बाबरी मस्जिद विवाद: मस्जिद के गर्भगृह की पूजा का कोई सबूत नहीं-धवन
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अयोध्या मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में 27 वें दिन की सुनवाई हुई। राजीव धवन आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में गवाहों द्वारा दी गयी गवाही को लेकर दलील दी रहे थे। धवन की दलीलों के दौरान उन्हें रोकते हुए 5 जजों की बेंच के सदस्य जस्टिस अशोक भूषण ने उनका ध्यान राममूरत तिवारी नाम के गवाह के बयान की तरफ दिलाया। तिवारी ने हाई कोर्ट में बयान दिया था कि 1935 में वह 13 साल की उम्र में पहली बार विवादित इमारत में गए थे। वहां उन्होंने इमारत के भीतर एक मूर्ति और भगवान की तस्वीर देखी थी।धवन ने तिवारी की गवाही को अविश्वसनीय बताते हुए कहा कि उस पर चर्चा नहीं होनी चाहिए। उनका कहना था कि गवाह के पूरे बयान को देखें तो ऐसा लगता है उसे बातें ठीक से याद नहीं थी। इसलिए हिंदू पक्ष ने भी उसकी गवाही का हवाला नहीं दिया।
जस्टिस भूषण ने कहा, "चर्चा हर बात पर हो सकती है। किसी तथ्य को कैसे देखना है, यह कोर्ट का काम है। किसी पक्ष ने किसी गवाही का जिक्र नहीं किया, इसका यह मतलब नहीं कि कोर्ट भी उस पर सवाल नहीं कर सकता है। " इस पर धवन ने कहा, "आपका लहजा आक्रामक है। मुझे यह डराने वाला लग रहा है।" धवन के इस रवैये का रामलला विराजमान पक्ष के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कड़ा विरोध किया. उन्होंने कहा, "जज से इस तरह बात नहीं की जा सकती।"
वैद्यनाथन के बाद बेंच के सदस्य जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने भी धवन को टोका। उन्होंने कहा, "कोर्ट का काम सवाल उठाना है। हम सवाल इसलिए करते हैं ताकि मुकदमे को किसी निष्कर्ष तक पहुंचाने में मदद मिले।" इसके बाद धवन ने अपनी गलती महसूस की और तुरंत कोर्ट से माफी मांगी। उन्होंने कहा, "जब सुनवाई लंबी चल रही हो तो कभी-कभी मुंह से ऐसी बात निकल जाती है। कोर्ट कृपया इस पर ध्यान न दे।" बेंच की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने मामले को हल्का करते हुए कहा, "पूर्वोत्तर से आने वाले लोग किसी के लहजे से नहीं डरते।" गौरतलब है कि जस्टिस गोगोई असम के रहने वाले हैं।
राजीव धवन ने कहा कि 1939 में वहां पर मूर्ति नही थी बस एक फोटो थी। मूर्ति और गर्भगृह की पूजा का कोई सबूत नहीं है। मुस्लिम पक्षकारों की दलील है कि विवादित स्थल पर 22 -23 दिसंबर 1949 की मध्य रात्रि में 'छल' से मूर्तियां रखी गयी थीं।
सुनवाई के दौरान राजीव धावन ने कहा कि 1949 के मुकदमे के बाद सभी गवाह सामने आए, लोग रैलिंग तक क्यों जाते थे इस बारे में किसी को नही पता। राजीव धवन ने एक गवाह के बयान का ज़िक्र करते हुए कहा की हिन्दू मुस्लिम दोनों वहां पर पूजा करते थे, मैंने किसी किताब में यह नही पढ़ा कि वह कब से एक साथ पूजा कर रहे थे, दोनों वहां पर औरंगजेब के समय से जाते थे।
