मोबाइल जर्नलिज़म (MoJo) क्या है और इसे कैसे करें ?

स्किल , टैक्नोलोजी , इक्विपमेंट ये तीन बुनियादी चीज़ें हैं जिनके इर्द-गिर्द मोबाइल जर्नलिज़म का पहिया घूमता है

अशरफ अली बस्तवी, नई दिल्ली

 
हम जिस युग में जी रहे हैं आप उस को  आधुनिक यूग के नाम से तो जानते ही हैं आप उस का एक और नाम इधर कुछ वर्षों  से सुन रहे होंगे डिजिटल दौर भी कहा जा रहा है । डिजिटल दौर ने हमें जो सब से हैरत अंगेज़ चीज़ दी है वो स्मार्ट फ़ोन है ,स्मार्ट फ़ोन बहुत तेज़ी से हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन गया ,मोबाइल पर बिजली की रफ़्तार  से आने वाली सूचनाओं  ने पूरी दुनिया में इन्फ़ार्मेशन टैक्नोलोजी के मैदान में इन्क़िलाब बरपा कर दिया है । अब ये हर व्यक्ति के लिए बहुत आसान हो गया है कि वह  जिस  इन्फ़ार्मेशन को चाहे अपने पास सुरक्षित कर ले उसे फैलाए और उस  इन्फ़ार्मेशन का उपयोग करे ।

यहीं से मोबाइल जर्नलिज़म (MoJo) की शुरूआत होती है , मोबाइल जर्नलिज़म इन्फ़ार्मेशन की को लोगों तक पहुँचाने का एक ऐसा तेज़ तरीन मीडियम है जो लग भग मुफ़्त है , इस पर उपयोग  करने वाले का पूरा कंट्रोल होता है ,इसी लिए इसे सबसे ज़्यादा डेमोक्रेटिक  भी कहा जाता है एक और इसकी ख़ास बात यह है कि यह  अपने रीडर या देखने वाले से तत्काल जुड़ जाता है जिससे कोई भी आपके की किसी ख़बर या वीडीयो को देखते ही अपना कमेंट आप तक पहुँचा सकता है । मोबाइल जर्नलिज़म करने वाले पत्रकार  मोबाइल जर्नलिस्ट कहलाने लगे हैं.


मोबाइल जर्नलिज़म का इतिहास : सबसे पहले अमरीका के फ़्लोरीडा में 2005 मैं गनेट न्यूज़पेपर में मोबाइल जर्नलिज़म ने आँख खोली यहां के  रिपोर्टरों  ने मोबाइल से न्यूज़ जमा करना शुरू किया । भारत  में एन डी टीवी ने बाक़ायदा मोबाइल जर्नलिज़म का ऐलान किया और प्रोफ़ैशनल तरीक़े से उनके रिपोर्टर ये काम अंजाम दे रहे हैं.

मोबाइल जर्नलिज़म के फ़ायदे : यह  अभी बड़ी हद तक आज़ाद है , आसान और सुरक्षित  है। ऐसे स्थानों  तक उस की पहूंच होती है जहां तक पहूंच पाना आम तौर पर मुश्किल होता है । अक्सर ऐसा होता है जहां बड़े बड़े कैमरे की पहुंच  मुम्किन नहीं होती मोबाइल जर्नलिस्ट वहां से ख़बरें निकाल लाते हैं । बड़े कैमरे की जहां बहुत सी खूबियां हैं वहीं एक ख़ामी ये है कि उसे चलाने के लिए अलग से एक कैमरा परसन चाहिए जो फूटेज रिकार्ड करे , लेकिन मोबाइल से वीडीयो रिकार्ड करना काफ़ी आसान होता है । खासतौर से जब स्टोरी से सम्बंधित  जल्दी में किसी की बाईट लेनी हो तो ऐसे मौके  पर मोबाइल से आसानी  से रिकार्डिंग की जा सकती है । जैसा कि हम सभी जानते हैं कि जर्नलिज़म की घाटी जोखिम से भरी  होती है हर लम्हा आपको चैलेंजों का सामना होता है । ऐसे अवसर  पर ख़तरा और बढ़ जाता है  जब आप कोई आपदा आने के बाद मौके  पर रिपोर्टिंग के लिए पहूँचते हैं वहां ख़ुद को सँभालना और अपने कैमरे और दीगर सामान  सँभालना बहुत मुश्किल होता है , कुछ स्थानों  पर खुल्लम खुल्ला रिपोर्टिंग में दुशवारी होती है ऐसे में  मोबाइल से बड़ी आसानी से वीडीयो बनाई जा सकती है.

