इटली-जापान के साथ स्टील्थ फाइटर जेट बनाएगा ब्रिटेन:2035 में उड़ान भरेंगे; चीन को जवाब देने की तैयारी शुरू
यूरोप और एशिया के तीन देश मिलकर चीन को डिफेंस टेक्नोलॉजी के मामले में टक्कर देने जा रहे हैं। जापान, इटली और ब्रिटेन 2035 तक स्टील्थ फाइटर जेट की एक स्पेशल स्क्वॉड्रन लॉन्च करेंगे। इसे नेक्स्ट जेनरेशन फाइटर जेट्स और सीक्रेट कटिंग एज टेक्नोलॉजी कहा जा रहा है।
इस बारे में बहुत कम जानकारी सामने आ रही है। ‘फॉक्स न्यूज’ के अलावा कुछ और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक- प्रोजेक्ट के लिए टेक्नोलॉजी तैयार करने का जिम्मा जापान के पास है। ब्रिटेन में असेंबलिंग होगी और इटली का एयरोनॉटिकल डिपार्टमेंट सेंसेटिव पार्ट्स तैयार करेगा।
सुपरसोनिक होंगे सभी फाइटर जेट्स
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कुछ महीने पहले इस इंटरनेशनल ट्रीटी के बारे में जानकारी दी थी। हालांकि, सुनक ने भी इस प्रोजेक्ट के मकसद और टेक्नोलॉजी के बारे में ज्यादा नहीं बताया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक- ब्रिटेन का ग्लोबल कॉम्बेट एयर प्रोग्राम (GCAP) इस प्रोजेक्ट का हेडक्वॉर्टर होगा। जापान, इटली और ब्रिटेन यानी तीनों ही देशों में इस प्रोजेक्ट पर सीक्रेट तरीके से, लेकिन बहुत तेजी से काम किया जा रहा है। माना जा रहा है कि मार्च 2035 में इसकी एक स्क्वॉड्रन आसमान में नजर आएगी। ब्रिटेन की रॉयल एयरफोर्स को टेस्टिंग फेसेलिटी और रखरखाव का जिम्मा सौंपा गया है।

ब्रिटेन के डिफेंस मिनिस्टर ने क्या कहा
- इस प्रोजेक्ट के लिए ट्रीटी पर दस्तखत भले ही इस हफ्ते टोक्यो में किए गए हों, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि ट्रीटी साइन होने के पहले ही प्रोजेक्ट प्लान और फेसेलिटी का काम शुरू हो चुका था। ब्रिटेन की डिफेंस मिनिस्ट्री ने कहा- डिफेंस और खासतौर पर एयर डिफेंस टेक्नोलॉजी के मामले में बहुत बड़ा चमत्कार होने जा रहा है।
- ब्रिटेन के डिफेंस मिनिस्टर ग्रांट शार्प ने कहा- टोक्यो में मैंने जापान और इटली के डिफेंस मिनिस्टर्स के साथ ट्रीटी पर साइन किए। अभी सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि हम ग्लोबल सिक्योरिटी को पुख्ता करके के मिशन में जुट चुके हैं। इस प्रोजेक्ट का मकसद किसी पर दबाव बनाना नहीं है, हम तो अमन कायम रखने के लिए यह काम कर रहे हैं।

क्या होगा खास
- एक रिपोर्ट के मुताबिक- इन स्टील्थ फाइटर के लिए जो राडार तैयार किए जा रहे हैं, वो फिलहाल मौजूद राडार की तुलना में 10 हजार गुना ज्यादा डाटा मुहैया करा सकेंगे, शायद इससे भी ज्यादा।
- इन स्टील्थ जेट्स की एक खासियत यह होगी कि इनके पायलट्स की पूरी ट्रेनिंग वर्चुअल रिएलिटी में होगी। इसके लिए डिजिटल कॉकपिट बनाए जा रहे हैं। जंग के हालात में हर बड़ी और छोटी जानकारी पायलट्स की स्क्रीन पर होगी। बहुत मुमकिन है कि उन्हें कमांड सेंटर से बातचीत भी न करनी पड़े।
- इन फाइटर जेट्स में लगा वेपन्स सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस होगा और इसे हैक नहीं किया जा सकेगा। कुछ खबरों के मुताबिक- तीनों देश शुरुआत में इस प्रोजेक्ट पर 6 अरब डॉलर खर्च कर रहे हैं। इसमें लगने वाली मिसाइलें कौन सी होंगी, इस बारे में तीनों ही देश चुप हैं।
- माना जा रहा है कि अमेरिका ने ही ब्रिटेन, जापान और इटली को इस प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए तैयार किया था। इसके लिए कोशिश दिसंबर 2020 में शुरू हुई थी। अमेरिका चाहता है कि जापान और इटली के टेक्नोलॉजी एक्सीलेंस को ब्रिटेन अपनी मैन्यूफैक्चरिंग फैसेलिटी मुहैया कराए। बाद में तीनों ही देश इसके लिए तैयार हो गए।
- दरअसल, अमेरिका और ये तीनों देश भले ही प्रोजेक्ट के मकसद पर कुछ न बोल रहे हों, लेकिन इसका मकसद चीन को घेरना है। जापान की रोबोटिक टेक्नोलॉजी को इसीलिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाले सभी कर्मचारियों और इंजीनियर्स की पहचान उजागर नहीं की जाएगी।

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