अलग अलग चैम्बर होते थे, ओपन कोर्ट होती थी। यही नहीं सामान रखने के लिए अलग स्टोर होता था। अधिकतर सराय में बड़ा कोर्ट धार्मिक क्रिया कलापों के लिए प्रयोग होता था। इसी जगह पीने के पानी की भी व्यवस्था होती थी। अजीमगंज सराय करीब 100 मीटर के स्ट्रेच में बनी है। देखभाल के अभाव में सराय लगभग खत्म ही हो चुकी है। इसका दोबारा संरक्षण किया गया है। इसके अलावा गार्डन पवेलियन, आर्च प्लेटफार्म के अलावा तीन मुगलकालीन कुंओं का भी संरक्षण किया गया है।
बगिया जो महक रही फूलों से
सुंदर नर्सरी के बीचो बीच केंद्रीय धुरी पार्क बनाया गया है। दरअसल बाग-बगीचों का विशेष ध्यान दिया गया है। ट्रस्ट की मानें तो कारपेट गार्डन को परसियन, मुगल तकनीक के आधार पर दोबारा बनाया गया है। मध्य में पानी का ठहराव व फौव्वारे एवं दोनों तरफ पथ एक अलग लुक प्रदान करते हैं। इसके अलावा दस छोटे-छोटे बगीचे भी है। केंद्रीय धुरी के तहत एक वाटर गार्डन भी बनाया गया है। इसमें छायादार वृक्षों को लगाया गया है। दरअसल सुंदर नर्सरी में करीब 20 एकड़ क्षेत्र पर पिछले 100 साल से नर्सरी थी। इसमें पौधों की संख्या बढ़ाई गई है। वर्तमान में यहां 400 बोंसाई के पौधे है। इतना ही नहीं यह दिल्ली का पहला ऐसा पार्क है जहां 300 से ज्यादा पौधे है। ट्रस्ट की मानें तो हुमायूं का मकबरा देखने हर साल करीब पांच लाख लोग आते हैं। ट्रस्ट इन छात्रों को आकर्षित करने के लिए भी कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सहारा लेगा। उम्मीद है कि हरे घने छायादार वृक्ष, स्मारक छात्रों को लुभाएंगे।
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तथ्य
–280 नेटिव ट्री।
–4200 पौधे जीआइएस पर मैप किए गए।
–20000 पौधे लगाए गए हैं।
–30 एकड़ में बायो डायवर्सिटी जोन बनाए गए।
–20 एकड़ में नर्सरी जोन।
–80 पक्षी की प्रजातियां।
–36 प्रकार की तितलियां पाए जाने की संभावना।
स्टोरी इनपुट : एसरिजा डॉट कॉम
https://youtu.be/H9V5MtqYFeg
Photo: Mohsin Javed[/caption]
लुटियन दिल्ली के निर्माण की कहानी
आगा खां ट्रस्ट के प्रोजेक्ट निदेशक रतीश नंदा कहते हैं कि सुंदर नर्सरी को पहले अजीम बाग और ग्रेट गार्डन के नाम से जाना जाता था। दरअसल, बीसवीं सदी में जब लुटियन दिल्ली बनाई जा रही थी तो सड़क किनारे लगाए जाने वाले पौधों की नर्सरी यहीं सुंदर नर्सरी में बनाई गई थी। जबकि नर्सरी के परिसर में स्थित बताशेवाला कांम्पेक्स तो मुगल काल में खूबसूरत बाग था। यहां से पौधे विभिन्न वाहनों पर लादकर लुटियन दिल्ली पहुंचाए जाते थे।
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Photo: Mohsin Javed[/caption]
मन मोह लेता सुंदरवाला बुर्ज और महल
रतीश नंदा कहते हैं कि सुंदर नर्सरी के उत्तरी दिशा में सुंदरवाला बुर्ज और महल स्थित है। अभिलेखागार स्थित दस्तावेजों की मानें तो 20वीं सदी के शुरूआती समय तक दोनों के मौजूद होने के साक्ष्य मिलते हैं। दक्षिण की तरफ से आते एक रास्ते से इसमें प्रवेश किया जा सकता था। सुंदरवाला महल में कुल आठ कमरे हैं। यह कमरे एक गोलाकार स्वरूप में बने हैं। यह निर्माण सन 2002-04 में क्षतिग्रस्त हो गया था। संरक्षण के दौरान क्षतिग्रस्त हिस्सा दोबारा बनाया गया। इसे बनाते समय पूरा ध्यान रखा गया कि यह मूल सुंदरवाला महल से तनिक भी अलग ना दिखे। स्टार पैटर्न वाले छत ईरान से कश्मीर तक दिखाई देने वाले सजावटी लकड़ी के छत के मानिंद थे। हुमायूं के मकबरे में भी इसी तरह का पैटर्न दिखा। हालांकि गुंबद और छतों में दरार थी जिसे मुगल पैटर्न के विशेषज्ञों की मदद से भरवाया गया।
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Photo: Mohsin Javed[/caption]
