बाबरी मस्जिद विवाद: रामललाल ने मुस्लिम गवाहों की गवाही पेश की
सुप्रीम कोर्ट में आज अयोध्या बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि विवाद में आठवें दिन की सुनवाई हुई। रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने अपनी दलीलों को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जहां मस्जिद बनाई गई थी उसके नीचे एक विशाल निर्माण था और ASI की खुदाई में जो चीजें सामने आईं हैं उसके मुताबिक वह हिंदू मंदिर था।
वैद्यनाथन ने हाईकोर्ट में पेश किये गए सबूतों और ASI की रिपोर्ट्स के हवाला देते हुए दलील दी कि 1992 में जब बाबरी मस्जिद गिराया गया था उस समय पत्थर के स्लैब मिले थे जिनमें 12 या 13 वीं शताब्दी में संस्कृत में लिखा एक शिलालेख मिला था। संस्कृत वाले शिलालेख को विवादित ढांचा विध्वंस के समय पांचजन्य के एक पत्रकार ने गिरते हुए देखा था। इस शिलालेख में साकेत के राजा गोविंद चंद्र का नाम लिखा है। साथ ही लिखा है कि यह विष्णु मंदिर में लगी थी। सीएस वैद्यनाथन ने यह कहा कि ' ये शिलालेख ASI के निष्कर्षों का समर्थन करता है कि इस स्थान पर एक विशाल मंदिर था, विवादित स्थल पर मस्जिद या तो मंदिर के अवशेष पर बनी या मंदिर को गिरा कर बनाई गई।' रामलला विराजमान के वकील के इस सबूत पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि 'क्या संस्कृत वाले शिलालेख जैसी चीजों को ASI ने इकट्ठा किया था?' इसपर रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि यह ASI रिपोर्ट में नहीं था क्योंकि ASI काफी बाद में आई थी। रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने इस मामले में मुस्लिम गवाहों की गवाही पेश करते हुए कहा कि 'एक मुस्लिम गवाह ने गवाही दी थी कि अगर मंदिर गिरा कर मस्जिद बनाया गया होता तो मुस्लिम उसको मस्जिद नही मानेंगे, मस्जिद ज़बरदस्ती कब्ज़े में ली गई जमीन पर नही बनाई जा सकती है।' उसी गवाह ने ये भी कहा था कि ' उसने मस्जिद में आखरी बार नमाज़ पढ़ते समय देखा था कि उन पत्थरों पर कमल और दूसरी तस्वीरें थीं।' बुधवार को भी रामलला विराजमान की दलीलें जारी रहेंगी।
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