बाबरी मस्जिद विवाद: रामलला विराजमान की दलील, जन्मस्थान देवता है और देवता बंट नहीं सकता

बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि विवाद मामले में आज पांचवे दिन को सुनवाई में रामलाल विराजमान की तरफ से दलील दी रहे वरिष्ठ वकील के प्रसारण ने अपनी दलीलें पूरी कर ली। उसके बाद वरिष्ठ वकील सीएस  वैद्यनाथन ने रामलला विराजमान की तरफ से दलील प्रश करना शुरू की किया।

रामलाल विराजमान की तरफ से दलील दी गई कि राम जन्मभूमि स्वयं देवता है यह एक न्यायिक व्यक्ति की श्रेणी में रखा जा सकता है। इसका कोई मालिक नही है इसलिए देवता पर संयुक्त कब्ज़ा नही सकता है।

वैद्यनाथन ने दलील दी कि बाबरी मस्जिद का निर्माण मुगल काल के में हुआ था। हिन्दू उस दौरान ढांचा खड़ा नहीं कर सकता था, लेकिन अब उनके पास मौका है कि वो ढ़ाचा खड़ा करें और पूजा करें। वैद्यनाथ ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट इसपर सहमत था कि मंदिर तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया। जब मंदिर तोड़ा गया तो भी लोगों की आस्था जन्मभूमि पर कभी खत्म नहीं हुई बल्कि और मजबूत हुई।

रामलला विराजमान के वकील ने कहा कि विवादित भूमि से हिन्दुओं को पूरी तरह से बेदखल नहीं किया गया था, मुस्लिम कभी भी विशेष अधिकार में नहीं थे। यहां तक कि मुसलमानों ने भी इसे स्वीकार किया है।

रामलला विराजमान के तरफ से वैद्यनाथन के दलील के तरीके पर राजीव धवन ने ऐतराज जाहिर किया। राजीव धवन ने कहा कि वैद्यनाथन सिर्फ इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को पढ़ रहे हैं। इन दलीलों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं कर रहे हैं। इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ' हम ये साफ कर देने चाहते है कि हमें कोई जल्दी नहीं है। इस मामले में सभी पक्षों को अपनी दलील पेश करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। वैद्यनाथन जिस तरह से अपना पक्ष रख रहे हैं, उन्हें रखने दें।

सीएस वैद्यनाथन ने दलील दी कि भगवान का विनाश या विभाजन या अलगाव नहीं हो सकता। एक देवता की संपत्ति का भी विभाजन नहीं किया जा सकता है। इसलिए अगर देवता की संपत्ति को विभाजित नहीं किया जा सकता है, तो देवता को भी विभाजित नहीं किया जा सकता है।

रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि यह ऐतिहासिक तथ्य है कि लोग बाहर से भारत आए और उन्होंने मंदिरों को तोड़ा था,इतिहास की कुछ रिपोर्ट्स में जिक्र है कि ब्रिटिश काल में हिंदुओं को बाहर रखने के लिए एक दीवार बनाई गई थी,किसी भी रिपोर्ट में वहां पर नमाज पढ़ने का जिक्र नहीं है।

रामलला विराजमान के वकील वैद्यनाथन ने कहा अगर हिंदुओं ने पूजा के लिए स्थल बनाया और उसे तोड़ने का आदेश हुआ लेकिन हमें इनकी जानकारी नहीं है, मुसलमानों के द्वारा वहां पर नमाज़ किए जाने का तथ्य 1528 से 1855 तक नहीं है, हाईकोर्ट ने भी इस मामले का जिक्र किया है।

रामलाल के वकील एस. सी. वैद्यनाथन ने कहा कि मस्जिद से पहले उस स्थान पर मंदिर था, इसका कोई सबूत नहीं है कि बाबर ने ही वो मस्जिद बनाई थी,मुस्लिम पक्ष ने दावा किया था कि उनके पास 438 साल से जमीन का अधिकार है, लेकिन हाईकोर्ट ने भी उनके इस तर्क को मानने से इनकार कर दिया था।

रामलला के वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का ज़िक्र करते हुए कहा कि 12 दिसंबर 1949, जब से विवादित जगह पर मूर्तियां रखी गयीं हैं, न तो वहां नमाज हुआ और न ही मुस्लिम पक्षकारों का उस जमीन पर कब्जा रहा है। सीएस वैधनाथ ने कहा कि 1949 से बाबरी मस्जिद में नमाज़ अदा नहीं की जा रही है।  हाईकोर्ट ने अपने फैसले में भी ये ही लिखा है। HC के फैसले में तीनों जजों ने भी ये बात मानी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि रामलला का जन्मस्थान कहां है? रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाबरी मस्जिद के मुख्य गुंबद के नीचे वाले स्थान को भगवान राम का जन्मस्थान माना है। वैद्यनाथन ने कहा कि मुस्लिम पक्ष की तरफ से विवादित स्थल पर उनका मालिकाना हक साबित नहीं किया गया था. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि हिंदू जब भी पूजा करने की खुली छूट मांगते हैं तो विवाद होना शुरू होता है।   वैद्यनाथन ने कहा  कैलाश पर्वत और कई नदियों की लोग पूजा करते हैं। वहां कोई मूर्ति नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि चित्रकूट में राम-सीता के प्रवास की मान्यता है। लोग पर्वत को ही पवित्र मानकर परिक्रमा करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान के वकील वैद्यनाथन से पूछा कि अगर आपका पोजेशन विवादित स्थल पर मुस्लिम पक्षकार के साथ- साथ था तो फिर आपका विवादित जमीनी पर एक्सक्लुसिव राइट कैसे हो सकता।

इसके जवाब में रामलाल के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि जन्मस्थान अपने आप में देवता है। निर्मोही अखाड़ा ज़मीन पर मालिकाना हक नहीं मांग सकता है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपका दुनिया देखने का नजरिया सिर्फ आपका नजरिया है लेकिन आपके देखने का तरीका सिर्फ एक मात्र नजरिया नहीं हो सकता है,एक नजरिया है कि स्थान खुद में ईश्वर है और दूसरा नजरिया ये है कि वहां पर हमें पूजा करने का हक मिलना चाहिए,हमें दोनों को देखना होगा।

रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि ये हमारा नजरिया है, अगर कोई दूसरा पक्ष उसपर दावा करता है तो हम डील कर लेंगे. लेकिन हमारा मानना है कि स्थान देवता है और देवता का दो पक्षों में सामूहिक कब्जा नहीं दिया जा सकता है। वैद्यनाथन ने कहा अगर हिंदुओं ने पूजा के लिए स्थल बनाया और उसे तोड़ने का आदेश हुआ लेकिन हमें इनकी जानकारी नहीं है। मुसलमानों के द्वारा वहां पर नमाज़ किए जाने का तथ्य 1528 से 1855 तक नहीं है। हाईकोर्ट ने भी इस मामले का जिक्र किया है।

इससे पहले सुनवाई की शुरुआत में रामलला की ओर से वरिष्ठ वकील के परासरन ने कहा पूर्ण न्याय करना सुप्रीम कोर्ट के विशिष्ट क्षेत्राधिकार मे आता है। परासरण ने कहा कि इस मामले को किसी तरह से टालना नहीं चाहिए, अगर किसी वकील ने ये केस हाथ में लिया है तो उसे पूरा करना चाहिए, बीच में कोई दूसरा केस नहीं लेना चाहिए।

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