लक्कड़वाला बुर्ज
सुंदरवाला बुर्ज के साथ लक्कड़वाला बुर्ज भी है। दोनों के नाम ऐसे क्यों पड़े इसके पीछे की कहानी तो लोगों को नहीं मालूम लेकिन दोनों बुर्ज लगभग एक जैसे दिखते हैं। सन 1600 ईवी में मुगलकाल में दोनों बुर्ज बनवाए गए। सुंदरवाला बुर्ज के उत्तर पश्चिम दिशा में सुंदर बाग नर्सरी के बीचों बीच से होकर गुजरने वाला रास्ता लक्कड़वाला बुर्ज की तरफ ले जाता है। यह बुर्ज एक चौकोर चबूतरे पर अनगढ़े पत्थरों से निर्मित है। इस चबूतरे पर महराबी आले बने हुए हैैं। मकबरे के भीतरी हिस्से में गोल गुंबद में वनस्पतियों तथा अभिलिखित शानदार ढंग से अलंकृत किया गया है। हालांकि सब्ज बुर्ज, नीला गुंबद, सुंदरवाला बुर्ज समेत अन्य की तरह इसका निर्माण किसने किया था यह ठीक ठीक नहीं पता है।
बताशेवाला कांप्लेक्स
इसमें मिर्जा मुजफ्फर हुसैन की कब्र है। जो मिर्जा कामरान के मातृ पोते थे। इसका नाम बताशेवाला क्यों पड़ा इसकी जानकारी नहीं मिलती है। ऐसा कहा जाता है कि इसकी डिजाइन बताशे की तरह है। शायद इसलिए इसकी डिजाइन बताशे से मिलती थी? या फिर बताशे से सजाया गया था। इसी के ठीक पास एक अन्य छोटा बताशेवाला भी मौजूद है। ऐसा कहा जाता है कि यहां आजादी के पहले तक बताशे का ताजिया भी निकाला जाता था। इतिहासकारों की मानें तो पुरानी दिल्ली स्थित गली बताशां का भी इससे संबंध हो सकता है। कारण,शाहजहां के समय में यह बहुत प्रसिद्ध थी।
अजीम गंज सराय
इतिहासकार कहते हैं कि 16वीं सदी में निजामुद्दीन इलाके से ग्रांड टंक रोड गुजरता था। इस मार्ग पर थोड़ी दूर के अंतराल पर यात्रियों के लिए सराय भी बनाई गई थी। जहां अलग अलग चैम्बर होते थे, ओपन कोर्ट होती थी। यही नहीं सामान रखने के लिए अलग स्टोर होता था। अधिकतर सराय में बड़ा कोर्ट धार्मिक क्रिया कलापों के लिए प्रयोग होता था। इसी जगह पीने के पानी की भी व्यवस्था होती थी। अजीमगंज सराय करीब 100 मीटर के स्ट्रेच में बनी है। देखभाल के अभाव में सराय लगभग खत्म ही हो चुकी है। इसका दोबारा संरक्षण किया गया है। इसके अलावा गार्डन पवेलियन, आर्च प्लेटफार्म के अलावा तीन मुगलकालीन कुंओं का भी संरक्षण किया गया है।
बगिया जो महक रही फूलों से
सुंदर नर्सरी के बीचो बीच केंद्रीय धुरी पार्क बनाया गया है। दरअसल बाग-बगीचों का विशेष ध्यान दिया गया है। ट्रस्ट की मानें तो कारपेट गार्डन को परसियन, मुगल तकनीक के आधार पर दोबारा बनाया गया है। मध्य में पानी का ठहराव व फौव्वारे एवं दोनों तरफ पथ एक अलग लुक प्रदान करते हैं। इसके अलावा दस छोटे-छोटे बगीचे भी है। केंद्रीय धुरी के तहत एक वाटर गार्डन भी बनाया गया है। इसमें छायादार वृक्षों को लगाया गया है। दरअसल सुंदर नर्सरी में करीब 20 एकड़ क्षेत्र पर पिछले 100 साल से नर्सरी थी। इसमें पौधों की संख्या बढ़ाई गई है। वर्तमान में यहां 400 बोंसाई के पौधे है। इतना ही नहीं यह दिल्ली का पहला ऐसा पार्क है जहां 300 से ज्यादा पौधे है। ट्रस्ट की मानें तो हुमायूं का मकबरा देखने हर साल करीब पांच लाख लोग आते हैं। ट्रस्ट इन छात्रों को आकर्षित करने के लिए भी कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सहारा लेगा। उम्मीद है कि हरे घने छायादार वृक्ष, स्मारक छात्रों को लुभाएंगे।
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तथ्य
–280 नेटिव ट्री।
–4200 पौधे जीआइएस पर मैप किए गए।
–20000 पौधे लगाए गए हैं।
–30 एकड़ में बायो डायवर्सिटी जोन बनाए गए।
–20 एकड़ में नर्सरी जोन।
–80 पक्षी की प्रजातियां।
–36 प्रकार की तितलियां पाए जाने की संभावना।
स्टोरी इनपुट : एसरिजा डॉट कॉम
https://youtu.be/H9V5MtqYFeg

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