बाबरी मस्जिद विवाद : कोर्ट के बाहर बयानबाज़ी बंद होनी चाहये

बाबरी मस्जिद मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस्माइल फारुखी के फैसले को संवैधानिक पीठ के समक्ष भेजा जाए या नहीं इस पर सुप्रीम कोर्ट में बहस हो रही है। आज मुस्लिम पक्ष की तरफ से इस पर बहस पूरी हो गई। मुस्लिम पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में बहस की। राजीव धवन ने राम जन्म भूमि बाबरी मस्जिद विवाद पर विभिन्न संगठनों द्वारा की जा रही बयानबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुनवाई पूरी होने से पहले सब फैसला दे रहे है जबकि मुस्लिम पक्ष की तरफ से कभी कोई बयान नहीं दिया जाता है। मामले को लेकर अदालत के बाहर बयानबाज़ी बंद होनी चाहिए। ये संवेदनशील मामला है। इस मामले में खुद को अनुशासित करने की जरूरत है। वकील राजीव धवन के दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की बेंच का वह फैसला गलत है जिसमें कहा गया था मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का मुख्य तत्व नहीं है। मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने हरियाणा में खुले जमाज पढ़ने को लेकर पैदा हुए विवाद और मुख्यमंत्री के उस बयान का जिक्र किया जिसके मुताबिक मुस्लिमों को खुली जगह में नहीं मस्जिदों में नमाज पढ़ना चाहिए। मुस्लिम पक्ष कि तरफ से यह भी कहा गया कि हिन्दू पक्ष की तरफ से भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (ASI) के सबूत होने की बात कही गई है लेकिन इस पर चर्चा तभी होगी जब यह तय होगा कि इस्माइल फारुखी के फैसले को संवैधानिक पीठ में समीक्षा के लिए भेजा जाए या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 17 मई को होगी। गुरुवार होने वाली सुनवाई में हिन्दू पक्ष के तरफ ये दलीलें दी जाएगी कि केस को संविधान पीठ के पास भेजने की जरूरत नहीं है और 3 जज की बेंच को ही सुनवाई जारी रखनी चाहिए।  

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