दे दो ना हमें वो सामाजिक सम्मान और अधिकार जो हज़ारों सालों से भोगते आए हो!

जो आरक्षण का विरोधी होगा उसे हमारा सुभचिंतक कहलाने या जुमलेवाजी करने का कोई हक़ नहीं, चाहे वो जो हो! अगर आरक्षण से इतनी नफरत है तो बराबर से बांट दो ना अपनी ज़मीन एवं सम्पत्ति नीची जातियों में, और करो ना आपस में एक दूसरे के घर शादी! ध्वस्त कर दो ना खाप वाली मानसिकता! आओ, पढ़ो ना हमारे साथ एक ही सरकारी स्कूलों में! स्वीकार कर लो ना हमें अपने निजी कपनियों में, और आने दो ना हमें संख्या के आधार पर सर्वोच्च न्याययालय में ! दे दो ना हमें वो सामाजिक सम्मान और अधिकार जो हज़ारों सालों से भोगते आए हो! इसमें हमारा क्या कसूर है की हम किसी विशेष जाति में पैदा लिए हैं?, आख़िर हम भी इंसान है! कोई किसी भी जाति में पैदा लिया हो, इस से हमें कोई समस्या नहीं, पर जाति और धर्म के नाम पर अत्याचार उचित है क्या?
तुम ही कहते हो ना ग़रीबी जाति देख कर नहीं आती; तो अत्याचार जाति देखकर क्यों करते हो?
हमारे देश की यह सत्यता है कि लोकतांत्रिक ढांचे के इतने साल बाद भी हमारा समाज जातीय आधार पर बंटा हुआ है! और जब तक समाज में किसी भी तरह का ग़ैर बराबरी रहेगा लोकतांत्रिक समाज की स्थापना और राष्ट्रनिर्माण में सबसे बड़ा बाधा बना रहेगा! जब तक समाज का हर तबक़ा ख़ुद को राष्ट्र का समान हिस्सेदार ना मानने लगें, बाबा साहेब के सपनों का राष्ट्र संभव नहीं! लिखित रूप में हमारा संविधान दुनियाँ का सबसे अच्छा संविधान है, इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी है जिनके हाथों वोट देकर हमने अपना भविष्य गिरवी रखा हुआ है! हमें अगर समतामूलक समाज चाहिए तो सर्वप्रथम हमें अपना संविधान बचाना चाहिए, धर्म एवं हमारे सारे अधिकार स्वतः ही बच जाएंगे! इस संदर्भ में बाबा साहब ने कहा था कि हम सबसे अच्छा संविधान लिख सकते हैं, लेकिन उसकी कामयाबी आख़िरकार उन लोगों पर निर्भर करेगी, जो देश को चलाएंगे! ये जो तुम्हारा खेला है हम अच्छे से समझते हैं, हमारी आवादी 85 प्रतिशत और हमें 49.5 प्रतिशत में समेटे रखना चाहते हो और खुद 15 प्रतिशत होकर 50.5 प्रतिशत हथियाने का षड्यंत्र रच रहे हो! समाज के जातीय विविधताओं को हम स्वीकार करते हैं परन्तु ये जो तुम्हारा ग़रीब को और ग़रीब एवं अमीर को और अमीर बनाने का खेला है ना अब ज़्यादा दिन चलने वाला नहीं!   #संविधान_बचाओ_देश_बचाओ!   नोट: अगर समाज में बराबरी लाना है तो सदियों से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से शोषित, पीड़ित और वंचित लोगों को उनका अधिकार देना होगा!

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