“हमें राष्ट्रवाद का मतलब मोदी और मोदी का मतलब राष्ट्र समझाया गया है”

लोगों को आज समझ नहीं आ रहा है मगर हमने देश में जिस व्यक्ति को एक जेनरेशन को संभालने की ज़िम्मेदारी सौंपी थी, उस व्यक्ति ने राजनीतिक साख के लिए इस देश की तीन पीढ़ियों को बर्बाद कर दिया।

आज 13-14 साल के लड़के भी कट्टर हो गए हैं। पढ़ाई-लिखाई से अलग गालियां देना और दूसरे को ट्रोल करना उनकी आदतों में शामिल हो गया है।

अब उनकी प्राथमिकता शिक्षा, रोज़गार और करियर नहीं‌ है, क्योंकि उन्हें कोई भी विचारधारा ठीक से सिखाई जा रही है। उन्हें संघ के आदर्श भी बताए नहीं गए। बस नफरत करना सिखाया गया है।

फेक न्यूज़ के सहारे उन्हें दंगाई बना दिया गया। उन्हें इतना कट्टर बना दिया गया कि वे सरकार से सवाल ना करके भाजपा समर्थक बनना बेहतर समझे।

आखिर युवा ट्रोल आर्मी क्यों बनते जा रहे हैं?

आज हालात ऐसे हो गए हैं कि सत्ता की शह पर युवाओं को देश की सुरक्षा के लिए देश की आर्मी बनाने के बजाय ट्रोल आर्मी बना दिया गया है। धार्मिक कट्टरता और एजेंडे को अमल में लाने के लिए उनके करियर से विपरीत उन्हें राजनीति का शिकार बना दिया।

जिस उम्र में मैट्रिक-इंटर वगैरह की तैयारी करनी है और करियर की जानकारी लेनी है, उस उम्र में उसे राष्ट्रवाद का कुतर्क ज्ञाता बना दिया गया।


आज इस उम्र के लड़के करियर के बारे में नहीं जानते लेकिन यह ज़रूर समझते हैं कि मोदी से बेहतर कोई नेता नहीं है।भाषा का ज्ञान नहीं है मगर राजनीतिक विश्लेषक बने दिन-रात फेक न्यूज़ को आधार बनाकर गाँव-मुहल्ले में फर्ज़ी देशभक्त बने फिर रहे हैं।

वे वाक्यांश जो नफरत परोसते हैं

उन्हें सिर्फ पांच वाक्य पता है-

  1. हिन्दू खतरे में हैं।
  2. आएगा मोदी ही।
  3. मोदी है तो मुमकिन है।
  4. मोदी का कोई विकल्प नहीं है।
  5. मोदी का जो विरोध करते हैं, वे सभी देशद्रोही हैं।

ट्रोल आर्मी की बुनियाद पर खड़ी है भाजपा की सत्ता

देश में ऐसे बहुत से लोग हैं जो मोदी के विरोध में हैं, जिन्हें गद्दार का नाम दिया जाता है। लगातार इस तरह की बातें की जाती हैं कि सिर्फ पाकिस्तान हमारा दुश्मन है। मुस्लमान आतंकवादी होता है वगैरह-वगैरह।

इन शब्दों के अलावा दुनिया के बाकी शब्दों से इन्हें कोई मतलब नहीं है और होगा भी कैसे? इस उम्र में इन्हें जो घुट्टी पिलाई जा रही है, इससे वे फेक न्यूज़ के आदी होते जा रहे हैं।


इतिहास याद करेगा कि इस देश में एक नेता इतना प्रभावशाली था जिसने युवाओं को मोह लिया था। जिसके प्रभाव में पूरा देश था मगर उस प्रभाव का इस्तेमाल उस नेता ने देश को विकसित करने में नहीं, बल्कि अपने समर्थकों को कट्टर बनाने में किया। युवाओं को हथियार बनाकर उन्हें रोज़गार से अलग अपना प्रचारक बना दिया।

राष्ट्रवाद के उदाहरण को बदल दिया गया

मोदी के समर्थन में जो कुछ भी जायज़-नाजाएज़ परोसा गया,‌ वह सोशल मीडिया द्वारा हिंदुस्तान की जवान नस्लों में पहुंचा दिया गया। रोज़ ऐसे फेक न्यूज़ के सहारे नौजवानों को आकर्षित किया गया जिसके सहारे जनमानस पर प्रभाव बढ़ता ही चला गया।

देश के युवा शिक्षा, चिकित्सा, करियर और ज़रूरी सवाल भूल गए, क्योंकि उनके कंधे पर ज़िम्मेदारी है देश बचाने की। उन्हें बताया गया है कि देश तभी बचेगा जब मोदी रहेंगे, क्योंकि मोदी हैं तो मुमकिन है।

अब रोज़गार की भूख से ज़्यादा यह पाठ ज़रूरी हो गया है। इस तरह देश की तीन जेनरेशन को मोदी ने अपने राजनीति की खातिर सत्ता में बने रहने के लिए इस्तेमाल किया।

जब भी कोई युवा शिक्षा, चिकित्सा, करियर और अन्य ज़रूरी विषयों पर बात करेगा, तब उस पर एक अजीब सा हमला होगा। हमला करने वालों में उसके परिवार के सदस्य से लेकर मित्र भी हो सकते हैं।

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