आईएएस अधिकारी शाह फैसल के रेप पर ट्वीट करने पर हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई
नई दिल्ली: 2010 बैच के यूपीएससी टॉपर शाह फैसल को उनके द्वारा बलात्कार की बढ़ती घटनाओं पर किया गया एक ‘व्यंग्यात्मक’ ट्वीट भारी पड़ा है. इस ट्वीट के चलते केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के कहने पर जम्मू कश्मीर सरकार ने फैसल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की शुरुआत कर दी है.
फैसल को सरकार द्वारा भेजे गए नोटिस में सामान्य प्रशासनिक विभाग द्वारा कहा गया है, ‘आप कथित रूप से अपने आधिकारिक दायित्वों के निर्वहन में पूरी ईमानदारी और निष्ठा बनाए रखने में नाकामयाब हुए हैं और एक लोक सेवक के बतौर यह अनुचित व्यवहार है.’
मालूम हो कि 22 अप्रैल को फैसल ने ट्वीट किया था,
https://twitter.com/shahfaesal/status/1016683369004982272/photo/1?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1016683369004982272&ref_url=http%3A%2F%2Fthewirehindi.com%2F50202%2Fias-shah-faesal-dopt-jammu-kashmir-twitter-notice%2F
‘पितृसत्ता + जनसंख्या + निरक्षरता एल्कोहल + पॉर्न + टेक्नोलॉजी + अराजकता = रेपिस्तान!
हालांकि यह अब तक स्पष्ट नहीं है कि यह ट्वीट किस तरह सरकारी नियमों का उल्लंघन है. सरकार द्वारा भेजे गए नोटिस में उनके द्वारा इस ट्वीट पर दिए गए एक जवाब का स्क्रीनशॉट भी साथ था.
उनके इस ट्वीट पर @p7eiades ने जवाब में विकिपीडिया पेज का एक लिंक दिया जिसमें ‘पॉर्नोग्राफी और यौन हिंसा’ के असर के बारे में लिखा था. इस पर फैसल में जवाब में एक न्यूज़ रिपोर्ट का लिंक पोस्ट किया जिसमें एक पॉर्न एडिक्ट द्वारा मां का बलात्कार करने की खबर थी, जिसे साझा करते हुए फैसल ने लिखा कि थ्योरी और प्रैक्टिकल में फर्क होता है.
‘पितृसत्ता + जनसंख्या + निरक्षरता एल्कोहल + पॉर्न + टेक्नोलॉजी + अराजकता = रेपिस्तान!
हालांकि यह अब तक स्पष्ट नहीं है कि यह ट्वीट किस तरह सरकारी नियमों का उल्लंघन है. सरकार द्वारा भेजे गए नोटिस में उनके द्वारा इस ट्वीट पर दिए गए एक जवाब का स्क्रीनशॉट भी साथ था.
उनके इस ट्वीट पर @p7eiades ने जवाब में विकिपीडिया पेज का एक लिंक दिया जिसमें ‘पॉर्नोग्राफी और यौन हिंसा’ के असर के बारे में लिखा था. इस पर फैसल में जवाब में एक न्यूज़ रिपोर्ट का लिंक पोस्ट किया जिसमें एक पॉर्न एडिक्ट द्वारा मां का बलात्कार करने की खबर थी, जिसे साझा करते हुए फैसल ने लिखा कि थ्योरी और प्रैक्टिकल में फर्क होता है.

हालांकि गृह मंत्रालय के
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