बाबरी मस्जिद विवाद: यूपी सरकार ने कहा- इस्माइल फ़ारूक़ी फैसले पर पेहले कभी सवाल क्यों नही उठा

सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद राम मंदिर विवाद पर आज गर्मी की छुट्टियों के बाद फिर से सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने आरोप लगाया कि 1994 के इस्माइल फ़ारूक़ी के जिस फैसले का अभी हवाला दिया जा रहा है उसकी वैधता को लेकर पेहले कभी सवाल नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट में आज बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई की शुरआत में सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से जिरह शुरू की गई। सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने जिरह करते हुए कहा कि इस्लाम में मस्जिद की अहमियत है और यह सामूहिकता वाला मजहब है। उन्होंने कहा कि इस्लाम में मस्जिद की अपनी अहमियत है। इस्लाम में नमाज कहीं भी नमाज अदा की जा सकती है। सामूहिक नमाज मस्जिद में ही होती। वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि मस्ज़िद में नमाज के लिए जमा होना इस्लाम का ज़रूरी हिस्सा। जैसे ईसाई रविवार को चर्च में प्रार्थना के लिए जमा होते हैं, वैसे ही मुस्लिम शुक्रवार को जुटते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से एएसजी तुषार मेहता ने जिरह करते हुए कहा कि मस्जिद को इस्लाम का हिस्सा न मानने वाला ये फैसला 1994 में आया था,अब तक मुस्लिम पक्षकारों ने फैसले को कभी चुनौती देने की बात नहीं की, लेकिन अब जानबूझकर इस मुददे को रखकर सुनवाई को लटकाने की कोशिश की जा रही है। यूपी सरकार ने कहा कि न ही निचली अदालत और न ही हाईकोर्ट में इस मामले को उठाया गया है। पिछले 8 साल से मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, लेकिन इस मामले को कभी नहीं उठाया गया। राम मंदिर को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने मुस्लिम पक्ष पर आरोप लगाया कि मामला 8 साल से लंबित है, लेकिन इस मुद्दे को नहीं उठाया गया। अब जब इस मामले में सभी कागजी करवाई पूरी हो गई है तो इस मामले को उठाया जा रहा है ताकि मुख्य मामले में सुनवाई में और देरी हो। इस मामले में अब 13 जुलाई को अगली सुनवाई होगी। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी. वाई चन्द्रचूड़ की पीठ कर रही है।

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