अगर रिज़र्व बैंक की तिजोरी में आया सारा पैसा सफेद है तो काला धन कहाँ है?
एक दिन मुल्ला नसीरूदीन बकरे का एक किलो मीट ख़रीद लाए और अपनी बेगम को अच्छे से पकाने के लिए बोलकर खुद नहा धो कर थोड़ा मूड बनाने के लिए बाज़ार की ओर चल दिए। बेगम ने देसी घी में खूब मसाले डाल कर बहुत स्वादिष्ट मीट बनाया।
पतिका इंतज़ार करते करते बेगम नमक मिर्च चेक करने के चक्कर में ही धीरे-धीरे सारा मीट चट कर गई। मुल्ला जी जब वापिस आए तो बेगम उनके सामने खाली पतीला रख कर बोली कि,"जी, मीट तो सारा यह बिल्ली खा गई"। मुल्ला जी ने बिल्ली को पकड़ लिया।
उसेतराजू में तोला तो बिल्ली पूरे 1 किलो की निकली। मुल्ला जी ने परेशान हो कर बेगम से पूछा, "बेगम साहिबा अगर ये बिल्ली है तो मीट कहाँ है और अगर ये मीट है तो बिल्ली कहाँ है?"
भारत की जनता को समझ नहीं आ रहा कि अगर रिज़र्व बैंक की तिजोरी में आया सारा पैसा सफेद है तो काला धन कहाँ है और अगर ये सारा काला धन है तो देश की जनता का सफ़ेद धन कहाँ है?
अगर कालाधन बैंको में आ गया हैं तो कहाँ हैं कल्याणकारी योजनाएं और अचानक FDI में 100% विदेशी निवेश की जरूरत क्यों आन पड़ी ?
Muhammad Shafiq

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