आयुष हेल्थ मेला 2018 : UDMA के यूनानी मेले की जामिया वासियों को तो दरकिनार कैमिस्टों को भी खबर नहीं ; पूरे मेले में यह 6 चीज़ें रहीं गायब
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नई दिल्ली : (एशिया टाइम्स की स्पेशल रिपोर्ट ) जामिया मिल्लिया इस्लामिया में यूनानी दवा तैयार करने वाली कंपनियों के द्वारा आयोजित 4 दिवसीय आयुष हेल्थ मेला 2018, Unani Drugs Manufacturers Association -UDMA यूनानी मेले का आज आखिरी दिन है जामिया कैंपस में Ansari Auditorium के बहार 52 स्टाल लगाये गए हैं. FKT सभागार में पिछले तीन दिन से विभिन्न विषयों पर अकादमिक चर्चा जरी है , लेकिन इस पूरे मेले से कई महत्वपूर्ण अंग गायब हैं.
यूनानी मेले की जामिया वासियों को तो दरकिनार कैमिस्टों को भी खबर नहीं
सबसे अहम और बुनियादी बात तो यही है की जामिया नगर में , जामिया मिल्लिया इस्लामिया में यूनानी वालों का मेला है और खुद जामिया वासियों को खबर नहीं किया गया पूरे जामिया नगर में कहीं कोई पोस्टर बैनर नहीं नज़र आया ,प्रचार प्रसार की कमी की वजह से बहुत से लोग इसका फायेदा नहीं उठा सके. यह देख ऐसा लगा की मनो जनता को अपनी और आकर्षित करने यूनानी से लोगों को करीब करने का यूनानी कम्पनियां कोई शौक़ नहीं रखतीं . स्टाल्स विजिट से भी ऐसा लगा की एक दो स्टाल को छोड़ कर अधिकांशतःस्टाल रिटेल सेंटर बने हुए हैं , यूनानी के प्रमोशन में इनकी कोई दिल्चस्पी नहीं है. यह तो रही आम लोगों से सम्बंधित बात .
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एक स्टाल पर ली गई मेले कीअत्यंत जीवंत तस्वीर , बच्चा तस्वीर से निकल कर एक गोद में आने का प्रयास करते हुए [/caption]
पूरे मेले में यह सात चीज़ें रही गायब
ओखला कैमिस्टस वेलफेयर एसोसिएशन के ओर्ग्निज़िंग सेक्रेटरी नईम रज़ा[/caption]
मेडिकल स्टोर मालिकों (कैमिस्टों ) का अलग है दर्द
अब आप जरा मेडिकल स्टोर मालिकों (कैमिस्टों ) का दर्द सुनें जो इन दवाओं को अपने यहाँ रख कर बेचते हैं . एशिया टाइम्स जामिया नगर में लगभग आधा दर्जन मेडिकल स्टोरों से पुछा क्या आप को UDMA ने अपने मेले में शिरकत का बकायेदा कोई अधिकारिक निमंतरण भेजा है .अधिकांश लोगों को मालूम ही नहीं था की कोई मेला है , ओखला कैमिस्टस वेलफेयर एसोसिएशन के ओर्ग्निज़िंग सेक्रेटरी नईम रज़ा का कहना है की हम यूनानी कंपनियों की मनमानी से बुरी तरह पीड़ित है , यह लोग प्रोडक्ट पर एक्सपायरी तो लिखते हैं लेकिन हमारी एक्सपायरी वापस नहीं लेते, किसी के यहाँ कोई एक्सपायरी पालिसी नहीं है ,
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जामिया मिल्लिया इस्लामिया डिप्लोमा इन यूनानी डिपार्टमेंट के स्टाल पर एक स्टूडेंट अपने प्रोडक्ट्स का परिचय कराते हुए [/caption]
एक्सपायरी पालिसी न होने से नाराज़ कैमिस्टों ने यूनानी के bycot की चेतावनी दी है
दवाओं की पैकेजिंग भी अति निम्नस्तर की करते हैं जिस से लीकेज प्रॉब्लम बनी रहती है इस से भी हमारा बड़ा नुकसान होता है. उन्हों ने कहा की होना तो यह चैये था मेले में कैमिस्टों से मिलने उन से वार्तलाप का कोई समय रखते ताकि हमारी दुश्वारी भी दूर की जाती हम ने कुछ लोगों से दरख्वास्त भी की लेकिन ऐसा नहीं किया गया . सेमिनार में एक सेशन कैमिस्टों से interaction का हो सकता था . नीम कहते हैं की निकट भविष्य में अगर हमारी समस्याओं पर ध्यान न दिया गया तो हम इनका bycot करेंगे .
