दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय पहुंचा एनएचपीसी

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) ने मध्यस्थता राशि के संबंध में दिल्ली उच्च न्यायालय के एक फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने इससे पहले के एकल न्यायाधीश के फैसले में दखल देने से इनकार किया था। एनएचपीसी ने उच्च न्यायालय के 13 सितंबर के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उसने एकल पीठ के फैसले के खिलाफ उसकी याचिका खारिज कर दी थी। एकल पीठ ने अपने फैसले में एनएचपीसी को आदेश दिया था कि वह या तो हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड को मध्यस्थता राशि का भुगतान करे या इस राशि का 75 प्रतिशत यानि 40 करोड़ रुपये उच्च न्यायालय के रजिस्ट्री कार्यालय में जमा कराये। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय ने उन पूर्व आवश्यक शर्तों पर गौर नहीं किया कि जिसमे भुगतान से पहले निर्माण कंपनी को पूरा करना था। छह मई, 2016 को निर्माण कंपनी के पक्ष में मध्यस्थता अवार्ड का आदेश जारी हुआ था। एनएचपीसी ने इसे चुनौती देते हुए निचली अदालत में याचिका दायर की जिसने इसी साल 17 अप्रैल को मामला दिल्ली उच्च न्यायालय भेज दिया। एनएचपीसी ने दावा किया कि मध्यस्थता अवार्ड के लाभ का दावा करने के लिये इस कंपनी ने नीति आयोग द्वारा जारी शर्तो का पालन नहीं किया है। नीति आयोग ने वर्ष 2016 में एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया था जिसमें निर्माण क्षेत्र के पुनरुत्थान के लिये विभिन्न उपायों को सूचीबद्ध किया गया था।

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