ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच ट्रेड डील:यूरोपियन यूनियन से अलग होने के बाद सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता, PM जॉनसन बोले- दोनों देशों के रिश्तों में नई सुबह
ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच फ्री ट्रेड डील पर सहमति बन गई है। ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन से अलग होने के बाद किसी भी देश के साथ ये पहली बड़ी डील है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इसकी औपचारिक घोषणा करते हुए डील को दोनों देशों के बीच रिश्तों की नई सुबह बताया है।
इससे पहले सोमवार देर रात लंदन में दोनों देश के प्रधानमंत्री के बीच मुलाकात हुई। लंबे समय से बातचीत के बाद अब सभी तरह के मुद्दों पर सहमति बनी है। पिछले हफ्ते हुई जी-7 की बैठक को भी इस डील के लिए अहम माना जा रहा है। G7 की बैठक में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।
ऑस्ट्रेलिया के ट्रेड मिनिस्टर ने समझौते पर खुशी जताई
ऑस्ट्रेलिया के ट्रेड मिनिस्टर डैन टेहन ने बताया कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष स्कॉट मॉरिसन ने लंदन में बातचीत के दौरान समझौते पर सहमति जताई। ये समझौता जॉब्स, बिजनेस, फ्री ट्रेड की जीत है। उन्होंने कहा कि दो लोकतंत्र एक साथ काम करते हुए क्या हासिल कर सकते हैं, ये डील इस बात को दिखाती है।
ब्रिटेन ऑस्ट्रेलिया का 8वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार
ब्रिटिश सरकार इस समझौते को व्यापारिक और कूटनीतिक रणनीति के तहत महत्वपूर्ण मान रही है। साथ ही अपने इकोनॉमिक सेंटर को यूरोप से बाहर इंडो-पैसेफिक देशों में नए अवसर के तौर पर देख रही है। ब्रिटेन ऑस्ट्रेलिया के लिए आठवां सबसे बड़ा और ऑस्ट्रेलिया के लिए ब्रिटेन 20वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है। दोनों देशों के बीच 20.7 अरब डॉलर का व्यापार होता है। 1973 में यूरोपियन कॉमन मार्केट में शामिल होने से पहले ब्रिटेन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा बाजार था।
दोनों देशों के बीच किस स्तर का समझौता हुआ है, फिलहाल उसकी जानकारी सामने नहीं आई है। आधिकारिक अनुमानों के मुताबिक ये ब्रिटेन के इकोनॉमिक आउट-पुट में 500 मिलियन पाउंड की वृद्धि करेगा, जो 2 ट्रिलियन पाउंड की अर्थव्यवस्था के लिए एक छोटा सा अंश है, लेकिन ब्रिटेन के लिए ये एक महत्वपूर्ण फैसला है। पहली बार ब्रिटेन ने कई दशकों बाद अपनी व्यापारिक नीति विकसित की है।
क्या भारत और ब्रिटेन के बीच भी हो सकती है ट्रेड डील?
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री अप्रैल में भारत दौरे पर आने वाले थे, लेकिन भारत में कोरोना की दूसरी लहर के चलते उन्हें अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ी थी। इससे पहले उन्हें 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में चीफ गेस्ट के तौर पर भारत का दौरा करना था। वहीं, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जून में ब्रिटेन जाने वाले थे। वे यहां G7 समिट में हिस्सा लेते। कॉर्नवाल में होने वाली समिट के लिए मोदी को ब्रिटेन ने न्योता भेजा था, लेकिन कोरोना की वजह से G7 की बैठक वर्चुअल हुई थी।
हालांकि एक्सपर्ट्स की मानें तो ब्रिटेन और भारत के बीच मुक्त व्यापार का समझौता हो सकता है। इसकी वजह ब्रिटेन एक छोटा देश है। वह एक सेंट्रल मार्केट है। पुर्तगाल और ग्रीस जैसे कई देश ब्रिटेन से सामान ले जाते हैं। ब्रिटेन के साथ FTA होने से भारत को बड़ा मार्केट मिल सकता है। भारत ब्रिटेन के लिए साइबर सुरक्षा, डिफेंस और फाइनेंस में बड़ा भागीदार बन सकता है।

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