बाबरी मस्जिद विवाद : 31 वां दिन: सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने ASI की रिपोर्ट पर आपत्ति जताई

अयोध्या बाबरी मस्जिद विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के सामने आज 31वें दिन की सुनवाई हुई। सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि ASI की रिपोर्ट महज एक राय है, जो साक्ष्य अधिनियम की धारा-45 के तहत है। से बहुत मजबूत साक्ष्य नहीं माना जा सकता। ASI रिपोर्ट के हर पैनलिस्ट को अपनी रिपोर्ट लिखनी थी तो चैप्टर 10 पर दस्तख़त क्यों नहीं है, जबकि सभी चैप्टर पर दस्तख़त होना चाहिए था।

आज सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जाफरयाब जिलानी ने बहस की शुरुआत की। जाफरयाब जिलानी ने कहा वो राम चबूतरे को भगवान राम का जन्मस्थान नही मानते। हमनें ये स्वीकार नही किया है। कल तो हम बस 1885 के कोर्ट का आदेश बता रहे है। सुन्नी वक्फ बोर्ड का स्टैंड भी वही है जो मुस्लिम पक्ष की तरफ से राजीव धवन ने रखा है। राजीव धवन ने कहा था कि वो मानते है कि अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ था लेकिन कहाँ वो नही बता सकते।

जाने ज़फरयाब जीलानी ने अपनी जिरह के आखरी दिन क्या कहा

इस पर जस्टिस बोबड़े ने कहा कि इसका मतलब 1886 का डिस्ट्रिक्ट जज का फैसला आज भी बरकरार है? क्योंकि इसे किसी ने चुनौती नहीं दी।

जिलानी: हां.

1886 के फैसले के मुताबिक राम चबूतरा है भगवान राम का जन्म स्थान है।

जिलानी की आंखों में मोतियाबिंद होने की वजह से देखने मे दिक्कत है।लिहाज़ा कई दस्तावेज इनकी जूनियर आकृति ने पढ़ा।

ज़फरयाब जिलानी ने कहा कि 1858 से दस्तावेज है जिसमें स्पष्ट है कि इनर कोर्टयार्ड यानी मस्जिद के भीतर के भाग पर हिन्दुओं ने कोई दावा नहीं किया, गजेटियर रिपोर्ट लोगों के विश्वास का समर्थन नहीं करती, जिसके तहत हिन्दू मानते है कि विवादित स्थल पर मंदिर था।

1858 से पहले का कोई भी दस्तवेज़ भरोसेमंद नही है कुछ यात्रियों की कही बातों पर कोर्ट कैसे विश्वास कर सकता है जब कोई आधिकारिक दस्तवेज़ नही उपलब्ध है,कार्नेगी ने अयोध्या पर दस्तवेज़ को नकार दिया था, जिंसमे कहा गया था कि लोग मस्जिद के गर्भ गृह में पूजा करते थे।

ज़फरयाब जिलानी ने कहा कि दस्तावेजों से साफ है कि हिन्दुओं के विश्वास से जुड़ा मसला 1528 से सिविल सूट दाखिल किए जाने तक नहीं था, मस्जिद से बीच वाले डोम में  जन्मस्थान का जिक्र किसी दस्तावेज नहीं है और यहां पहले पूजा भी नहीं कि जाती थी।

जिलानी ने कहा कि 1950 से 1989 के दौर से पहले जन्मस्थान को लेकर यह विवाद नहीं था कि वह मस्जिद के भीतर है।

जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि ऐसा कोई साक्ष्य है कि 1528 के बाद का है कि हिन्दुओं ने पूजा कि मांग कि हो और मुस्लिम पक्ष ने ठुकरा दी हो। जस्टिस बोबड़े ने कहा कि मस्जिद बनने के बाद तो हिन्दुओं को प्रवेश नहीं करने दिया गया होगा, क्या सिविल सूट में कोई साक्ष्य है जबकि हिन्दुओं ने पूजा कि मांग कि हो, जिलानी ने कहा कि 1865 में पहली बार मांग कि गई थी जो इतिहास कि किताबों में है।

हवेनत्सांग की यात्रा का वृतांत बताते हुए विक्रमादित्य के बनाए मन्दिर और बौद्ध मठों स्मारकों का अयोध्या में होने का ज़िक्र किया। मंदिरों के इस शहर में सारे मन्दिर हिंदुओ के नहीं थे।

