बाबरी मस्जिद विवाद: दोनों ही पक्ष अपने अपने अनुमान और निष्कर्ष पर दलीलें दे रहे हैं - जस्टिस बोबडे

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अयोध्या मामले में आज सुनवाई के 33वें दिन के सुनवाई हुई। आज एक बजे जब संविधानपीठ आज की सुनवाई पूरा करने के बाद उठने लगी तो चीफ जस्टिस ने शेखर नाफड़े से पूछा कि आपको जिरह पूरी करने में और कितना समय लगेगा? नाफड़े ने जवाब में कहा कि उनको जिरह पूरी करने के लिए दो घंटे का समय और लगेगा।  इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हम शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं करने जा रहे हैं। तब नाफड़े ने कहा कि 45 मिनट भी समय और मिल जाएगा तो हम अपनी बहस पूरी कर लेंगे। लेकिन चीफ जस्टिस इस मांग को अनसुना करते हुए कहा कि 'सुनवाई तय शेड्यूल के हिसाब से नहीं चल रही है।' और बेंच उठ गई। सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने साढ़े ग्यारह बजे अपनी दलील खत्म की उसके बाद वरिष्ठ वकील शेखर नाफड़े एक मुस्लिम पक्षकार फ़ारुख अहमद की तरफ से दलील रखना शुरू किया। दरअसल तय शेड्यूल के मुतबिक आज एक बजे तक शेखर नाफड़े को अपनी दलील पूरी कर लेनी थी। लेकिन मीनाक्षी अरोड़ा ने आज उनके हिस्से का भी समय ले लिया और नाफड़े को अपनी दलील के लिए मात्र डेढ़ घण्टे का ही समय मिल पाया। शिड्यूल के मुताबिक मीनाक्षी अरोड़ा को अपनी दलील कल ही खत्म करनी थी और शेखर नाफड़े को आज अपनी दलील पूरी करनी थी।

आज सुनवाई की शुरआत में मीनाक्षी अरोड़ा ने पुरातत्व विभाग कि रिपोर्ट पर निष्कर्ष पर सवाल उठाते हुए कहा कि रिपोर्ट कि समरी में नम्बरिंग के बारे में कुछ साफ नहीं, जबकि फीमेल डेटी के बारे में कुछ भी पेश नहीं किया गया। पुरातत्व विभाग कि रिपोर्ट में  विरोधाभास के बारे में बताते  हुए मीनाक्षी ने कहा कि यह स्पष्ट करता है कि यह सटीक नहीं है।

जाने आज अपनी जिरह के आखरी दिन मीनाक्षी अरोड़ा ने क्या कहा

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि ढिबरी और 15 पिलर के आधार पर ASI ने निष्कर्ष निकाला की वहां पर मंदिर था, जिसमें विरोधाभास दिखता है।

जस्टिस बोबड़े ने कहा कि आप साक्ष्य अधिनियम के सेक्शन 45 पर अपनी दलीलें पेश करें। अरोड़ा ने कहा कि ASI कि रिपोर्ट महज राय होती है। क्यों विशेषग्यों को ही इसके तहत रखा जाता है? आमतौर पर राय को साक्ष्य अधिनियम के तहत नहीं रखा जाता जब तक सटीक तथ्य नहीं हो।

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि ऐसे में हमारी तरफ से पेश हुए विशेषग्यों के इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वीकार किया। चूंकि विषय पर विशेषग्यों कि समझ न्यायिक अधिकारी या जजों से कहीं ज्यादा होती है जो सटीक तथ्यों के साथ स्वीकार कि जाती है।

सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि पुरातत्व विभाग ने अपनी राय दी जो हाइपोथैटिकल है और जिसमें अंदाजा, अनुमान लगाया गया है कि यहां पर एक मंदिर था। पुरातत्व एक सामाजिक विग़्यान है जबकि केमेस्ट्री, फिजिक्स सटीक विग्यान हैं।

जस्टिस DY चन्द्रचूड़ ने कहा कि आपका कहना है कि एक्सपर्ट की राय को नही माना जा सकता, वह बदल सकती है।

अरोड़ा ने कहा कि ASI ने कहा कि हरेक पुरातत्व अधिकारी अपनी सोच के हिसाब से तस्वीर तैयार करता है। उसी के आधार पर वह मंदिर गिराने और मस्जिद निर्माण पर पहुंचे, जबकि पुरातत्व विज्ञानी बिल्कुल हैडराइटिंग विज्ञानी कि तर्ज पर अंदाजे पर काम करते हैं।

एक पुरातत्व वैज्ञानिक कि राय दूसरे से आमतौर पर नहीं मिलती, गौर करने वाली बात है कि फिंगरप्रिंट कि जांच बिल्कुल सटीक होती है, क्योंकि मिलान का  प्रतिशत कहीं ज्यादा होने पर सही माना जाता है

