बांग्लादेश में आम चुनाव, वोटिंग खत्म, काउंटिंग शुरू:महज 27% मतदान हुआ; भारत के नॉर्थ-ईस्ट राज्यों की सुरक्षा के लिए बांग्लादेश अहम
बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए वोटिंग खत्म हो गई है। भारतीय समय के मुताबिक रविवार सुबह 7:30 बजे वोटिंग की शुरुआत हुई, जो 4 बजे तक चली। बांग्लादेश में 3 बजे तक सिर्फ 27.15% वोट पड़े।
नतीजे कल यानी 8 जनवरी को आएंगे। विपक्षी पार्टियों ने चुनाव का बहिष्कार किया, ऐसे में सत्ताधारी अवामी लीग की जीत तय मानी जा रही है। इसकी नेता शेख हसीना अभी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री हैं।
बांग्लादेश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP का आरोप है कि हसीना के नेतृत्व में निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकते। विपक्ष ने शेख हसीना से पद छोड़ने और केयकटेकर सरकार की देखरेख में चुनाव कराने की मांग की थी। शेख हसीना और उनकी पार्टी ने इस मांग को खारिज कर दिया। ताजा अपडेट के मुताबिक बांग्लादेश में वोटों की गिनती शुरू हो गई है।

भारत के लिए बांग्लादेश अहम
बांग्लादेश को भारत, वहां की सरकार, लोगों और सेनाओं को नहीं भूलना चाहिए क्योंकि 1971 में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने बांग्लादेश का साथ दिया था।
2022 में भारत दौरे के वक्त बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने यह बात कही थी। उनके इस बयान की मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने आलोचना की थी। पार्टी के एक सीनियर नेता रुहुल कबीर रिजवी ने BBC से कहा था- भारत को किसी एक पार्टी नहीं, बल्कि बांग्लादेश के लोगों का समर्थन करना चाहिए। दुर्भाग्य यह है कि भारत के पॉलिसीमेकर बांग्लादेश में लोकतंत्र नहीं चाहते हैं।
बांग्लादेश तीन तरफ से भारत के साथ सीमा साझा करता है। वहीं म्यांमार से भी वो 271 किमी लंबी सीमा शेयर करता है। नॉर्थ ईस्ट राज्यों से कनेक्शन और वहां की सुरक्षा के लिहाज से बांग्लादेश भारत के लिए बेहद अहम साझेदार है। वहीं चीन के BRI प्रोजेक्ट का हिस्सा होने के साथ ही बांग्लादेश के ड्रैगन से मजबूत रिश्ते हैं।

भारत की मदद से ही बांग्लादेश को मिली आजादी
बांग्लादेश के चुनावों में हमेशा से भारत की चर्चाएं रहती है। चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं के भाषण में भारत का जिक्र होता रहता है। दोनों देशों में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्तर पर कई समानताएं हैं। 1971 से पहले तक बांग्लादेश पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का हिस्सा था। इसे पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था।
साल 1971 में बांग्लादेश में पाकिस्तान की सत्ता के खिलाफ विद्रोह तेज होने लगा था। अवामी लीग पार्टी के नेता शेख मुजीब-उर-रहमान ने 26 मार्च 1971 को बांग्लादेश को आजाद घोषित कर दिया था।
इसके बाद महीनों तक चली आजादी की लड़ाई के बाद दिसंबर में पाकिस्तान के साथ जंग की शुरुआत हुई, जिसमें भारत ने बांग्लादेश का साथ दिया था। 13 दिन तक चली जंग के बाद 16 दिसंबर को पाकिस्तान की सेना ने समर्पण कर दिया था। इस युद्ध में चीन ने पाकिस्तान का साथ दिया था।
नॉर्थ-ईस्ट राज्यों से कनेक्शन के लिए बांग्लादेश हमारे लिए जरूरी
बांग्लादेश के साथ भारत सड़क, नदी और ट्रेन मार्ग से जुड़ा है। इनका इस्तेमाल बांग्लादेश से व्यापार के साथ-साथ नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में जरूरी सामान पहुंचाने के लिए भी किया जाता है। ये 20 किलोमीटर चौड़ा एक कॉरिडोर है जो नेपाल, बांग्लादेश और भूटान के पास से होकर गुजरता है। इसे सिलगुड़ी कॉरिडोर या चिकेन्स नेक कहते हैं।
BBC के मुताबिक, 1996 में पहली बार चुनाव जीतने के बाद से अवामी पार्टी की नेता शेख हसीना ने भारत से करीबी रिश्ते रखे हैं। 2001 में बांग्लादेश में BNP पार्टी ने चुनाव जीते। BNP लीडर खालिदा जिया प्रधानमंत्री बनीं। अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट्स ने यूं तो चुनावों को निष्पक्ष बताया था, लेकिन अलजजीरा के मुताबिक इस दौरान हुई हिंसा में हिंदू समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया था।

