बाबरी मस्जिद विवाद: एक बार मस्जिद बन जाए तो तोड़ी नहीं जा सकती

रामजन्म भूमि बाबरी मसजिद विवाद में आज सुप्रीम कोर्ट में 1994 के इस्माइल फारुखी फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग पर बहस हुई जिस फैसले में यह माना गया था कि मस्जिद को इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। वक़्फ़ बोर्ड की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन जिरह की। राजीव धवन ने अपनी दलील पेश करते हुए कहा कि 1994 का संविधान पीठ का फैसला अनुच्छेद 25 के तहत दिए आस्था के अधिकार को कम करता है। राजीव धवन ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस्लाम के तहत मस्जिद का बहुत महत्व है। अगर एक बार मस्जिद बन जाए तो वो अल्लाह की संपत्ति मानी जाती है, उसे तोड़ा नहीं जा सकता है। पैगंबर मोहम्मद ने मदीना से 30 किमी दूर मस्जिद बनाई थी। इस्लाम में इसके मानने वालों के लिए मस्जिद जाना ज़रूरी माना गया है। राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि विवादित जगह को यह केह देना कि इस जगह कोई मस्जिद नहीं थी, उससे कुछ नहीं होता। यह किसने आदेश दिया कि वहां नमाज नहीं पढ़ी जाएगी। धवन ने कोर्ट में कहा भारत में हर तरह के लोग। संगमरमर की इमारत है देश। किसी टुकड़े के सरकने से इमारत को नुकसान। हिंदुओं के लिए अहम कई इमारतें। मुसलमानों के लिए ऐसी कोई जगह नहीं। दावा किया जाता है कि लाखों साल पहले भगवान राम पैदा हुए थे। लेकिन वो उसी जगह पर पैदा हुए थे, इसका क्या प्रमाण है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो इस्माइल फारुखी केस को संविधान पीठ को भेजेंगे, अगर हम दलीलों से सहमत नहीं हुए को फिर नहीं भेजेंगे। इस मामले में अब 6 अप्रैल को सुनवाई होगी।  

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