बाबरी मस्जिद विवाद: देश में अगर राम और अल्लाह का सम्मान नहीं होगा, देश खत्म हो जाएगा- सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड

अयोध्या मामले में सोमवार को 29वें दिन की सुनवाई हुई। आज सुप्रीम कोर्ट 1 घंटे ज़्यादा यानी 5 बजे तक मामले की सुनवाई करी। अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन ने सोोमवार को दलील देते हुए कहा कि हम राम का सम्मान करते हैं, जन्मस्थान का भी सम्मान करते हैं. इस देश में अगर राम और अल्लाह का सम्मान नहीं होगा, देश खत्म हो जाएगा। धवन ने कहा कि विवाद तो राम के जन्मस्थान को लेकर है कि वह कहां है! राजीव धवन ने आज की अपनी जिरह के आखिर में फ़िराक़ गोरखपुरी के शेर को पढ़ा और कहा कि भारत विविधता का देश रहा है, लेकिन कुछ लोग इसे एक रंग में रंग देना चाहते है। राजीव धावन ने फ़िराक़ गोरखपुरी का यह शेर पढ़ा सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के 'फ़िराक़' क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया राजीव धवन ने कहा कि मैं ये मान लेता हूं कि राम ने वहां जन्म लिया लेकिन क्या इतना भर होने से श्रीराम जन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा (जीवित व्यक्ति मानकर उनकी ओर से मुकदमा दायर) दिया जा सकता है। 1989 से पहले किसी ने श्री रामजन्म स्थान को न्यायिक व्यक्ति नहीं माना। राजीव धवन ने अपनी दलीलों के जरिये श्री रामजन्म स्थान को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा देने पर सवाल उठाते हुए कई उदाहरण दिये। धवन ने कहा कि गुरु ग्रंथ साहब जी को जब तक गुरुद्वारा में प्रतिष्ठित नहीं किया जाता, तब तक उन्हें भी 'न्यायिक व्यक्ति' नहीं माना जा सकता। इसी तरह हर मूर्ति को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा नहीं दिया जा सकता। राजीव धवन ने कहा कि राम का सम्मान होना चाहिए, इसमे कोई संदेह नहीं है।लेकिन भारत जैसे महान देश में अल्लाह का भी सम्मान है। अगर दोनों का सम्मान कायम नहीं रहता है, तो विविधिता को समेटे ये देश खत्म हो जाएगा। धवन ने कहा कि ये साफ है कि राम चबूतरे पर प्रार्थना होती थी, लेकिन पूरे इलाके में कभी पूजा नहीं की गई। राजीव धवन ने हिंदू पक्ष के द्वारा परिक्रमा के संबंध में गवाहों द्वारा दी गई गवाहियों का हवाला दिया। धवन ने कहा कि परिक्रमा के बारे में सभी गवाहों ने अलग अलग बात कही है। उनकी गवाही में विरोधाभास है। मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि हमने 18 दिसंबर 1961 को केस दायर किया। हिंदू पक्ष के मुताबिक लिमिटेशन के लिहाज से हम दो दिन देरी से थे। लेकिन हमारे केस में लिमिटेशन की समयसीमा 16 दिसंबर से भला क्यों शुरू होगी। यह समय सीमा तो 22-23 दिसंबर से शुरू होनी चाहिए, क्योंकि उसी रात वहां मूर्तियां रखी गई थी। मुझे ये साबित करने की ज़रूरत नहीं कि 17, 18, 19 दिसंबर तक हमारा वहां कब्ज़ा रहा क्योंकि 22 दिसंबर से पहले वहां पर कोई गतिविधि नहीं थी। राजीव धवन ने कहा कि क्या बादशाह (बाबर) ने कुरान/ धर्म का उल्लंघन किया। इसको संविधान की कसौटी पर ही परखा जाएगा। सुनवाई के दौरान जस्टिस डी वाई चन्द्रचूड़ ने