विश्व पुस्तक मेला 2024 - मुस्लिम बुद्धिजीवी परिषद के मंडप की गतिविधियां
नई दिल्ली : विश्व पुस्तक मेला 2024 में अपनी सांस्कृतिक और बौद्धिक गतिविधियों के हिस्से के रूप में, मुस्लिम बुद्धिजीवी परिषद के मंडप ने एक संगोष्ठी का आयोजन किया। जिसका शीर्षक "वर्तमान युग में मानव भाईचारे का महत्व" था। इसमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पश्चिम एशिया और खाड़ी मामलों की शोधकर्ता प्रोफेसर डॉ. समीना हमीद, दिल्ली में पत्रकार सिंडिकेट के महासचिव संजय कपूर और नई दिल्ली में पारसी धर्म के उपाध्यक्ष रोहिन मार्कर ने अपने बहुमूल्य व्याख्यान प्रस्तुत किये।
संगोष्ठी के दौरान डॉ. समीना हमीद ने मानव बंधुत्व से संबंधित घोषणा के सिद्धांतों और मूल्यों को लागू करने और मानव समाज के सभी सदस्यों को एक मानव प्रणाली के भीतर एकीकृत करने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा: “इस भूमि को सभी मानव जाति की मातृभूमि घोषित किया जाना चाहिए, बिल्कुल उसी प्रकार जैसे यह अपने मूल निवासियों की मातृभूमि है। यह आवश्यक तक़ाज़ा है कि बुद्धिजीवी एवं प्रभावशाली लोग विभिन्न स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों एवं स्थानों पर मानव भाईचारे और बंधुत्व की अवधारणा के महत्व तथा इस अवधारणा के व्यावहारिक कार्यान्वयन पर अपने विचार व्यक्त करते रहें। उन्होंने स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों एवं छात्राओं को मानव भाईचारे का पाठ पढ़ाने के महत्व पर भी ज़ोर दिया। साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि विश्वविद्यालय की उच्च शिक्षा परिषद की अगली बैठक के दौरान, वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में मास्टर्स कार्यक्रमों में पाठ्यक्रम के रूप में "मानव भाईचारे से संबंधित दस्तावेज़" को भी शामिल करने का प्रस्ताव रखेंगी।
नई दिल्ली में पत्रकारों के सिंडिकेट के महासचिव संजय कपूर ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया को अब मानवता की रक्षा करने वाले सिद्धांतों और मूल्यों को लागू करने की तत्काल आवश्यकता है, जिसमें मानव भाईचारे के उच्च मूल्य मुख्य रूप से शामिल हैं। जो विश्वासों, पृष्ठभूमियों और संस्कृतियों में अंतर के बावजूद सभी मानव जाति को एकजुट करते हैं। साथ ही, उन्होंने मुस्लिम बुद्धिजीवी परिषद के समकालीन युग के महत्व और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में शांति, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व एवं दूसरों की स्वीकृति को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर भी विचार विमर्श किया। इसी प्रकार, उन्होंने वर्तमान पीढ़ी के बीच जागरूकता पैदा करने और न केवल धार्मिक स्तर पर बल्कि विभिन्न क्षेत्रों और संपूर्ण भारतीय समाज में भाईचारे और मानव बंधुत्व के सिद्धांतों पर चर्चा करने की आवश्यकता की ओर भी संकेत किया।
मानव भाईचारे की अवधारणा पर अपने भाषण में, नई दिल्ली में पारसी प्रमुख आवा खुलर की ओर से बोलते हुए श्री रोहिन मार्कर ने कहा कि “पारसी धर्म मानव एकता और अंतर-संबंध में पूर्ण विश्वास पर आधारित है। यही बात इसके कंधों पर आने वाली ज़िम्मेदारी को बड़ी बनाती है और उसकी कथनी एवं करनी में सामंजस्य बिठाने के लिए कड़ी मेहनत और प्रयास की आवश्यकता का आह्वान करती है”। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के विभिन्न सदस्यों के बीच सहयोग और समर्थन मानव भाईचारे के सिद्धांतों और मूल्यों को बनाए रखने और समाज में सहिष्णुता और सह-अस्तित्व के मूल्यों को बढ़ावा देने में अति सहायक है।
उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले में 'मुस्लिम बुद्धिजीवी परिषद' की यह लगातार दूसरी भागीदारी है, जो आगंतुकों की संख्या की दृष्टि से क्षेत्र के सबसे बड़े मेलों में से एक है। जिसमें 10 से 18 फरवरी तक परिषद की विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। परिषद के कार्यक्रमों के पीछे जो उद्देश्य है वह शांति को बढ़ावा देना, संवाद और सहिष्णुता के मूल्यों को मज़बूत करना और विभिन्न मानव जातियों और विविध मानवीय विश्वासों और विचारधाराओं के लोगों के बीच सहयोग के पुल बनाना है।
परिषद के स्टॉल पर पांच (5) भाषाओं में दो सौ बीस (220) से अधिक प्रकाशन उपलब्ध हैं। जो सबसे महत्वपूर्ण बौद्धिक समस्याओं पर चर्चा करते हैं और इन समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करते हैं। इन पुस्तकों का उद्देश्य ग़लतफ़हमियों को दूर करना, उग्रवाद और घृणास्पद विचारों को बाहर करना है।

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