ज़फरयाब जिलानी ने कहा कि पहली बार सिख धर्म के अनुयाइयों ने 1858 में मस्जिद में पताका फहरायी थी।  लेकिन वह राम कि पूजा नहीं करते है। बाबरी मस्जिद  इमारत में जबरन घुसे और पाठ किया था। मना करने पर वो नहीं हटे तो दरोगा और पुलिस ने उनको जबरन बाहर किया। पहली बार कोई गैरमुस्लिम उस इमारत में उपासना के लिए दाखिल हुआ था।

जस्टिस बोबड़े ने कहा कि बड़े पैमाने पर सिख भगवान राम कि पूजा करते हैं। ज़फरयाब जीलानी ने अपनी जिरह पूरी करी।

ज़फरयाब जीलानी की जिरह खत्म होने के बाद सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने ASI की रिपोर्ट पर जिरह करते हुए सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड का पक्ष रखा।

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि करीब 500 साल के बाद जो साक्ष्य दावों के संबंध में जुटाए गए हैं, वो अहम हैं। विभाग की रिपोर्ट में खुदाई में कई अहम पहलू सामने आए। – क्या मंदिर के ऊपर मस्जिद बनाई गई? – क्या विवादित बाबरी मस्जिद जन्मस्थान पर बनाई गई? जवाब में पुरातत्व विभाग ने कहा कि इन दोनों दावों पर विभाग की रिपोर्ट में कई अहम साक्ष्य सामने आए। पुरातत्व विभाग ने कहा कि राम चबूतरा से संकेत मिलता है कि यहां रामचंद्र का जन्म हुआ था, जो मस्जिद से बाहर थोड़ी दूर पर है। जज ने इसी पर हिंदुओं को अधिकार दिया. यह तब हुआ जब 1886 में राम चबूतरा पर हिंदुओं ने दावा किया। पुरातत्व विभाग ने कहा कि हम सिर्फ खोजे गए साक्ष्यों को स्पष्ट करेंगे। यही इस मामले में हमारी भूमिका है। मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि पुरातत्व विभाग ने विभिन्न पहलुओं पर साक्ष्य जुटाएं हैं। 1528 में जो हुआ उसके बाद से लगातार तमाम अनसुलझे तथ्यों को पुरातत्व विभाग ने सुलझाया। पुरातत्व विभाग ने यह स्पष्ट किया कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया। इस विवाद की शुरुआत महंत रघुबर दास के सिविल सूट से हुई। इसके बाद उन्होंने अपील की, लेकिन 1855 के दावे पर जब उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए राम चबूतरा पर दावा किया। जिला जज फैजाबाद ने 1886 में इस दावे को खारिज किया, लेकिन फैसले में यथास्थिति का आदेश इसके मद्देनजर कर दिया कि 356 साल पहले मस्जिद निर्माण किया गया था।

जाने मीनाक्षी अरोरा ने अपनी दलील में क्या कहा

सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा- ASI रिपोर्ट को पूरी तरह से सटीक नहीं माना जा सकता। यह निष्कर्षों, तथ्यों, ओपिनियन पर आधारित है।यह सत्यापित निष्कर्ष पर नहीं पहुंचता।

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि हमको यह जानना होगा कि पुरातत्व क्या होता है? यह सोशल साइंस के नेचर पर निर्भर करता है। कुछ मॉडर्न तकनीकी जैसे कार्बन कोटिंग का इस्तेमाल किया जाता है। यह सोशल साइंस से ज़्यादा नेचुरल साइंस है।

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जस्टिस का फैसला पुरातत्व की रिपोर्ट के आधार पर है जिसके मद्देनजर मैं रिपोर्ट की हकीकत बयान कर रही हूं कि मुस्लिम पक्ष की आपत्तियों नजरअंदाज किया गया।ऐसे में हम कैसे पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट पर भरोसा कर सकते हैं। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि पुरातत्व विभाग के अधिकारियों की रिपोर्ट कोर्ट कमिश्नर के तौर पर प्रक्रिया के अनुरूप थी।आपकी कोई आपत्तियां जायज नहीं हैं, क्योंकि पहली अपील में आपने आपत्ति नहीं जताई।

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि पुरातत्व रिपोर्ट में कहा गया है कि खंभे अलग-अलग समय के हैं। कोई 6AD और कोई 7AD का है. कोई बड़ा-छोटा और अलग-अलग दूरी पर स्थित हैं। ऐसे में खुदाई के बाद जिन खंभों की बात की जा रही है, वो मंदिर के थे। यह स्पष्ट नहीं है.चीफ जस्टिस ने कहा कि आप जो भी दलीलें दे रहीं हैं, वो आपके दावे से संबंधित हैं. क्या इनका औचित्य है? अरोड़ा ने कहा कि मेरा तात्पर्य ये है कि रिपोर्ट सही नहीं है।

