भारत के बहुत बड़े हिस्से को अभी भी स्वच्छ भारत मुहिम की जरूरत
विचार विमर्श:- कुछ समय पहले अक्षय कुमार की फ़िल्म आयी थी टॉयलेट तो मैं समझ नही पाया था के आज की इक्कीसवीं सदी में इस बात की जरूरत क्या है जबकि अब तो सबके घर में टॉयलेट है। मेरी ये सोच इस लिए भी थी क्यों कि मैं पंजाब से आता हूं जहां पर ये सब मसला है ही नही आज से नही दशकों पहले से। मैं अपने दादा से सुनता था कि उनके अब्बा के टाइम में लोग मिट्टी के घर में रहते थे और लौटा ले के खेतों में जाते थे।
मगर जब मैं बिहार में गया तो भईया वहाँ तो दुनिया ही अलग है। भारत दुनिया से 50 साल पीछे है और बिहार भारत से भी 50 साल पीछे है। वहां देखा क्या मैंने पूरे के पूरे गांव में टॉयलेट नहीं है एक भी घर ऐसा नही मिला जहाँ टॉयलेट हो बस लौटा लो और निकल लो खेतों की सैर करने।मैं मोदी सरकार का वैसे तो आलोचक हूँ मगर इस मामले में कहूँगा प्रधान सेवक जी आपकी ये मुहिम सच्च में भारत के बहुत बड़े हिस्से की जरूरत है तो कृपया राजनीति से ऊपर उठ के इस मुहिम को सच्च में उन दूर दराज के इलाकों में लागू करें जो बेचारे जिन्दा रहने के लिए जरूरी सुविधाओं से भी महरूम है। इमरान अंसारी

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