अफ़ग़ानिस्तान क्या है?
इसमें कोई शक नहीं है कि भारत के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और जेनेटिक संबंध अफ़ग़ानिस्तान से उससे कहीं ज़्यादा हैं, जितने अमेरिका या यूरोप से हो सकते हैं।
यह वह सरज़मीन है जो कभी विशाल हिंदुस्तान का एक सूबा था। 1876 में ब्रिटिश सरकार ने इसे एक अलग देश बना दिया। जिन अफ़ग़ानियों ने या उनकी भारतीय नस्लों ने 1198 से लेकर 1857 तक दिल्ली को अपनी राजधानी बना कर इस पर अलग अलग वंशों के तहत शासन किया था, वे इससे अलग कर दिये गये।
यह वह सरज़मीन है जिसे ईरान से आकर आर्यों ने अपना घर बनाया और द्रविड़ों को सिंध तक धकेल दिया। यहीं ऋग्वेद की रचना हुई। यह उस सप्तसैंधव का दिल है जिसकी नदियों पर कई ऋचाएं समर्पित की गईं। यहां हरयू और हरिरुद नदियां बहती हैं जिन पर कुछ इतिहासकार श्रीराम की असल अयोध्या मानते हैं। भरत का ननिहाल कैकेय भी कहीं आसपास ही रहा होगा। ऐसा माना जाता है कि यहां की गांधारी महाभारत की महारानी बनी। तक्षशिला भी वहां से दूर नहीं जहां कभी अशोक का बनाया हुआ एक प्रसिद्ध विश्वविद्यालय था। बौद्ध कुशान राजाओं ने एक लंबे समय तक यहां से अपना साम्राज्य चलाया जिस की पूर्वी सीमा मगध को छूती थी। गांधार वह जगह है जहां बौद्धों ने यूनान से मूर्तिकला सीख कर उसे विकसित किया और शैव, वासुदेव-भक्तों और वैष्णवों को इसे अपनाने पर उभारा। हिंदुस्तान को जोड़ने के लिए शेरशाह सूरी ने जिस ग्रांट ट्रंक रोड़ को बनाया था, उसका एक सिरा आज के अफ़ग़ानिस्तान में ख़त्म होता था। 1857 की जंगे आज़ादी में यहां के हज़ारों लोगों ने अपनी क़ुर्बानियां दीं और बाद में भी यहां से उसे समर्थन मिलता रहा।
आज के भारत में लाखों करोड़ों लोग ऐसे होंगे जिनकी पुण्यभूभि अफ़ग़ानिस्तान को माना जा सकता है। अफ़ग़ानिस्तान में बसे लोगों और उत्तर भारत के लोगों के डीएनए में कई समानताएं हैं।
इसमें कोई शक नहीं है कि भारत के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और जेनेटिक संबंध अफ़ग़ानिस्तान से उससे कहीं ज़्यादा हैं, जितने अमेरिका या यूरोप से हो सकते हैं।
जिस तरह से मध्यकाल के शासन में 1876 से पहले के हिंदुस्तान में हर संस्कृति को मानने वाले लोग रहते थे और आज भी भारत में रहते हैं, उसी तरह से ठंडे दिल से अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को अपनी मनपसंद संस्कृति को अपनाने का हक़ देकर हम सोच सकते हैं कि अमेरिका और युरोप के नज़रिये पर आंख बंद करके चलने के बजाय हमें अपना एक अलग नज़रिया बना कर अपनी अफ़ग़ानिस्तान पोलिसी बनाना चाहिये। इसके लिए ज़रूरी है कि भारत अफ़ग़ानिस्तान को यह छूट दे कि वहां के लोग अपनी पसंद की शासन व्यवस्था क़ायम करें। अफ़ग़ानिस्तान से भारत के अच्छे संबंध भारत में शांति और विकास के लिए बहुत ज़रूरी हैं।
आख़िर में अखंड-भारत के समर्थकों से एक गुज़ारिश है। उन्हें संस्कृति और भूगोल में से किसी एक को चुनना चाहिये। अगर वे विशाल हिंदुस्तान का सपना देख रहे हैं तो यहां पर मौजूद हर संस्कृति का हक़ स्वीकार करना होगा। और अगर वे एक ख़ास संस्कृति को थोपने का विचार रखते हैं तो वे इस भौगोलिक अखंडता को भूल जाएं।

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