मोबाइल जर्नलिस्ट को किन किन बातों को ध्यान रखना चाहिए : जो खूबियां एक आम जर्नलिस्ट की होनी चाहिए वह सभी खूबियां मोबाइल जर्नलिस्ट की भी ज़रूरत है, बस मोबाइल जर्नलिस्ट को ज़रा ज़्यादा चौकन्ना रहना है और उसे हर समय  मैदान में निकलने के लिए तैयार रहना चाहिए । रिपोर्टिंग बैग में अपने साज़-ओ-सामान पूरी तरह तैयार रखें , हमेशा अपना मोबाइल रीचार्ज रखें , मोबाइल की मैमरी ख़ाली रखें , अलग से मैमरी कार्ड ज़रूर रखें , मज़बूत नैटवर्क का इंटरनैट आपकी बुनियादी ज़रूरत है। इसके अलावा  गनमाईक , कालर माईक , मोबाइल कनेक्टर के साथ ट्राई पोड , LED लाईट ,एक अलग से आडियो रिकार्डर अगर मुम्किन हो तो साथ रखें , यानी हर वक़त इस तरह तैयार रहें कि सूचना  मिलते ही मैदान में निकल जाएं । इसके अलावा  एक हैंडी ट्राई पोड  या सेल्फी स्टिक अपने साथ ज़रूर रखें.


आप मोबाइल जर्नलिस्ट हैं ? तो आपके लिए ये जानना बहुत ज़रूरी है कि आप अपनी स्टोरी कैसे बताएँगे ? जो कुछ आप रिकार्डिंग की शक्ल में फ़ोटो या वीडियो फूटेज हासिल करते हैं वह  एक कच्चा माल होता है उसी से ख़बर बनाने का काम होता है, मुमकिन है कि मैदान से आपको कोई अच्छा वीडियो मिल गया या किसी अहम शख़्स का इंटरव्यू लेकर आए हैं  लेकिन आप उस की महत्ता को समझ ही ना सके कि किस तरह उसे अपने दर्शकों  तक पहुँचाना है तो आपकी मेहनत बेकार गई । बेहद ज़रूरी है कि अपनी स्टोरी को समझें , उसके बग़ैर आपकी रिपोर्ट असरदार नहीं हो सकती बल्कि कभी कभी आपके प्रति दर्शक नकारात्मक इमेज  ले लेते हैं.

 Open Camera - Apps on Google Play
मोबाइल से वीडियो रिकार्डिंग : मोबाइल जर्नलिज़म के लिए आजकल बाज़ार में मौजूद  हर वो फ़ोन जो10 से15 हज़ार के रेंज में मिल रहा है सभी के कैमरे में मोबाइल जर्नलिज़म के लिए ज़रूरी फीचर्स मौजूद होते हैं जिनसे आप अच्छी वीडीयो रिकार्ड कर सकते हैं । इसके  अलावा  कई ऐसे वीडियो रिकार्डिंग App भी Google Play पर हैं जिनको अपने मोबाइल में इंस्टाल करके आप अच्छी वीडियो रिकार्ड कर सकते हैं । इस वक़्त मोबाइल जर्नलिज़म करने वाले MoJo Journalists सबसे ज़्यादा Open Camera App का उपयोग  करते हैं , इस कैमरे की ख़ूबी यह  है कि कैमरा वीडियो या फ़ोटो लेते वक़्त आब्जेक्ट पर रोशनी और अपरचर बहुत बेहतर ढंग से एडजस्ट कर लेता है , इस से आपको यह फ़ायदा  होता है कि मैदान में रिपोर्टिंग करते वक़्त कम रोशनी में ली गई वीडियो या फ़ोटो का रिज़ल्ट बेहतर आता है .

वीडियो रिकार्डिंग करते वक़्त अगर आप BOYA या किसी और कंपनी का कोई ऐक्सटर्नल माईक यूज़ करते हैं तो इस की सेटिंग में जाकर आडियो सेटिंग  में External Mic if Present'पर क्लिक कर दें इस से आपके वीडियो की आवाज़ बेहतर हो जाती है । क्योंकि किसी भी वीडियो के लिए अच्छी साफ सुथरी आवाज़ की बड़ी अहम् होती है । इस के अलावा FilMic Pro रिकार्डिंग App भी काफ़ी अच्छा माना जाता है जिसमें आडियो कंट्रोल , वीडियो फ्रेम  ,रैज़ोलीयूशन , शटर स्पीड , ज़ूम की अच्छी सहूलत है.