BNP की सरकार में भारत-बांग्लादेश के रिश्ते बिगड़े
खालिदा की लीडरशिप में 2001 में ही सीमा पर झड़प के दौरान बांग्लादेश की पैरामिलिट्री के सैनिकों ने BSF के 16 जवानों की हत्या कर दी थी। इसके बाद उनके शवों को भी बुरी तरह से बिगाड़ दिया गया था। बांग्लादेश में भारत के राजदूत रहे पिनाक रंजन चक्रवर्ती ने BBC को बताया- उन्होंने वहां कई जिहादी समूहों को जन्म दिया, जिनका इस्तेमाल अलग-अलग कामों को पूरा करने के लिए किया गया।
इनमें 2004 में शेख हसीना की हत्या की कोशिश और पाकिस्तान से आए हथियारों से भरे ट्रकों को पकड़ना शामिल था। 2009 में शेख हसीना की सत्ता में वापसी के साथ बांग्लादेश और भारत के रिश्तों में सुधार आया। हसीना की सरकार ने उत्तर-पूर्वी इलाकों में एक्टिव नस्लीय विद्रोही गुटों के खिलाफ कार्रवाई की, जो बांग्लादेश में रहते हुए भारत में हिंसा फैला रहे थे।
चीन अपनी विस्तारवाद नीति के तहत नॉर्थ-ईस्ट में भारत के कई क्षेत्रों पर अपना दावा करता है। ऐसे में बांग्लादेश इन क्षेत्रों में भारत के लिए प्रतिरोध का काम करता है। बांग्लादेश के साथ भारत दुनिया की 5वीं सबसे लंबी सीमा साझा करता है। किसी भी स्थित में नॉर्थ-ईस्ट राज्यों तक मानवीय और सैन्य मदद पहुंचाने के लिए भारत बहुत हद तक बांग्लादेश पर निर्भर रहेगा।
चीन के BRI प्रोजेक्ट में शामिल बांग्लादेश
भारत के अलावा बांग्लादेश के चीन के साथ भी रणनीतिक संबंध हैं। चीन के BRI प्रोजेक्ट में बांग्लादेश अहम साझेदार है। इसके तहत चीन यहां 3.16 लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश कर चुका है। बांग्लादेश के चीन के साथ सैन्य संबंध भी हैं। वो चीन से हथियार खरीदने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है।
दूसरी तरफ, भारत पर दबाव बनाए रखने के लिए भी चीन बांग्लादेश में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। वहीं पश्चिमी देशों की बात की जाए, तो अमेरिका बांग्लादेश में सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है। बांग्लादेश साउथ एशिया के देशों में रेडीमेड कपड़ों का सबसे बड़ा बाजार है। अमेरिका कई बार बांग्लादेश में निष्पक्ष चुनावों को लेकर चिंता जता चुका है।

अमेरिका ने बांग्लादेशियों के लिए बदली वीजा पॉलिसी
मई 2023 में अमेरिका ने स्पेशल वीजा पॉलिसी की घोषणा की थी। उसने कहा था कि उसका मकसद उन बांग्लादेशी लोगों को वीजा देने पर रोक लगाना है जो वहां लोकतांत्रिक चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करने के लिए जिम्मेदार हैं।
अमेरिका के इस कदम की चीन और रूस ने निंदा की थी। BBC के मुताबिक, चुनावों को लेकर अमेरिका का मकसद PM हसीना पर दबाव बनाना है ताकि ढाका पर बीजिंग का प्रभाव कम हो सके। वहीं रूस भी बांग्लादेश के साथ अपने रिश्तों को मज़बूत कर रहा है। उसने हाल ही में पांच दशकों में पहली बार बांग्लादेश में युद्धपोत भेजा था। उसने अमेरिका पर चुनावों में दखल देने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया था।

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