बाबरी मस्जिद मामला: SC ने ट्रायल चला रहे CBI के स्पेशल जज का बढ़ाया कार्यकाल
अयोध्या विवादित ढांचा गिराने की साजिश के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केस की सुनवाई कर रहे इस्पेशल सीबीआई जज एसके यादव का कार्यकाल 9 महीने और बढ़ाने का दिया आदेश। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जज का कार्यकाल बढाया जा रहा है ताकि वह ट्रायल पूरा कर फैसला सुना सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा 6 महीने में सुनवाई पूरी करें और अब से 9 महीने के भीतर इस मामले में अपना फैसला सुनाए।
उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राज्य में किसी जज का कार्यकाल बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट अपने अनुच्छेद 142 के तहत अधिकार के तहत ये कर सकता है।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा था कि इस केस की सुनवाई कर रहे जज के सेवानिवृत्त होने पर क्या नियम और कानून हैं? किसी केस की सुनवाई कर रहे जज के सेवानिवृत्त होने पर क्या नियम और कानून हैं?
दरअसल, इस केस की सुनवाई कर रहे सीबीआई जज एसके यादव को 30 सितंबर को सेवानिवृत्त होना है। इसलिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर मामले की सुनवाई पूरी करने के लिए छह महीने का और समय मांगा था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि यह बेहद जरूरी है कि सीबीआई जज एसके यादव मामले की सुनवाई पूरी करके फैसला सुनाएं। बता दें कि इस मामले में वरिष्ठ भाजपा नेता एलके आडवाणी, उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी समेत 12 लोग आरोपी है ।
इससे पहले 19 अप्रैल, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा था कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती पर 1992 के राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आपराधिक साजिश के गंभीर आरोप में मुकदमा चलेगा और रोजाना सुनवाई करके इसकी कार्यवाही दो साल के अंदर 19 अप्रैल, 2019 तक पूरी की जाएगी।

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