जस्टिस बोबड़े ने कहा कि आप क्यों पुरातत्व विषेशज्ञों की राय को नकार रहीं हैं, जबकि उन्होंने अदालत के आदेश पर प्रक्रिया के अनुरूप काम किया।

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि देश में हर जगह जहां विध्वंस है, उसके नीचे कुछ ना कुछ मिलेगा। बोबड़े- हम सिर्फ इस बात को जानना चाहते हैं कि नीचे मंदिर था या नहीं।

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि सिर्फ दीवार और पिलर के आधार पर इसे मंदिर नहीं कहा जा सकता। उस जगह पर ईदगाह के साक्ष्य भी हो सकते है। ASI ने वॉल 16 और 17 को हिन्दू स्ट्रक्चर बताया।

जस्टिस भूषण ने कहा कि आपकी प्लीडिग में इस बात का जिक्र नही है कि वहां पहले ईदगाह थी, जबकि हिंदुओं ने कहा है कि वहां मंदिर था। गवाहों ने इसका जिक्र किया है।

अरोड़ा ने कहा कि मस्जिद 1528 में थी और पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट सटीक नहीं कही जा सकती है. यह सिर्फ़ एक अंदाजा था कि मंदिर को गिराकर मस्जिद का निर्माण किया गया।

जस्टिस बोबड़े ने कहा कि प्रत्यक्ष तौर पर मंदिर को गिराकर मस्जिद नहीं बनाने का कोई साक्ष्य आपके पास है?

अरोड़ा ने कहा कि कई परतों में पुरातत्व विभाग ने रिपोर्ट में कहा कि मिट्टी का रंग रूप अलग है। इसमें ईंटों का प्रयोग भी स्पष्ट किया गया और तब ईंटों का प्रयोग मुस्लिमों द्वारा किया जाता था जो आंध्र की परंपरा में शामिल है।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि पूरा विस्तार से स्पष्ट करिए

अरोड़ा ने कहा कि  मस्जिद 1528 में थी और पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट सटीक नहीं है। यह सिर्फ़ एक अंदाजा था कि मंदिर को गिराकर मस्जिद का निर्माण किया गया। जस्टिस बोबड़े ने कहा कि प्रत्यक्ष तौर पर मंदिर को गिराकर मस्जिद नहीं बनाने का कोई साक्ष्य आपके पास है।

CJI रंजन गोगोई ने कहा कि आपकी 10वें चैप्टर पर दस्तख़त न होने की आपत्ति को हम इसको संज्ञान में लेते हैं और देखेंगे कि इसके साथ कोई फॉरवर्डेड रिपोर्ट थी या नहीं।

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि BR मणि की जगह हरिमान जी को शामिल किया गया था क्योंकि मणि को कहीं जाना था। हर पैनलिस्ट को अपनी रिपोर्ट लिखनी थी तो चैप्टर 10 पर दस्तख़त क्यों नहीं है, जबकि सभी चैप्टर पर दस्तख़त होना चाहिए था।

जस्टिस नज़ीर ने कहा कि क्या अपने ASI की रिपोर्ट को उस समय एक्सेप्ट किया था? मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा- नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि इसकी असली कॉपी कहां है? मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा इस बारे में ज़फरयाब जिलानी बताएंगे.जिलानी ने कहा कि वह रिपोर्ट सील बंद करके इलाहाबाद HC को दी गई थी।

जस्टिस बोबडे ने कहा कि क्या यह सही समय है इस मुद्दे को उठाने का?

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जब आप किसी को बुलाते हैं तो वह आपका गवाह बन जाता है और कोर्ट ने ASI को नियुक्त किया था।

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि ASI की समरी को इलाहाबाद HC ने भी नही स्वीकार किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने ही कमिश्नर की नियुक्ति की थी। ASI को आदेश दिया था अगर आपको उसकी रिपोर्ट पर कोई सवाल या संशय था तो उस समय ही आपको इस मुद्दे को उठाना चाहिए था।

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि हमने उस समय ही यह मुद्दा उठाया था लेकिन कोर्ट ने इसको खारिज कर दिया था. अरोड़ा ने कहा कि कोर्ट कमिश्नर के तौर पर मानी गई पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट पर मुझे ऐतराज है।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि कोर्ट कमिश्नर से क्षेत्रीय जांच करायी जा सकती है

