बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में BJP के इन 30 MLA पर लटकी तलवार, टिकट काटने की सिफारिश

 

भाजपा के मंडल अध्यक्षों ने राज्य के 30 पार्टी विधायकों का टिकट काटने की सिफारिश कर पार्टी नेतृत्व के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। मंडल अध्यक्षों ने दो टूक कहा है कि ये तीस विधायक अगर फिर से उम्मीदवार बनाए गए तो उनकी जीत मुश्किल होगी, इतना ही नहीं, पार्टी की मंडल इकाई ने उन्हें भी टिकट न देने की सलाह दी है जो बीते चुनाव में 25 से 30 हजार से अधिक मतों से चुनाव हार गए थे। 

 दरअसल, एनडीए में अभी सीटों की संख्या का औपचारिक ऐलान भले ही नहीं हुआ है लेकिन अंदरखाने में उम्मीदवार भी तय हो रहे हैं। खासकर वैसी सीटें जहां पर एनडीए में कोई विवाद नहीं है, उन सीटों पर भाजपा में भी अधिकतर नेताओं को क्षेत्र में जाकर काम करने को कहा गया है। इसी क्रम में हाल ही में पार्टी ने मंडल अध्यक्षों से उम्मीदवारों के मसले पर राय मांगी। सभी मंडल अध्यक्षों ने उम्मीदवार चयन पर अपनी राय दी है। बिहार भाजपा के 45 संगठनात्मक जिले के अधीन लगभग 11 सौ मंडल अध्यक्ष हैं।  

पार्टी सूत्रों के अनुसार भाजपा के मौजूदा 53 में से 30 से अधिक विधायकों के खिलाफ मंडल अध्यक्षों ने अपनी राय दी है। दो टूक कहा है कि अगर दल को पक्की जीत सुनिश्चित करनी है तो चेहरा बदला जाना जरूरी है।  हालांकि मंडल अध्यक्षों ने यह भी कहा है कि मतदाताओं में दल के प्रति निष्ठा बरकरार है। पार्टी की जीत पक्की है लेकिन उम्मीदवारों को लेकर लोगों की नाराजगी है। यह नाराजगी चुनाव में भारी न पड़ जाए, इसके लिए यह जरूरी है कि उम्मीदवार बदलकर नए चेहरे को मौका दिया जाए।
 
25-30 हजार से अधिक मतों से चुनाव हारे
मंडल अध्यक्षों ने वैसे उम्मीदवारों को भी टिकट देने से परहेज करने को कहा है जो पिछली बार 25-30 हजार से अधिक मतों से चुनाव हारे थे। दल का मानना है कि अधिक मतों से हारे प्रत्याशी फिर से चुनावी जीत हासिल कर सकेंगे, इसपर संशय है। वर्ष 2015 के चुनाव में पिपरा से विश्वमोहन कुमार- 36369 मतों से चुनाव हार गए थे। इसी तरह सुपौल से किशोर कुमार-37397, अमौर से सबा जफर-51997, बिहारीगंज से रवीन्द्र चरण यादव-29253, मधेपुरा से विजय कुमार विमल- 37642, सहरसा से आलोक रंजन-39206, गरखा से ज्ञानचंद मांझी-39883, सोनपुर से विनय कुमार सिंह-36396 मतों से हार गए थे। जबकि समस्तीपुर से रेणु कुमारी-31080, सराय रंजन से रंजीत निर्गुनी-34044, रोसड़ा से मंजू हजारी-34361, बखरी से रामानंद राय-40256, परबत्ता से रामानुज चौधरी-28924, सूर्यगढ़ा से प्रेमरंजन पटेल-30030, बिक्रम से अनिल कुमार-44311, राजपुर से विश्वनाथ राम-32788 व बोधगया से श्यामदेव पासवान-30473 मतों से हार गए थे। 
हो रहा लगातार विरोध

भाजपा के कई मौजूदा विधायकों के प्रति विरोध जारी
भाजपा के कई मौजूदा विधायकों के प्रति विरोध जारी है। हाल ही, में लखीसराय के विधायक और श्रम संसाधन मंत्री विजय कुमार सिन्हा के खिलाफ प्रदेश भाजपा कार्यालय में भारी विरोध हुआ था। दानापुर उम्मीदवार बदलने को लेकर भी कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कार्यालय में जमकर हंगामा किया था। बांकीपुर में एक भाजपा की नेत्री बड़े-बड़े होर्डिंग, बैनर-पोस्टर लगवाकर खुद को उम्मीदवार बनाने पर तुली हैं। कुम्हरार में पटना महानगर से जुड़े नेता-कार्यकर्ताओं ने बैनर-पोस्टर लगाने के साथ ही उम्मीदवार बदलने को लेकर आलाकमान को पत्र भी सौंपा है। बोचहां में भी उम्मीदवार को लेकर नाराजगी के स्वर उभर चुके हैं। जब तक टिकट का वितरण नहीं होगा, तब तक दल के कार्यकर्ताओं की यह नाराजगी जारी रहेगी। वैसे भाजपा की बेहतर कार्यसंस्कृति में एक यह भी है कि दल अगर किसी को टिकट दे तो फिर सभी नेता-कार्यकर्ता मिलकर उन्हें जिताने में लग जाते हैं।  
 
सीट को लेकर आश्वस्त 
वहीं दूसरी ओर भाजपा के मौजूदा विधायक या हारे हुए उम्मीदवार आश्वस्त हैं कि उनका टिकट नहीं कटेगा। अन्य दलों की तरह ही भाजपा में भी धीरे-धीरे वह संस्कृति पनपने लगी है कि किसी आलानेता को पकड़कर विधायक का टिकट कन्फर्म करा लें। दल की सेवा करने के बजाए नेताओं के आसपास रहने वाले ऐसे लोगों की सक्रियता बढ़ने के कारण अगर फिर से टिकट पा लें तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। ऐसे में मंडल अध्यक्षों की अनुशंसा रद्दी की टोकड़ी में ही पड़ी रह जाए तो इसमें कोई हैरत की बात नहीं होगी।

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