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आयुष मंत्रालय का महा स्टाल खौफनाक पसरा सन्नाटा [/caption]
खाली पड़ा है आयुष मंत्रालय का महा स्टाल खौफनाक अकेलेपन से जूझ रहे हैं आयुष कर्मचारी
अब ज़रा केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय के स्टाल को एक नज़र करें देखें , आयुष मंत्रालय इस मेले का सह आयोजक है , काफी कुशादा जगह घेरे हुए आयुष के स्टाल पर होर्डिंग की भरमार है , लेकिन आम जानत के लिए यहाँ कुछ मेडिकल litrature और डिजिटल स्क्रीन के सिवा कुछ भी नहीं है . आयुष के कर्मचारी तीन दिन से दिन के उजाले में खौफनाक अकेलेपन से से जूझ रहे हैं . बड़ी मुश्किल से अगर कोई दाखिल भी हुआ तो उसको आकर्षित करने का कोई सामान नहीं है और न कोई पहल दिखाई दी .
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यूनानी के मेले से उर्दू लग भग लुप्त रही बहुत खोजने से स्टालों पर बमुश्किल 5 प्रतिशत भी जगह न पासकी [/caption]
यूनानी के मेले से लग भग लुप्त रही उर्दू
एक अफ़सोस जनक बात और भी रही अगर आप ने गौर किया हो यूनानी के मेले से उर्दू लग भग गायब रही बहुत खोजने से स्टालों पर बमुश्किल 5 प्रतिशत भी जगह न पासकी बदलते समय के साथ यूनानी और उर्दू का रिश्ता काफी कमज़ोर दिखा . एशिया टाइम्स ने AIUTC के नेशनल ओर्ग्नैजिंग सेक्रेटरी डॉ धर्म राज सिंह से बात की सिंह कहते हैं की सही बात यह है की उर्दू ही यूनानी को आयुर्वेद से अलग पहचान देती है. यह पैथी आज भी उर्दू मध्यम से ही पढ़ी पढाई जाती है हकीमों के सभी नुस्खे उर्दू में ही तैयार किये जाते है. इस में काम करने वाले सभी लोग उर्दू जानते हैं फिर भी यह लापरवाही दरसल यह लोग एहसासे कमतरी के क्यों शिकार हैं.
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लिमरा रेमिड़ेज़ के मालिक जलीस अहमद [/caption]
एक पहलू यह भी मालूम हुआ
लेकिन इसका एक पहलू यह भी जानें यूनानी कंपनी लिमरा रेमिड़ेज़ के मालिक जलीस अहमद ने एशिया टाइम्स से बात की यह जनाब मेले की आर्गनाइजिंग कमीटी के सक्रीय सदस्य है मेले की कामयाबी को लेकर काफी खुश दिखे उन्हों ने बताया की कहते हैं हमें बहुत अच्छा अनुभव रहा है , सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा है , यह udma का पहला मेला है जो बहुत कामयाबी की तरफ जा रहा है . जलीस अपनी कंपनी के ग्रोथ से काफी आश्वस्त दिखे .
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दिल्ली सरकार की जानिब से होमियो क्लिनिक पर डॉ जहांगीर हुसैन मरीजों को देखते हुए [/caption]
मेले को जनता के लिए अति आकर्षित और बहुत लाभदायक किया जा सकता था
मेले को जनता के लिए अति आकर्षित और बहुत लाभदायक किया जा सकता था , हर स्टाल को रोचक ,informative और लोकप्रिय बनाने के लिए करना सिर्फ यह था की आने वालों को ज्यादा से ज्यादा भागीदार बनाया जाये , क्विज , डिस्कशन , लाइव चैट और भी बहुत कुछ हो सकता था . हर कंपनी अगर यहाँ अपने प्रोडक्ट्स का प्रचार प्रसार के लिए आई थी उसे करना सिर्फ यह था की वो अपने प्रोडक्ट से सम्बन्धित कुछ क्विज तैयार करलेती.
आयुष मंत्रालय को अपने सभी विभागों का परिचय मेले में हो जाता लेकिन यह सब तो तब होगा जब कुछ करने का शौक़ हो मौके से फायेदा उठाने का हुनर आता हो ,हम उम्मीद करते हैं की अगली बार जब UDMA यूनानी मेला आयोजित करेगा तो इसका ज़रूर ख्याल रखेगा .