जस्टिस बोबडे ने कहा कि क्या अपने पास कोई ऐसा पुरात्तव वैज्ञानि जो ASI की रिपोर्ट का नकार सके जैसे आप नकार रही है। मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि हिन्दू पक्ष कि ओर से पेश हुए गवाहों कि राय भी पुरातत्व विभाग से अलग थी। मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि हिन्दू पक्षकार के गवाह जयंती प्रसाद श्रीवास्तव, रिटायर्ड पुरातत्व अधिकारी ने विभाग कि रिपोर्ट से अलग थी।

जस्टिस बोबड़े ने कहा कि दोनों ही पक्षों के पास कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। दोनों ही पक्ष अपने अपने अनुमान और निष्कर्ष पर दलीलें दे रहे हैं। कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है। हमें इस बात का अहसास है। कोर्ट को यह देखना है कि किसके निष्कर्ष अधिक विश्वसनीय हैं।

अरोड़ा ने कहा कि ASI की रिपोर्ट में यह कहीं नहीं कहा गया कि अमुक स्थान राम मंदिर है।

जस्टिस नज़ीर ने कमिश्नर की रिपोर्ट (ASI) पर मीनाक्षी अरोड़ा की आपत्ति पर कहा कि आप किसी सामान्य व्यक्ति की राय से तुलना नहीं कर सकती। कमिश्नर ने अयोध्या में खुदाई का काम कोर्ट से मिले अधिकार से कराया था। आप उस रिपोर्ट की प्रामाणिकता पर सवाल नहीं उठा सकतीं।

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि अदालत पर यह बाध्यता नहीं है कि वह पुरातत्व विभाग कि रिपोर्ट को स्वीकार करे। मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि इलाहाबाद HC के एक्सपर्ट राय देते हुए कहा कि वह पर मंदिर गिराई गई थी जबकि ASI की रिपोर्ट में किसी मंदिर के गिराने की बात नही कही गई है। इसके साथ ही ASI की रिपोर्ट पर सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की वकील मीनाक्षी अरोड़ा की दलील खत्म हुई। जिसके बाद मुस्लिम पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील शेखर नाफड़े 'रेस ज्युडिकाटा' पर दलील दे रहे हैं। नाफड़े मुस्लिम पक्षकार फ़ारुख अहमद के वकील हैं।

जाने क्या है रेस ज्युडिकेटा..?

सीपीसी ( Code of Civil Procedure ) के सेक्शन 11 में रेस ज्युडिकेटा का सिद्धांत दिया गया है। इसके मुताबिक 'दो पक्षकारों के बीच किसी विवाद का निपटारा हो जाने के बाद उन्हीं पक्षकारों के बीच उसी मामले में उसी विवाद के लिए दोबारा सूट दाखिल नहीं किया जा सकता।'  कानून के किताब में इस प्रावधान को एक ही वाद में बार बार सूट दाखिल करने से रोकने के लिए किया गया है।निर्मोही अखाड़ा के महंत रघुवर दास ने 1885 में फैजाबाद कोर्ट में मंदिर निर्माण के लिए सूट दाखिल किया था। राम चबूतरे को जन्म स्थान करार देते हुए मंदिर निर्माण कि मांग की गई। निर्मोही अखाड़े के इस मांग को फैजाबाद कोर्ट ने खारिज कर दिया था। 1961 में निर्मोही अखाड़ा ने दोबारा सूट दाखिल किया। मुस्लिम पक्ष ने CPC के सेक्शन 11 में दिए हुए न्याय के इसी सिद्धांत 'रेस ज्युडिकेटा' के आधार पर उस सूट का विरोध किया है। जबकि निर्मोही अखाड़ा की दलील है कि यह सिद्धांत उनपर लागू नहीं होता क्योंकि 1985 में फैजाबाद कोर्ट में जो वाद दाखिल हुआ था उसे महंत रघुवर दास ने व्यक्तिगत हैसियत से दायर किया था जबकि 1961 में जो वाद दाखिल हुआ वह निर्मोही अखाड़ा के तरफ से हुआ था।

जाने सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील शेखर नाफड़े ने अपनी जिरह के दौरान क्या कहा

मुस्लिम पक्ष के वकील शेखर नाफड़े ने कहा कि फारुख अहमद कि ओर से दायर 1961 में निचली अदालत का  आदेश रेस ज्युडिकेटा है यानी न्यायिक समीक्षा का अंतिम आदेश,  रघुबर दास ने मंदिर निर्माण के लिए सूट दाखिल किया था। जिनकी ओर से चबूतरे को जन्म स्थान करार देते हुए मंदिर निर्माण कि मांग कि गई। उसका ब्यौरा भी उन्होंने दिया, इसका मकसद फकीरों और साधुओं कि राहत से जुड़ा था।