अहम टिप्पणी की।। जस्टिस चन्द्रचूड़ ने सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की ओर से पेश राजीव धवन से कहा - 'उनके लिए अयोध्या को लेकर हिंदुओं की आस्था पर सवाल मुश्किल होगा। यहाँ तक कि एक मुस्लिम गवाह ने कहा है कि अयोध्या का हिंदुओं के लिए वही स्थान है, जो मुसलमानों के लिए मक्का। कल भी राजीव धवन बहस जारी रखेंगे. इस हफ्ते अयोध्या मामले में मंगल, बुध, और गुरुवार को साढ़े दस बजे से 5 बजे तक सुनवाई होगी। शुक्रवार को दोपहर 1 बजे तक सुनवाई होगी। जाने सुनवाई के दौरान किसने क्या कहा धवन ने कहा कि गुरुग्रंथ साहिब केस का ज़िक्र करते हुए कहा गया था कि गुरुग्रंथ खुद में भगवान है, इसपर कोर्ट ने कहा था कि एक ही बुलडिंग के दो न्यायिक व्यक्ति नही हो सकते एक गुरुद्वारा और दूसरा गुरुग्रंथ है. कोर्ट ने कहा था अगर गुरुग्रंथ अपने आप मे न्यायिक व्यक्ति हो गया तो गुरुग्रंथ साहिब की हर कॉपी न्यायिक व्यक्ति हो जाएगी. जस्टिस भूषण ने पूछा कि मूर्ति के बिना भी कोई मन्दिर हो सकता है? धवन ने एक केस का ज़िक्र करते हुए कहा कि सेवादार क्लेम कर रहे है और कह रहे हैं कि पहले मन्दिर नही था. अगर मन्दिर नही था तो आप कैसे सेवादार हुए. धवन ने कहा कि औरंगजेब ने कई मंदिर बनवाए, शाहजहां के बाद वह बैंक करप्ट हो गए थे, उसने दो लड़ाइयां भी लड़ी थी, इस लिए उन्होंने जजिया लागू किया, धवन ने कहा कि मंदिर उस स्थान को कहते है जहां लोग भगवान की पूजा करते है. राजीव धवन ने कहा कि धर्मशास्त्र में अपने से कुछ नहीं जोड़ा जा सकता, इस बारे में बहुत कुछ चर्चाऐं चलती रहती हैं. जैसे कि पीएम मोदी कहते हैं कि हम देश बदल रहे हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं समझा जाना चाहिए कि संविधान बदला जा रहा है. धवन ने हिन्दू पक्ष के गवाहो की गवाही को पढ़ते हुए बताया कि दो तरह की परिक्रमा होती है पंच कोसी, चौदा कोसी परिक्रमा, पूरे अयोध्या की परिक्रमा होती थी और राम चबूतरा की भी परिक्रमा होती थी. धवन ने कहा कि परिक्रमा के बारे में सभी गवाहों ने अलग अलग बात कही है कुछ ने कहा राम चबूतरे परिक्रमा होती थी, कुछ ने कहा कि दक्षिण में परिक्रमा होती थी. राजीव धवन की दलील – पूरी विवादित जमीन जन्मस्थान नहीं हो सकती, जैसा कि हिंदू पक्ष दावा करते हैं. कुछ तो निश्चित स्थान होगा. पूरा क्षेत्र जन्मस्थान नहीं हो सकता. न्यायमूर्ति बोबडे – क्या हमें न्यायिक इकाई के साथ देवत्व के पहलू को देखने की जरूरत है न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ – इसे एक न्यायिक इकाई बनाने का उद्देश्य क्या है? राजीव धवन ने के परासरन तर्क का संदर्भ देते हुए कहा कि ‘के परासरन ने अपनी दलीलों में आध्यात्मिकता और दिव्यता के बारे में उल्लेख किया है. इसलिए देवत्व की एक अहम भूमिका है. TN सरस्वती के बारे में उल्लेख किया गया था जो एक न्यायिक व्यक्ति से संबंधित है. राजीव धवन ने कहा कि कानून इस मामले में बिल्कुल स्पष्ट है और ऐसे में गलत तरीके से कब्जा करने वालों का यह स्थान नहीं है. राजीव धवन- न्यायिक व्यक्ति के बारे में स्पष्ट करते हुए कोर्ट को बताते हैं कि किस समय कोई विश्वास एक वस्तुगत रूप