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मुहम्मद जुनेद हसन ने एशिया टाइम्स को बताया की हम यहाँ प्रोडक्ट बेचने नहीं प्रमोट करने आये हैं[/caption]
पूरे मेले में एक स्टाल ऐसा था जो यहाँ प्रोडक्ट बेचने नहीं प्रमोट करने आया था
यहाँ कम से कम हकीम बकाई मेडिकेयर का एक स्टाल ऐसा था जो पहले दिन से हर आने वाले को अपनी जानिब आकर्षित करने में कामयाब रहा , उसकी एक बड़ी वजह यह थी की उसके मैनेजिंग डायरेक्टर मुहम्मद जुनेद हसन ने एशिया टाइम्स को बताया की हम यहाँ प्रोडक्ट बेचने नहीं प्रमोट करने आये हैं. प्रोडक्ट तो हम बाज़ार में बेच ही लेंगे ,हमारा यहाँ आना सिर्फ इस लिए है की जनता जनार्दन यूनानी से परिचित हो और हम इसमें कामयाब रहे .
एक स्टाल पर ली गई मेले कीअत्यंत जीवंत तस्वीर , बच्चा तस्वीर से निकल कर एक गोद में आने का प्रयास करते हुए [/caption]
पूरे मेले में यह सात चीज़ें रही गायब
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यूनानी मेले की जामिया वासियों को तो दरकिनार कैमिस्टों को भी खबर नहीं
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मेडिकल स्टोर मालिकों (कैमिस्टों ) का है अलग दर्द
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एक्सपायरी पालिसी न होने से नाराज़ कैमिस्टों ने यूनानी के bycot चेतावनी दी
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खाली पड़ा है आयुष मंत्रालय का महा स्टाल खौफनाक अकेलेपन से जूझ रहे हैं आयुष कर्मचारी
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यूनानी के मेले से लग भग गायब रही उर्दू
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मेले को जनता के लिए अति आकर्षित और लाभदायक किया जा सकता था
ओखला कैमिस्टस वेलफेयर एसोसिएशन के ओर्ग्निज़िंग सेक्रेटरी नईम रज़ा[/caption]
मेडिकल स्टोर मालिकों (कैमिस्टों ) का अलग है दर्द
अब आप जरा मेडिकल स्टोर मालिकों (कैमिस्टों ) का दर्द सुनें जो इन दवाओं को अपने यहाँ रख कर बेचते हैं . एशिया टाइम्स जामिया नगर में लगभग आधा दर्जन मेडिकल स्टोरों से पुछा क्या आप को UDMA ने अपने मेले में शिरकत का बकायेदा कोई अधिकारिक निमंतरण भेजा है .अधिकांश लोगों को मालूम ही नहीं था की कोई मेला है , ओखला कैमिस्टस वेलफेयर एसोसिएशन के ओर्ग्निज़िंग सेक्रेटरी नईम रज़ा का कहना है की हम यूनानी कंपनियों की मनमानी से बुरी तरह पीड़ित है , यह लोग प्रोडक्ट पर एक्सपायरी तो लिखते हैं लेकिन हमारी एक्सपायरी वापस नहीं लेते, किसी के यहाँ कोई एक्सपायरी पालिसी नहीं है ,
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जामिया मिल्लिया इस्लामिया डिप्लोमा इन यूनानी डिपार्टमेंट के स्टाल पर एक स्टूडेंट अपने प्रोडक्ट्स का परिचय कराते हुए [/caption]
एक्सपायरी पालिसी न होने से नाराज़ कैमिस्टों ने यूनानी के bycot की चेतावनी दी है
दवाओं की पैकेजिंग भी अति निम्नस्तर की करते हैं जिस से लीकेज प्रॉब्लम बनी रहती है इस से भी हमारा बड़ा नुकसान होता है. उन्हों ने कहा की होना तो यह चैये था मेले में कैमिस्टों से मिलने उन से वार्तलाप का कोई समय रखते ताकि हमारी दुश्वारी भी दूर की जाती हम ने कुछ लोगों से दरख्वास्त भी की लेकिन ऐसा नहीं किया गया . सेमिनार में एक सेशन कैमिस्टों से interaction का हो सकता था . नीम कहते हैं की निकट भविष्य में अगर हमारी समस्याओं पर ध्यान न दिया गया तो हम इनका bycot करेंगे .
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आयुष मंत्रालय का महा स्टाल खौफनाक पसरा सन्नाटा [/caption]
खाली पड़ा है आयुष मंत्रालय का महा स्टाल खौफनाक अकेलेपन से जूझ रहे हैं आयुष कर्मचारी
अब ज़रा केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय के स्टाल को एक नज़र करें देखें , आयुष मंत्रालय इस मेले का सह आयोजक है , काफी कुशादा जगह घेरे हुए आयुष के स्टाल पर होर्डिंग की भरमार है , लेकिन आम जानत के लिए यहाँ कुछ मेडिकल litrature और डिजिटल स्क्रीन के सिवा कुछ भी नहीं है . आयुष के कर्मचारी तीन दिन से दिन के उजाले में खौफनाक अकेलेपन से से जूझ रहे हैं . बड़ी मुश्किल से अगर कोई दाखिल भी हुआ तो उसको आकर्षित करने का कोई सामान नहीं है और न कोई पहल दिखाई दी .
