उर्दू हमारे लिये न केवल एक भाषा है बल्कि साझी ‎विरासत है/संजय धोतरे

नई शिक्षा नीति में उर्दू भाषा के विकास को विशेष महत्व दिया गया है

 

नए दिल्ली : (एशिया टाइम्स) राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 20 अगस्त को  कौंसिल की 25 वीं वार्षिक ऑनलाइन बैठक शिक्षा राज्य‎मंत्री  संजय धोतरे की अध्यक्षता में आयोजित की गई। अपने अध्यक्षीय भाषण में परिषद और निदेशक के ‎प्रदर्शन पर संतोष व्यक्त करते हुये उन्होंने कहा कि उर्दू हमारे लिये न केवल एक भाषा है बल्कि साझी ‎विरासत है।
हमें उर्दू भाषा देश के सभी नागरिकों तक पहुंचानी चाहिये और विशेष रूप् से आधुनिक ‎तकनीक का उपयोग इस भाषा के विकास और प्रगति के लिये किया जाना चाहिये। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र ‎मोदी जी भी अन्य भाषाओं के साथ साथ उर्दू भाषा के विकास और संर्वधन के लिए गंभीर है और ‎‎यही कारण है कि सरकार की तरफ से जो नई शिक्षा नीति बनाई गई है उसमें उर्दू भाषा के विकास का विशेष रूप् से ध्यान रखा गया है, क्योंकि उर्दू भारत की ऐसी भाषा है जिसके अधिकतर ‎‎शब्द इस देश की हर भाषा में पाये जाते हैं और स्वयं उर्दू में भी हिन्दुस्तान की अलग भाषाओं के शब्द ‎मिलते हैं।
परिषद के  के वाइस चेयरमैन, निदेशक डा॰ अकील अहमद व अन्य
इस नीति के तहत संविधान के आठवें अनुच्छेद में दर्ज उर्दू सहित सभी भाषाओं के विकास पर ‎‎ध्यान दिया जायेगा और इस उद्देश्य से अकादमियों का गठन किया जायेगा, इसके साथ ही उनके विकास ‎के लिये केन्द्र सरकार की तरफ़ से विशेष उपाय किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के बीच उर्दू भाषा ‎को लोकप्रिय बनाने की विशेष तौर पर आवश्यकता है। कोई ऐसा प्रबन्ध किया जाना चाहिये कि जो लोग ‎उर्दू लिपि और उर्दू शब्दों से अपरिचित है उनके लिये भी उर्दू के शब्दों का अर्थ समझना संभव हो सके। ‎उन्होंने एक विशेष उद्देश्य के तहत एक प्रभावकारी मैकानिज़म/तंत्र के गठन के निर्माण पर जोर दिया।
‎उन्होंने यह भी कहा कि उर्दू भाषा को शहरों के साथ गाँव गाँव तक ले जाने की आवयश्कता है और ‎हिन्दुस्तान के कुछ ऐसे गाँवों को चिन्हित किया जाना चाहिये जहां परिषद की ओर से उर्दू में आकर्षक ‎कार्यकर्मों का आयोजन किया जाये और वहां उर्दू भाषा के जानने और समझने वाले लोगों को प्रोत्साहित ‎करके उनमें उर्दू पढ़ने लिखने के लिये रूचि पैदा करने के साथ उर्दू से लगाव पैदा किया जाये। ‎उन्होंने यह भी कहा कि उर्दू के विकास के लिये शिक्षा मंत्रालय को नये सुझाव दिये जायें जिससे उर्दू भाषा ‎के तीव्र विकास के साथ उसके लिये नये संसाधन भी अपनाये जा सकें।

परिषद के उपाध्यक्ष प्रो॰ शाहिद अख़तर ने आभार व्यक्त करते हुये राज्य शिक्षा मंत्री श्री संजय ‎‎धोतरे जी के अध्यक्षीय भाषाण् के दौरान प्रस्तुत किये गये नये सुझाव का स्वागत किया और कहा कि परिषद ‎के सक्रिय निदेशक डा॰ अकील अहमद सभी सुझावों को अमल में लायेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र ‎मोदी जी का भी आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके शासनकाल में परिषद का बजट ‎दोगुने से भी अधिक हो गया है और निसंदेह वर्तमान सरकार उर्दू के विकास के लिये गंभीर है।

परिषद के निदेशक डा॰ अकील अहमद ने परिषद के कार्यसूची/एजेन्डा प्रस्तुत करने से पूर्व राज्य शिक्षा ‎मंत्री श्री संजय धोतरे जी, लोक सभा एम पी श्री जगदम्बिका पाल, हंसराज हंस और राज्य सभा एम पी श्री ‎मुजीबुल्लाह जी और सभी सदस्यों का स्वागत किया। निदेशक डा॰ अकील अहमद के द्वारा बैठक में प्रस्तुत ‎की गई कार्यसूची/एजेन्डा सर्वसम्मति से किया गया। इस अवसर पर डा॰ अकील अहमद ने सभी सदस्यों से ‎उर्दू भाषा के विकास के लिये सुझाव और मशवरे परिषद को लिखित रूप से भेजे जाने के लिये कहा ताकि गर्वनिंग बॉडी में उसको अनुमोदन के लिये ‎प्रस्तुत किया जा सके।

शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री संजय सिन्हा ने परिषद के उपाध्यक्ष प्रो॰ शाहिद अखतर निदेशक डा॰ ‎अकील अहमद और अन्य सदस्यों का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करते हुये शिक्षा मंत्रालय की ओर से सभी सदस्यों का स्वागत किया।

गवर्निंग कौंसिल के सदस्यों में राज्य सभा एम पी श्री मुजीबुल्ला ने अपने राज्य उड़ीया में उर्दू भाषा को ‎लोकप्रिय बनाने पर विशेष रूप से जोर दिया जबकि डा॰ ज़ाहिद तीमारपुरी ने हर राज्य में उर्दू अकादमी की स्थापना का ‎प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

 

0 comments

Leave a Reply