 Amazon.com: BOYA by-M1 Pro Lapel Microphone, Clip-on Lavalier Mic for  iPhone Adroid Smartphones, DSLR Camera Camcorders, Audio Recorders, PC  Laptop Recording: Home Audio & Theater
वीडियो रिकार्डिंग करते वक़्त ख़्याल रखें :  ख़्याल रहे रिकार्डिंग करते वक़्त मोबाइल को एरोप्लेन मोड में कर लें इस से रिकार्डिंग के दरमयान काल आने से आपकी वीडीयो रिकार्डिंग में ख़लल नहीं पड़ेगा और आप आसानी से अपना काम कर सकेंगे । जहां रिकार्डिंग कर रहे हैं वहां रोशनी का जायज़ा लें, जायज़ा लेने के बाद अपनी जगह बना लें कि कहाँ से आपको बेहतर एंगल मिल सकता है.

 
एक अच्छी वीडियो : अच्छी तरह रिकार्ड की गई वीडियो में आवाज़ बेहतर हो , रिकार्डिंग करते वक़्त उस का फ्रे़म और एंगल दरुस्त हो , वीडियो रिकार्ड करते वक़्त रोशनी का ख़्याल रखा गया हो, वीडियो में हलचल ना हो ,आस-पास की दूसरी आवाज़ें कंट्रोल की हद तक ही हों । ख़्याल रहे अच्छे विजुअल्स, शॉट्स , और बेहतर स्क्रिप्ट आपकी वीडीयो में जान डाल देते हैं. अपने साज़ो सामान  को अच्छी तरह चलाना जान लें एक मोबाइल जर्नलिस्ट को चाहिए कि वह अपने मोबाइल और दीगर साज़ो सामान  को अच्छी तरह जान ले , उसे अपने फ़ोन के ज़रूरी एप्लीकेशन को चलाने में महारत हो, आपको ये जानना बहुत ज़रूरी है कि जब किसी ख़बरको रिकार्ड करते वक़्त आप पर बेहद प्रैशर होगा तो उस वक़्त आप अपने मोबाइल को कितनी तेज़ी से और कैसे यूज़ करेंगे ?


अपना फ़ोन हमेशा पूरा चार्ज रखें : कहीं ऐसा ना हो कि जब आप ने  किसी अहम स्टोरी के लिए फ़ोन निकाला और आपकी बैट्री डाउन हुई पड़ी है ,ज़्यादा मुनासिब होगा कि हमेशा एक अच्छा पावर बैंक अपने साथ रखें जिसे निकलने से पहले चार्ज कर लें.


आपकी डिक्शनरी में डिलीट का ऑपशन नहीं होना चाहिए: आपको नहीं मालूम कि वीडियो एडिटिंग के मरहले में कब कहाँ क्या मसला पैदा हो जाए और वीडियो की फाईल करप्ट हो जाए इस लिए वीडियो की असल कापी जो आपने रिकार्ड की है उसे हरगिज़ डेलीट ना करें बल्कि उसे ड्राप बॉक्स या दूसरी ड्राईव में महफ़ूज़ रखें , जब तक वीडियो चैनल पर ब्रॉडकास्ट ना हो जाए उस वक़्त तक तो हर हाल में फाईल को सँभाल कर रखें । मोबाइल जर्नलिज़म में एक जर्नलिस्ट 'वन मैन आर्मी होता है यहां बहुत कम वक़्त और कम संसाधन  मैं स्टोरी लाना होता है , अक्सर अप के पास मौक़ा बहुत कम होता कि आप रिपोर्ट लेने के बाद अपने दफ़्तर या घर जाएं और वहां अपने कम्पयूटर पर अपनी वीडियो स्टोरी एडिट करें ,इसलिए मोबाइल जर्नलिस्ट के लिए यह  बेहद अहम है कि वह  मोबाइल पर एडिटिंग एप से एडिट करके ही अपलोड कर दें.

PowerDirector 365 Free Download - VideoHelp
मोबाइल फ़ोन एडिटिंग सॉफ्टवेर का यूज़ कैसे करें :  आपने रिपोर्टिंग के मैदान में जो वीडीयो रिकार्ड की है कभी कभी उसे वहीं एडिटिंग  करना और वहीं से ब्रॉडकास्ट करना पड़ सकता है मोबाइल जर्नलिज़म और ट्रेडिशनल जर्नलिज़म में यही बुनियादी फ़र्क़ है कि यहां कम वक़्त में तेज़ी के साथ नतीजे देने होते हैं इसलिए ज़्यादा बेहतर है कि आप मोबाइल एडिटिंग के किसी सॉफ्टवेर को अच्छी तरह सीख लें ,इस से आप में ग़ज़ब की कॉन्फिडेंस पैदा हो जायेगा  । एक अच्छा मोबाइल जर्नलिस्ट वही माना जाता है जो मोबाइल के सभी फीचर्स को अच्छी तरह चलाने की महारत रखता हो, जिसमें ये क़ाबलियत हो कि स्टोरी का आईडिया सोचे , मैदान में निकल पड़े स्टोरी रिकार्ड करे वहीं एडिट करे और वहीं से चैनल पर अपलोड कर दे. मोबाइल जर्नलिज़म की विभिन्न समस्याओं के   हल के लिए गूगल प्ले पर ऐसे कई मोबाइल एडिटिंग एप हैं जिन्हें अपने मोबाइल पर इंस्टाल करके वीडियो एडिटिंग कर सकते हैं । Power Director यह  बहुत अच्छा app है इसे  ख़रीद कर आप अपने वीडियो की अच्छी एडिटिंग कर सकते हैं, इसके अलावा  Kine Master वीडियो एडिटिंग का अच्छा app है.  इस से भी बहुत अच्छी एडिटिंग की जाती है । एक अच्छी वीडियो के लिए तमाम फ़ीचर इस app में हैं ।