धवन ने एक हिंदुपक्ष के गवाह की गवाही के बारे में बताते हुए कहा कि गर्भगृह में 1939 में वहां पर मूर्ति नही थी वह पर बस एक फोटो थी। राजीव धवन ने कहा कि मध्य गुम्बद की कहानी 19वें दशक से शुरू होती है, अगर वहां मन्दिर था तो वह किस तरह का मंदिर था, क्या वह स्वंयम्भू था या फिर क्लासिक मन्दिर था। धवन ने कहा कि 1885 की सभी सुनवाई में राम चबूतरा की बात की गई है और उसे ही भगवान राम का जन्मस्थान बताया गया है न कि मस्जिद को। राजीव धवन ने कहा कि इसका कोई सबूत नहीं है कि लोग रेलिंग के पास जाते थे और गुम्बद की पूजा करते थे, हिन्दू केवल बाहरी हिस्से में चबूतरे पर आकर पूजा करते थे।

धवन ने जिरह के दौरान जोसेफ तेफेन्थेलर का ज़िक्र किया,धवन ने रामचबूतरे की स्तिथि का ज़िक्र करते हुए एक तस्वीर का ज़िक्र करते हुए कहा कि वही पहले जन्मस्थान था, कहते हैं कि दीवार इतनी ऊची नही थी। दरवाज़े से बाएं मुड़ते ही आप चबूतरे के पास पहुंच सकते थे
जस्टिस बोबडे ने कहा कि इसकी उचाई 6 से 8 फीट हो सकता है मनुष्य की औसत ऊंचाई लगभग 5.5 फीट है। लेकिन दीवार इसके ऊपर 2 फीट प्रतीत होती है। राजीव धवन ने कहा कि दीवार कूदने के लिए हमको ओलंपिक के जिमनास्ट होने की ज़रूरत नही है। जस्टिस भूषण ने कहा कि अंदर रवेश करने के किये दीवार कूदने की ज़रूरत नही है वहा दरवाज़ा भी है। जस्टिस DY चन्द्रचूड़ ने कहा कि दरवाज़े को हनुमान द्वार कहते है।
राजीव धवन ने कहा कि 1989 में जब न्यास का मूमेंट शुरू हुआ उस समय वहा पर मिस मनेजमेंज की वजह रिसीवर को बातए गई, लेकिन इस पूरे केस में मिस मनेजमेंज का कोई भी सबूत नही है।
राजीव धवन ने निर्मोही अखाड़ा की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि निर्मोही अखाड़ा ने पहले राम जन्मस्थान पर दावा नही किया,निर्मोही अखाड़ा ने आंदोलन का हिस्सा रहा और 1934 में हमला कराया, अखाड़ा ने 1959 से पहले कभी अंदरूनी भाग पर अधिकार की बात नही। धवन ने कहा कि 1989 न्यास के आने के बाद नेक्स्ट फ़्रेंड्स का सिद्धांत भी आया और कोर्ट को उनसे लोकस पूछना चाहिए, तमाम गवाहों के बयान का हवाला दिया और कहा कि राम चबूतरा ही भगवान राम का जन्म स्थान है।आज दोपहर बाद अयोध्या मामले में सुनवाई नहीं हो सकी, क्योंकि मुख्यन्यायाधीश की तबियत बहुत अच्छी नहीं थी। कल यानी शुक्रवार को अयोध्या मामले की सुनवाई के लिए संविधानपीठ बैठेगी और दोपहर 1 बजे तक सुनवाई होगी। राजीव धवन कल भी अपनी दलील जारी रखेंगे।
आज कोर्ट ने राजीव धवन को श्राप देने वाले प्रोफेसर के खिलाफ मामला बंद कर दिया. धवन ने चेन्नई के रहने वाले 88 साल के प्रो. षणमुगम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की शिकायत की थी. षणमुगम ने धवन को भगवान के काम में अड़चन डालने के लिए चिट्ठी भेज कर श्राप दिया था. आज उनकी तरफ से पेश वकील ने बयान पर खेद जताया. इसके बाद कोर्ट ने मामला बंद कर दिया. कोर्ट ने उम्मीद जताई कि भविष्य में इस तरह की घटना नहीं होगी.

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