बन जाता है और किस समय एक वस्तुगत रूप न्यायिक व्यक्तित्व बन जाता है. जस्टिस भूषण- कहते हैं कि जनमस्थान महाकाव्यों और कई चीजों पर आधारित है, लेकिन मूर्ति की अवधारणा अलग है. जस्टिस भूषण – स्वयंभु की अवधारणा जन्मस्थान से अलग है. राजीव धवन- वादी 5 का इरादा सेवादार को नष्ट करके एक नया मंदिर बनाना और उस पर कब्जा करना था. भूषण ने पूछा कि मूर्ति के बिना भी कोई मन्दिर हो सकता है धवन ने एक केस का ज़िक्र करते हुए कहा कि शेबेट क्लेम कर रहे है और कह रहे हैं कि पहले मन्दिर नही था अगर मन्दिर नही था तो आप कैसे शेबेट हुए धवन ने कहा कि औरंगज़ेब ने कई मंदिर बनवाए, शाहजहां के बाद वह बैंक करप्ट हो गए थे, उसने दो लड़ाइयां भी लड़ी थी, इस लिए उन्होंने जज़िया लागू किया, धवन ने कहा कि मंदिर उस स्थान को कहते है जहां लोग भगवान की पूजा करते है, जस्टिस बोबड़े: मूर्ति के बिना देवता हो सकता है। चिदम्बरम नटराज मन्दिर का ज़िक्र किया। वहां कोई मूर्ति नहीं है फिर भी उसे देवता माना जाता है। एक खाली जगह की पूजा कैसे की जाती है? धवन: वहां कुछ हो सकता है, किसी प्रकार का स्ट्रक्चर। जो कि उसे न्यायिक व्यक्ति बनाता है। ये मेरी समझ से परे है। चिदम्बरम कोई exception केस हो सकता है। जस्टिस बोबड़े: चिदम्बरम एक specific केस था। गूगल के मुताबिक मन्दिर को 10वीं शताब्दी में चोलाओं ने बनवाया था। वरिष्ठ वकील पी नरसिम्हा ने चिदम्बरम मन्दिर का मतलब समझाते हुए कहा, भगवान शिव के 5 मन्दिरों को 5 तत्वों के आधार पर बनाया गया है- पृथ्वी, पानी, आकाश, अग्नि और हवा। चिदम्बरम आकाश के बारे में था। जस्टिस बोबड़े: चित मतलब चेतना और अम्बर का मतलब आकाश, हमारे ऊपर एक एक सर्वोच्च चेतना है। धवन: वे कहते हैं कि भगवान राम का जन्म यहीं हुआ। लेकिन किसी भी प्रकार के क्षेत्र का उल्लेख नहीं कहीं भी नहीं है। इस सूट का उद्देश्य केवल नष्ट करना और हटाना है। धवन: अगर हम इस बात और यकीन कर लें कि भगवान राम वहां पैदा हुए थे तो क्या ये उस जगह को न्यायिक व्यक्तित्व बना सकता है। 1989 तक किसी ने उस स्थान के न्यायिक व्यक्तित्व होने का दावा नहीं किया था। धवन: इस बारे में कोई संदेह नहीं है कि भगवान राम की इज़्ज़त की जानी चाहिए। अगर भगवान राम और अल्लाह की इज़्ज़त नहीं कि जाएगी तो ये महान राष्ट्र पतन के कगार पर आ जाएगा, क्योंकि यहां जैसी भिन्नता दूसरे किसी राष्ट्र में नहीं है। धवन: जहां तक शिबैत की बात है, वह सिर्फ बाहरी हिस्से के हकदार हैं। राम चबूतरे पर प्रार्थना होती थी लेकिन पूरे हिस्से में नहीं। धवन: क्या सिर्फ परिक्रमा खुद अपने आधार पर किसी पूरी जगह की हकदार हो सकती है। धवन ने हिन्दू पक्ष के गवाहो की गवाही को पढ़ते हुए बताया कि दो तरह की परिक्रमा होती है पंच कोसी, चौदा कोसी परिक्रमा, पूरे अयोध्या की परिक्रमा होती थी और राम चबूतरा की भी परिक्रमा होती थी। परिक्रमा के बारे में सभी गवाहों ने अलग अलग बात कही है कुछ ने कहा राम चबूतरे परिक्रमा होती थी, कुछ ने कहा कि दक्षिण में परिक्रमा होती थी लेकिन मुख्य तौर पर यह किस जगह पर थी इसे लेकर कोई दावा नहीं किया गया।

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