फर्जी TRP घोटाले विवाद के बीच BARC का बड़ा फैसला, न्‍यूज़ चैनलों की साप्ताहिक रेटिंग पर अस्थायी रूप से लगाई रोक

फर्जी टीआरपी को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच टीवी रेटिंग्‍स जारी करने वाली संस्‍था ब्रॉडकास्‍ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) ने बड़ा फैसला किया है। BARC ने न्‍यूज़ चैनलों की साप्‍ताहिक रेटिंग्‍स पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। ख़बरो के मुताबिक, BARC ने 12 हफ्ते के लिए रेटिंग्‍स न जारी करने का फैसला किया है।

गौरतलब है कि, पिछले कुछ दिनों में फर्जी रेटिंग और टीआरपी के लिए किए जा रहे कथित घोटाले पर बड़ा विवाद खड़ा हुआ है और इसकी चपेट में कई छोटे-बड़े न्यूज चैनल आए हैं, जिसके बाद एजेंसी ने अपने सिस्टम की पूरी तरह जांच करने के लिए तीन महीनों तक के लिए साप्ताहिक रेटिंग रोक दी है। रेटिंग्स का निलंबन अंग्रेजी, हिंदी, क्षेत्रीय भाषाओं और बिजनेस न्यूज़ चैनलों पर लागू होगा।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, BARC ने गुरुवार को एक बयान जारी कर कहा, ‘BARC अपने सिस्टम की जांच कर रहा है। इसके लिए न्यूज की कैटेगरी से प्रक्रिया शुरू की जा रही है। एजेंसी सभी न्यूज चैनलों की साप्ताहिक रेटिंग पब्लिशिंग रोक रही है। इस प्रक्रिया में 8 से 12 हफ्ते लग सकते हैं। सिस्टम की टेस्टिंक को BARC की टेक कॉम. देख रही है। एजेंसी खबरों के राज्य और भाषा के मानकों पर दर्शकों का साप्ताहिक आंकड़ा जारी करती रहेगी।’

रेटिंग एजेंसी ने अपने बयान में कहा कि उसने यह कदम ‘बड़ी कैटेगरीज़ के डेटा की रिपोर्टिंग और रेटिंग मापने के अपने मौजूदा सिस्टम की समीक्षा करन का फैसला किया है, ताकि उसके सांख्यिकी को और मजबूत किया जा सके और इससे छेड़छाड़ करने की संभावित कोशिशों पर रोक लगाई जा सके।’

मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया देशभर में अलग-अलग जगहों पर 30 हजार बैरोमीटर लगाए गए हैं। मुंबई में इन मीटरों को लगाने का काम हंसा नाम की संस्था ने किया था। मुंबई पुलिस का दावा है कि हंसा के कुछ पुराने वर्करों ने जिन घरों में पीपल्स मीटर लगे थे, उनमें से कई घरों में जाकर वे लोगों से कहते थे कि आप 24 घंटे अपना टीवी चालू रखिए और फलां चैनल लगाकर रखिए। इसके लिए वे लोगों को पैसे भी देते थे। मुंबई पुलिस का दावा है कि अनपढ़ लोगों के घरों में भी अंग्रेजी के चैनल को चालू करवाकर रखा जाता था।

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