डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव से प्रिंट मीडिया प्रभावित

डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव से प्रिंट मीडिया भी प्रभावित होती जा रही है, आजकल ये देखने को मिल रहा है कि अख़बार में छपी कोई भी ख़बर लोग अख़बार में पढ़ने की बजाय वाट्स एप या फेस बुक पर तलाश करते हैं।अजीब मामला ये है कि सोशल मीडिया में अख़बार की कटिंग स्वयं अख़बार के रिपोर्टर के ही आई डी से अप लोड की जाती है
 इसका नुकसान ये हो रहा है कि प्रिंट मीडिया के पाठकों की, या अख़बार ख़रीद कर पढ़ने वालों की संख्या दिन प्रतिदिन कम होती जा रही है, मुझे याद है 90 के दशक में जब किसी की ख़बर अख़बार में छपती थी या अगले दिन छपने वाली होती थी तो लोग बेसब्री से अख़बार वितरक का इंतज़ार करते थे और अख़बार मिलने पर बड़े शौक से घण्टों अख़बार हाथ में लेकर चलते थे, अपनी ख़बर के बहाने ख़ुद पूरा अख़बार पढ़ते और कई लोगों को पढ़ाते भी थे।
प्रिंट मीडिया की ख़बरों को सोशल साइट्स पर भेजने के ट्रेंड ने अख़बार की अहमियत सर्कुलेशन और महत्व को काफ़ी कम कर दिया है आज हालत ये है कि लोग अपनी ही ख़बर को पढ़ने के लिए अख़बार के बजाय सुबह सुबह वाट्स एप या फेस बुक चेक करते नज़र आते हैं, अख़बार देखते ही नहीं।
 प्रिंट मीडिया के रिपोर्टर भी इसके लिए कम ज़िम्मेदार नहीं है जब पाठक आसानी से किसी ख़बर को पढ़ लेंगे तो बिला वजह वो अख़बार तलाश क्यों करे, यही कारण है कि अख़बार जारी कराना, कटिंग रखने, और महत्वपूर्ण ख़बरों को कई साल तक सुरछित करने की कोशिश पाठकों के बीच से समाप्त हो रही है मेरी बात कुछ लोगों को ख़राब लग सकती है कुछ लोग असहमत भी हो सकते हैं परंतु मैं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के मुक़ाबले प्रिंट मीडिया का महत्व जानता हूँ इस लिए मेरा निवेदन है कि प्रिंट मीडिया का महत्व बरकरार रखने के लिए और लोगों को अख़बार पढ़ने की आदत डालने के लिए कोशिश करें, कोई बात बुरी लगे तो क्षमा करें।
 लेखक : उत्तर प्रदेश जिला  संत कबीर नगर के जिला पंचायत सदस्य हैं 

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