प्रियंका गांधी के सामने टूटता योगी का घमंड
माजिद अली खां
लखीमपुर खीरी में हुई किसानों की हत्याओं के बाद प्रियंका गांधी के तेवरों के सामने अपनी हट के लिए मशहूर हो चुके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस प्रकार एक बार फिर बौने पड़ते नज़र आ रहे हैं उससे भविष्य की राजनीति का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है. इससे पहले सीएए प्रदर्शनों के दौरान योगी आदित्यनाथ की निरंकुशता को प्रियंका गांधी ने चुनौती दी थी और तब भी योगी प्रशासन प्रियंका गांधी के सामने झुकता नज़र आया था.
लखीमपुर में हुई ये घटनाएँ किसी सोची समझी साज़िश का हिस्सा भी हो सकती हैं लेकिन इसके बाद विपक्ष के तौर तरीकों ने ये जरूर संदेश दिया है कि भाजपा के मुकाबले कौन मजबूत विपक्ष बन सकता है. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है लेकिन उसके मुखिया पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के जमीन पर लड़ने की रणनीति से लोगों में नकारात्मक संदेश जा रहा है कि ऐसा कौन सा डर है जो अखिलेश को भाजपा से लड़ने में रुकावट बन जाता है.
राजनीति पर नज़र रखने वाले कहते हैं कि पिछली बार अखिलेश यादव को मुलायम सिंह यादव की मेहनत का सिला मिल गया था लेकिन इस बार उन्हे खुद ही साबित करना होगा कि वो मुलायम सिंह यादव के मजबूत वारिस हैं. अगर वो ये साबित करने में नाकाम रहे तो फिर चाहे वो कितनी भी बड़ी पार्टी के मुखिया हो जनता उन्हे मौका नही देगी क्योंकि प्रियंका गांधी की बढ़ रही मजबूत और टक्कर देती सक्रियता लोगों का धयान अपनी और खींचने पर मजबूर कर रही है.
लखीमपुर में हुए बवाल के बाद रात में ही लखीमपुर की तरफ कूच करने वाली प्रियंका गांधी के अलावा लोकदल नेता जयंत चौधरी भी लखीमपुर पहुँचने में कामयाब रहे थे. प्रियंका गांधी को हिरासत में रखकर फिर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को लखीमपुर जाने देने की अनुमति देना साबित करता है कि कहीं ना कहीं भाजपा प्रियंका गांधी और राहुल गांधी का दबाव महसूस कर रही है. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने लखीमपुर में लवप्रीत सिंह के माता-पिता एवं बहनों से मुलाकात कर उनकी पीड़ा सुनीं.
सोशल मीडिया पर प्रियंका गांधी का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वो हिरासत के दौरान जिस कमरे में ठहराई गई वहाँ झाड़ू दे रही हैं, इस वीडियो ने इतना तहलका मचा दिया कि लोग कहने लगे कि भाजपा की गंदगी को प्रियंका गांधी ही साफ कर सकती हैं. हालांकि भाजपा कांग्रेस पर लखीमपुर मामले में राजनीति करने का आरोप लगा रही है, इसके जवाब में प्रियंका गांधी का कहना है कि लोकतंत्र में विपक्ष का काम सत्ता पक्ष के अत्याचारों से जनता की हिफाजत करना भी होता है और हम भलीभांति विपक्ष की मजबूत भूमिका निबाहेंगे.
प्रियंका गांधी के इन तेवरों ने राज्य कांग्रेस मे भी जान फूंक दी है. मुद्दत से बेजान पड़ी कांग्रेस को प्रियंका गांधी ने योगी सरकार से टकराकर हौसला दिया है उससे महसूस हो रहा कि यदि प्रियंका गांधी ऐसे ही लगातार राज्य में सरकार से टकराती रहीं तो वो समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को पीछे छोड़ सकती है. लोगों का मानना है कि भाजपा से मुकाबला करने की हिम्मत सिर्फ प्रियंका गांधी के अंदर है और ये बात कई जगह देखने को मिली है. अब देखना ये है कि प्रियंका गांधी के तेवरों से कितना जनसमर्थन कांग्रेस को मिलता है और विधानसभा चुनाव में कितनी मजबूती से उभर सकती है.
Note: लेख में दिए गए विचार माजिद अली ख़ाँ के निजी हैं।

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