अलविदा आगरा! बहुत यादें लेकर लौट रहा हूँ / नजीर मलिक
अलविदा आगरा। बहुत यादें लेकर लौट रहा हूँ। बचपन के साथी अनवर भाई करोड़पति से अरबपति बन चुके हैं, लेकिन अभी भी हम लोगो के लिये अनवर ही हैं। मेरे कलीग ज्ञानेंद्र त्रिपाठी दैनिक जागरण आगरा में C R बनके पहुच गए। ये पद मेरा सपना था, खैर मैं नही तो ज्ञानेंद्र ही पहुंचे। फेसबुक के शुरू के साथी जितेंन्द्र सिंह अब परिवार के सदस्य हैं।
इस बार एक और एफबी मित्र से रूबरू हुए, नाम है विशेष यादव। मेडिसिन लाइन के कारोबारी और बेटे के उम्र के विशेष यादव ने मेरी भाग दौड़ के बीच आखिर मुझे ताजमहल गेट पर धर ही लिया। मुख्तसर सी मुलाकात में कई सामाजिक मुद्दों पर बात हुई।दूसरे दिन जम कर मुलाकात का वादा हुआ, मगर तमाम कोशिशों के बावजूद हालात के चलते हम दुबारा न मिल सके। मैं विशेष से फिर मिलना चाहूंगा।
खैर! आगरा के अग्रिम पंक्ति के शू मेकर और एक्सपोर्टर अनवर भाई में कोई तब्दीली न आना दिल को छू गया, वरना "याद आते हैं बुरे वक्त के साथी किसको, सुबह होते ही चिरागों को बुझा देते है" दैनिक जागरण में बड़ें मुकाम पर पहुंच के ज्ञानेंद्र की नज़रों में आज भी मैं बड़ा भाई ही हूँ।इस पेशेवर जॉब में इतनी कदर अब कम ही दी जाती है। रही Jitendra Singh की बात, तो वे बांड बाबा हैं। "मस्तों की ज़िंदगी मे हमेशा बहार" के सिद्धांत पर अमल करते हैं, लेकिन इस बार उनकी तबियत खराब थी। लिहाजा वक़्त न द्दे सके। लेकिन बिटिया आशी, बेटे युवी ने कमी पूरी कर दी।सॉरी, फिर कभी जितेंन्द्र जी। 11 अप्रैल को आगरा में भयानक आंधी आई थी। आगरा मंडल में 39 मौतें हुई थीं। पूरे आगरा शहर में हज़ारों पेडसडक पर टूट कर पड़े हैं। सबसे अफसोस ताजमहल के अंदरूनी हिस्से में पूर्वी लान का वो बेहद पुराना पीपल का पेड़ भी गिर गया, जिसके नीचे बैठ कर अक्सर सिक्योरिटी की नज़रों से बचा कर लाई गई सिगरेटें पिया करते थे। अब वहां कोई मोटा पेड़ नही है जिसकी ओट में निकट भविष्य में हम कानून तोड़ने की हिमाकत कर सकें। जमुना भी अब ताज से दूर होती जा रही है। सब कुछ ठीक नही है। पूर्वांचल के सीनियर पत्रकार नजीर मलिक के फेस बुक पेज से

0 comments