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यूनानी के मेले से उर्दू लग भग लुप्त रही बहुत खोजने से स्टालों पर बमुश्किल 5 प्रतिशत भी जगह न पासकी [/caption]
यूनानी के मेले से लग भग लुप्त रही उर्दू
एक अफ़सोस जनक बात और भी रही अगर आप ने गौर किया हो यूनानी के मेले से उर्दू लग भग गायब रही बहुत खोजने से स्टालों पर बमुश्किल 5 प्रतिशत भी जगह न पासकी बदलते समय के साथ यूनानी और उर्दू का रिश्ता काफी कमज़ोर दिखा . एशिया टाइम्स ने AIUTC के नेशनल ओर्ग्नैजिंग सेक्रेटरी डॉ धर्म राज सिंह से बात की सिंह कहते हैं की सही बात यह है की उर्दू ही यूनानी को आयुर्वेद से अलग पहचान देती है. यह पैथी आज भी उर्दू मध्यम से ही पढ़ी पढाई जाती है हकीमों के सभी नुस्खे उर्दू में ही तैयार किये जाते है. इस में काम करने वाले सभी लोग उर्दू जानते हैं फिर भी यह लापरवाही दरसल यह लोग एहसासे कमतरी के क्यों शिकार हैं.
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लिमरा रेमिड़ेज़ के मालिक जलीस अहमद [/caption]
एक पहलू यह भी मालूम हुआ
लेकिन इसका एक पहलू यह भी जानें यूनानी कंपनी लिमरा रेमिड़ेज़ के मालिक जलीस अहमद ने एशिया टाइम्स से बात की यह जनाब मेले की आर्गनाइजिंग कमीटी के सक्रीय सदस्य है मेले की कामयाबी को लेकर काफी खुश दिखे उन्हों ने बताया की कहते हैं हमें बहुत अच्छा अनुभव रहा है , सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा है , यह udma का पहला मेला है जो बहुत कामयाबी की तरफ जा रहा है . जलीस अपनी कंपनी के ग्रोथ से काफी आश्वस्त दिखे .
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दिल्ली सरकार की जानिब से होमियो क्लिनिक पर डॉ जहांगीर हुसैन मरीजों को देखते हुए [/caption]
मेले को जनता के लिए अति आकर्षित और बहुत लाभदायक किया जा सकता था
मेले को जनता के लिए अति आकर्षित और बहुत लाभदायक किया जा सकता था , हर स्टाल को रोचक ,informative और लोकप्रिय बनाने के लिए करना सिर्फ यह था की आने वालों को ज्यादा से ज्यादा भागीदार बनाया जाये , क्विज , डिस्कशन , लाइव चैट और भी बहुत कुछ हो सकता था . हर कंपनी अगर यहाँ अपने प्रोडक्ट्स का प्रचार प्रसार के लिए आई थी उसे करना सिर्फ यह था की वो अपने प्रोडक्ट से सम्बन्धित कुछ क्विज तैयार करलेती.
आयुष मंत्रालय को अपने सभी विभागों का परिचय मेले में हो जाता लेकिन यह सब तो तब होगा जब कुछ करने का शौक़ हो मौके से फायेदा उठाने का हुनर आता हो ,हम उम्मीद करते हैं की अगली बार जब UDMA यूनानी मेला आयोजित करेगा तो इसका ज़रूर ख्याल रखेगा .
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मुहम्मद जुनेद हसन ने एशिया टाइम्स को बताया की हम यहाँ प्रोडक्ट बेचने नहीं प्रमोट करने आये हैं[/caption]
पूरे मेले में एक स्टाल ऐसा था जो यहाँ प्रोडक्ट बेचने नहीं प्रमोट करने आया था
यहाँ कम से कम हकीम बकाई मेडिकेयर का एक स्टाल ऐसा था जो पहले दिन से हर आने वाले को अपनी जानिब आकर्षित करने में कामयाब रहा , उसकी एक बड़ी वजह यह थी की उसके मैनेजिंग डायरेक्टर मुहम्मद जुनेद हसन ने एशिया टाइम्स को बताया की हम यहाँ प्रोडक्ट बेचने नहीं प्रमोट करने आये हैं. प्रोडक्ट तो हम बाज़ार में बेच ही लेंगे ,हमारा यहाँ आना सिर्फ इस लिए है की जनता जनार्दन यूनानी से परिचित हो और हम इसमें कामयाब रहे .

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