दो दिन तक पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा रहे मालदा की कहानी

Positive 2: आम की खास किसम जिसमें एक आम तक़रीबन एक किलो तक का होता है उसे आप लोगों ने बड़े चाव से खाया होगा........... जानते हैं उस आम की पैदावार कहाँ होती है...... मालदा!!! मालदा सिर्फ अपने आम के लिये ही नहीं एक ऐतिहासिक ग़लतफहमी के लिये भी मशहूर है| भारत के बंटवारे समय जब रेडक्लिफ लाइन खीची जा रही थी तो मालदा का एरिया उस समय बहुत कशमकश में था कि भारत का हिस्सा है या पूर्वी पाकिस्तान का| 2 दिन तक इसी कशमकश में मालदा पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा रहा फिर जब 17 अगस्त 1947 को रेडक्लिफ अवार्ड पब्लिश हुआ तो मालदा का एरिया भारत का हिस्सा बना| 3733 sq km में फैला हुआ पश्चिम बंगाल का यह जिला तक़रीबन 39 लाख लोगों की सरज़मीं हैं जिसमें 51 फीसद मुस्लिम आबादी और 48 फीसद हिन्दू आबादी रहती है| पूरी विडियो यहाँ देखें: https://youtu.be/t3DFg2-z3Mc 2006 में पंचायती राज्य मंत्रालय ने एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें भारत के सबसे पिछड़े हुये जिलों का जिक्र था जिसमें मालदा भी एक था|
बंगाल की सियासत में अच्छा मुकाम रखने वाले इस जिले में 2 लोक सभा और 12 विधानसभा इलाके हैं| सियासी अहमियत के बावजूद इस जिले का विकास निल बटा सन्नाटा है|
रोजगार के मामले में भी मालदा बहुत पिछड़ा हुआ है| मालदा के बहुत सारे इलाके ऐसे हैं जहाँ पिने का पानी इतना ख़राब है कि पूरा का पूरा गाँव कैंसर का शिकार है| घनी आबादी, जैसे तैसे गुजारा करते हुये गरीब लोग और रोज नयी नयी परेशानी से दो चार होते लोगों का वतन है मालदा...... बाकि सब खैरियत है!!! ANSAR IMRAN SR

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