एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भारत में काम रोका, मोदी सरकार पर लगाया भेदभाव का आरोप

 

नई दिल्ली। मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भारत में अपना कामकाज रोक दिया है। उसका कहना है कि केंद्र सरकार उसके खिलाफ बदले की भावना से काम कर रही है। उसके बैंक अकाउंट्स को पूरी तरह फ्रीज कर दिया गया है जिससे उसके लोगों को भारत में काम बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

संस्था का दावा है कि उसने दिल्ली में इस साल फरवरी में हुए दंगों दिल्ली पुलिस से जवाबदेही की मांग की थी। साथ ही जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन पर केंद्र से सवाल पूछे थे। यही कारण है कि सरकार उसके खिलाफ बदले की भावना से काम कर रही है और उसकी वित्तीय परिसंपत्तियों को निशाना बनाया जा रहा है। संस्था ने कहा कि बैंक अकाउंट्स फ्रीज करने की जानकारी उसे 10 सितंबर को मिली।

एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अविनाश कुमार ने कहा कि पिछले दो साल से एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है और हमारे बैंक अकाउंट्स को पूरी तरह फ्रीज कर दिया गया है। हम सरकार और पुलिस में लगातार पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाते रहे हैं जिससे सरकारी एजेंसियों द्वारा हमारा उत्पीडन किया जा रहा है। इनमें ईडी भी शामिल है। हम अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हैं और सरकार की कार्रवाई इस आवाज को दबाने को कोशिश है।

सरकार का तर्क
दूसरी ओर सरकार का तर्क है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल को अवैध रूप से फंड मिल रहा है और यह कभी भी Foreign Contribution (Regulation) Act के तहत रजिस्टर्ड नहीं थी। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल पर विदेश से पैसा लेने में वित्तीय अनियमितताओं का आरोप है और ईडी इसकी जांच कर रही है। गृह मंत्रालय के मुताबिक संस्था को एफडीआई के जरिए फंड मिला जिसकी गैर सरकारी संगठनों के मामले में अनुमति नहीं है।

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