मीनाक्षी आरोड़ा ने कहा कि पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से क्रास एग्जामिन भी नहीं किया गया। अधिकारी भुवन विक्रम सिंह ने इस बारे में आवेदन भी किया, लेकिन अधिकारियों से क्रास एग्जामिन की इजाजत हाईकोर्ट ने नहीं दी और उन्हें कोर्ट विटनेस के तौर पर माना।

अरोड़ा ने कहा कि पुरातत्व की रिपोर्ट में यह सामने नहीं आया है कि मंदिर को गिराकर मस्जिद बनायी गई, जो हिन्दू पक्षकारों का दावा है. इसी दावे के आधार पर हाईकोर्ट ने फैसला दिया।

अरोड़ा ने कहा कि यदि कोई विध्वंस नहीं हुआ था तो वादे का आधार क्या है?जस्टिस बोबडे ने कहा कि आप कैसे पुष्टि कर सकते हैं कि इसे ध्वस्त कर दिया गया था या अपने दम पर गिर गया था।

अरोड़ा ने कहा कि वहां हमला होने के संकेत थे और जलने के निशान थे। अरोड़ा ने कहा कि हिंदू पक्षकारों को कुछ सबूत देना चहिये ना कि कुछ यात्रियों की किताब का हवाला।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आप यह साफ करिए कि मस्जिद खाली जमीन पर बनायी गई है

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि पुरातत्व की रिपोर्ट में यह अंदाजा लगाया गया है कि संबंधित स्थान पर एक मंदिर था।

जस्टिस बोबड़े ने कहा कि जीर्णोद्धार की स्थिति में मंदिर का स्वतः गिरना संभव नहीं है।

अरोड़ा ने कहा कि 1528 में बनी मस्जिद किसी मंदिर को गिराकर नहीं बनाई गयी थी।

जस्टिस बोबड़े ने कहा कि हिंदू मंदिरों में जीर्णोद्धार का चलन है और उन्हें गिरने नहीं दिया जाता।

मीनाक्षी अरोड़ा- यह माना जाता है कि यहां पर मंदिर था. पहले हिंदू पक्ष को स्पष्ट करना चाहिए कि वहां पर मंदिर था।

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि ASI सीधे भाजपा के मंत्री के निर्देश पर काम कर रही थी। BR मणि ने यह आश्वस्त किया कि वो उक्त क्षेत्र का विविध रूप में बारीकी से अध्ययन करेंगे। ASI ने ये वायदा किया था कि वो इस अध्ययन के लिए हर तरह की वस्तु उपलब्ध कराएगी। लेकिन उसने वायदा नहीं निभाया। मुस्लिम रिप्रजेंटेशन अपर्याप्त था। खुदाई से मिली केवल 25 फीसदी हड्डियों की ही जांच की गई। हड्डियों की जांच महत्वपूर्ण थी, मगर ASI ने इनकी जांच पर भरोसा नहीं जताया।

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि ASI के किसी भी अधिकारी का क्रॉस एग्जामिनेशन नहीं किया गया, क्योंकि उनको सरकारी गवाह माना गया था।

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि वह HC के फैसले पर आधारित रिपोर्ट पर अपनी जिरह करेंगी. मीनाक्षी ने कहा कि 1/8/2002 को HC ने ASI को विवादित स्थल का सर्वे करने को कहा था। मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर एक समरी हाईकोर्ट में पेश की गई थी, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार किया।

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि कुछ अस्थियों के अवशेष खुदाई में पाए गए, लेकिन जांच सिर्फ 25% की हुई। मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर एक समरी हाईकोर्ट में पेश की गई थी, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार किया। मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि कुछ अस्थियों के अवशेष खुदाई में पाए गए।

मीनाक्षी अरोड़ा ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सभी दावों में मूल मामला यह है कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई है। इसमें पांच विशेषज्ञों के नेतृत्व में रिपोर्ट तैयार की गई।

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि कुल आठ अधिकारी और फोटोग्राफर की टीम थी।तमाम तथ्य 1992 में गिरी मस्जिद के मलबे से निकाले गए।

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि रिपोर्ट महज एक राय है, जो साक्ष्य अधिनियम की धारा-45 के तहत है।इसे बहुत मजबूत साक्ष्य नहीं माना जा सकता। यह विभाग का मानना है, क्योंकि यह प्राकृतिक विज्ञान पर आधारित नहीं है।

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