हमने जाना कि एक मोबाइल जर्नलिस्ट को अपनी ख़बर के लिए सबसे पहले अच्छी प्लानिंग करनी ज़रूरी है , फिर अपनी स्टोरी के लिए रिसर्च करे ,पता लगाए कि स्टोरी के लिए कौन कौन चीज़ें ज़रूरी हो सकती हैं ,स्टोरी से सम्बंधित तमाम मालूमात जांच परख कर ले , फिर वीडियो शूटिंग के लिए निकले , शूटिंग के बाद उसे प्रोफेशनली एडिट करे.


आपका जनसंपर्क : जितना अच्छा जनसंपर्क होगा उतनी अच्छी स्टोरी मिलेगी , एक जर्नलिस्ट के लिए बहुत अहम कि उसका का जनसंपर्क मज़बूत हो जितना अच्छा राबिता होगा अहम ख़बरें मिलने का उतना ही ज़्यादा मौक़ा हाथ आएगा । आपके यही राबते आपको ब्रेकिंग स्टोरी दिलाएंगे , समाज में हर तरह के लोगों से संपर्क रखें , चलते फिरते जहां जितना मौक़ा हो ज़्यादा से ज़्यादा लोगों से बात करें उनके हाल जानने में दिलचस्पी रखें , हमेशा अलर्ट रहें आप जहां खड़े हैं स्टोरी आपके इर्दगिर्द ही कहीं है उसे देखने की कोशिश करें । अपने शहर या क़स्बे के अहम स्थानों  पर नौजवानों से संपर्क बनाएँ ख़बर तक पहूंचने में यह लोग आपके बहुत काम आएँगे .


तैयार करने के बाद अपनी स्टोरी को बार-बार चेक करें जर्नलिस्ट होने के नाते आप पर बड़ी ज़िम्मेदारी होती है कि कोई भी स्टोरी तैयार करने के बाद पब्लिश या ब्रॉडकास्ट करने से पहले स्टोरी के हर हिस्से को ध्यान से एक से अधिक  बार चेक कर लें  , देखें कि कहीं नाम , तारीख़ , गिनती , पता  और डेटा ग़लत तो नहीं हैं । स्टोरी को पब्लिश या ब्रॉडकास्ट करने से पहले  एक बार गौर से नज़र डालें फिर उसे जनता की अदालत में पेश करें.


मोबाइल जर्नलिज़म की चंद बुनियादी बातें : अगर मुझसे कहें कि मोबाइल जर्नलिज़म की चंद बुनियादी बातें क्या हैं तो मैं कहूँगा कि एक मोबाइल जर्नलिस्ट में जर्नलिज़म की स्किल और दिलचस्पी होना पहली शर्त है, दूसरा नंबर टैक्नोलोजी का आता है मोबाइल जर्नलिस्ट को टैक्नोलोजी की अच्छी जानकारी और उस पर गिरिफ़त और तीसरी बात मोबाइल जर्नलिस्ट होने के लाज़िमी शर्त है कि आपके पास ज़रूरी साजो सामान हों और आपको  उनका बेहतर इस्तिमाल आता हो । यानी स्किल , टैक्नोलोजी , इक्विपमेंट ये तीन बुनियादी चीज़ें हैं जिनके इर्द-गिर्द मोबाइल जर्नलिज़म का पहिया घूमता है.
नोट मज़मून निगार न्यूज़ पोर्टल एशिया टाईम्स के चीफ़ ऐडीटर हैं.

Asia Times TV – Page 2

          Ashraf Ali Bastavi 

नोट : लेखक एशिया टाइम्स के चीफ एडिटर हैं  

मोबाइल : 9891568632 , E-mail :ashrafbastavi@gmail.com

0 comments

Leave a Reply