शेखर नाफड़े ने कहा कि डिप्टी कमिश्नर ने 1885 में  रघुबर दास के सूट पर अपना फैसला दिया था और कहा था कि चबूतरे पर मंदिर बनाने का दावा खारिज कर दिया था, ऐसे में यह रेस ज्यूडी काटा है। रेस ज्युडिकेटा (Section 11 of CPC) का मतलब है दो पक्षकारों के बीच किसी विवाद का निपटारा हो जाने के बाद उन्हीं पक्षकारों के बीच उसी मामले में उसी विवाद के लिए दोबारा सूट दाखिल नहीं की जा सकती है।

जस्टिस बोबडे ने कहा कि एक बाद तो साफ है कि वह पर कब्ज़े को लेकर विवाद था क्या विवाद सिर्फ राम चबूतरे का था या पूरे जन्मस्थान का ?

नाफड़े ने कहा कि हिन्दू वहां पर थोड़ी से ज़मीन पर अधिकार था, उनका सिर्फ राम चबूतरे पर अधिकार था, वे स्वामित्व हासिल करने की कोशिश कर रहे थे जिसे अस्वीकार कर दिया गया था।उन्होंने अतिक्रमण करने के लिए लगातार प्रयास किया।

जस्टिस अग्रवाल ने हमारा तर्क स्वीकार कर लिया था कि इसमें कोई अंतर नहीं है चाहे वह किसी भाग के लिए हो या पूरे क्षेत्र के लिए है?

नाफड़े ने कहा की वहां पर हिंदुओं का सीमित अधिकार था उर वो उसको बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे। नाफड़े ने कहा कि न्यायिक कमिश्नर ने हिंदुओं के सीमित अधिकार को स्वीकार किया था उनके स्वामित्व स्वीकार नहीं किया था।

नफाड़े ने कहा कि जस्टिस अग्रवाल (हाईकोर्ट) ने इस दलील को स्वीकार किया था कि चबूतरे और पूरे विवादित स्थल में  कोई फर्क नहीं है। हालांकि हिंदुओं कि पहुंच सीमित क्षेत्र तक थी। उनका नियंत्रण सिर्फ़ चबूतरे तक था।

नफाड़े ने कहा कि महंत रघुवर दास की ओर से दाखिल किया गया 1885 वाला सूट उनका व्यक्तिगत कदम था वह किसी का प्रतिनिधित्व नहीं करता था। नाफड़े ने कहा कि यह साफ है कि 1885 में जो सूट दाखिल किया था वह चबूतरे पर पूजा के अधिकार के दाखिल गया था।

नाफड़े ने कहा कि  दुर्भाग्य से इस देश में खत्म नहीं धार्मिक संघर्ष होता है।150 सालों से जैन समुदाय के बीच टकराव जारी है। वह अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे है।

जस्टिस चंद्रचूण ने कहा कि 1885 का जो सूट है वो निर्मोही अखाड़ा की तरफ से नहीं है उसे एक महंत ने दाखिल किया था यह कहना कि हिंदू पक्ष दोबारा कैसे फाइल नहीं कर सकते यह  ठीक नहीं लगता है।

1885 में निर्मोही अखाड़ा ने फैज़ाबाद में सूट दाखिल किया जिसको खारिज कर दिया गया था। उसके बाद 1961 में फिर सूट दाखिल किया, इसलिए मामला रेस ज्युडिकेटाका है।

CJI ने मुस्लिम पक्ष के वकील शेखर नाफड़े से पूछा कि उनको जिरह पूरी करने में कितना समय लगेगा? नाफड़े ने कहा 2 घंटे का समय और लगेगा। CJI रंजन गोगोई ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सुनवाई तय शेड्यूल के हिसाब से नहीं चल रही है। शेड्यूल से कोई समझौता नहीं। नाफड़े ने कहा कि वह 45 मिनट अपनी जिरह पूरी कर लेंगे। CJI की बेंच बिना कुछ कहे उठ गई। अयोध्या मामले में आज की सुनवाई पूरी हुई। सोमवार को मामले की सुनवाई जारी रहेगी।

शेखर नाफड़े 'रेस ज्युडिकेटा' को लेकर दलील दे रहे थे।मतलब शेखर नाफड़े को अपनी दलील पूरी करने के लिए और वक़्त मिलेगा या नहीं अभी निश्चित नहीं है।  सोमवार को जब बेंच बैठेगी तभी साफ हो पायेगा कि उनको बहस के लिए वक्त मिल रहा है या नहीं।

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