अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव-- 2020 ; कैसे तय होते हैं उम्मीदवार ?

कैनडिस याकोनो

अमेरिका में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के चयन के लिए राजनीतिक दल प्राइमरी और कॉकस का इस्तेमाल करते हैं।

अमेरिका के लोग प्रत्येक चार साल बाद नया राष्ट्रपति चुनने के लिए मतदान करते हैं। राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने वालों के बारे में अमेरिकी संविधान की शर्तें अपेक्षाकृत सरल हैं : ऐसे व्यक्ति को कम से कम 35 साल का होना चाहिए, उसे जन्मजात नागरिक और कम से कम 14 वर्षों तक अमेरिका का निवासी होना चाहिए। लेकिन संभावनाओं के सागर में अलग दिखने के लिए उम्मीदवारों के लिए मुख्य अंतर वह राजनीतिक पार्टी होगी, जिससे वे संबद्ध हैं।

कई अन्य देशों के विपरीत अमेरिका में दो बड़ी राजनीतिक पार्टियां हैं- रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी। हालांकि ग्रीन पार्टी ऑफ द युनाइटेड स्टेट्स और लिबर्टेरियन पार्टी जैसी कुछ अन्य राजनीतिक पार्टियां भी हैं, लेकिन ये इतने कम वोट हासिल कर पाती हैं कि राष्ट्रीय राजनीति में उनका कोई महत्व नहीं है।

अमेरिका में राष्ट्रपति बनने की दौड़ साल भर से भी अधिक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें प्रचार अभियान, विज्ञापन, बहस, उम्मीदवारों का चयन और चुनाव शामिल होते हैं। लेकिन इस प्रक्रिया के सबसे अहम कदमों में से एक है प्राइमरी चुनाव और कॉकस प्रक्रिया।

प्रत्येक राज्य और इलाके में नागरिकों के लिए प्राइमरी और कॉकस का आयोजन किया जाता है, ताकि आम चुनाव से पहले वे अपने उम्मीदवार का चुनाव कर सकें। कुछ राज्य ऐसे भी हैं, जो सिर्फ प्राइमरी चुनावों का ही आयोजन करते हैं, तो कुछ कॉकस का और अन्य दोनों का इस्तेमाल करते हैं। प्रक्रियाएं अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन प्राइमरी और कॉकस के चुनाव जनवरी से जून के बीच संपन्न करा लिए जाते हैं, नवंबर के आम चुनाव से पहले। प्राइमरी और कॉकस में मुख्य अंतर फंडिंग और संचालनका होता है। खास तौर से प्राइमरी के चुनाव राज्य सरकारें कराती हैं, जिसके तहत उन्हें मानदंड तय करने का अख्तियार हासिल हो जाता है। मसलन, चुनाव में कौन-कौन भाग ले सकता है। उदाहरण के तौर पर, कुछ राज्य प्राइमरी के चुनाव को सिर्फ रजिस्टर्ड पार्टी सदस्यों के लिए ही सीमित रखते हैं, कुछ राज्य गैर-पंजीकृत मतदाताओं को भी इसमें शिरकत करने की इजाजत देते हैं। कॉकस दरअसल राजनीतिक पार्टियों के पंजीकृत सदस्यों की बैठकें होती हैं, जिनका संचालन पार्टियां खुद करती हैं।

कॉकस प्रणाली की शुरुआत अमेरिका के राजनीतिक सिस्टम के आरंभिक वर्षों में यानी 18वीं शताब्दी में ही हो गई थी। इसका कई स्वरूपों में बहुत-से राजनीतिक विषयों से निपटने के लिए इस्तेमाल होता रहा है। उदाहरण के तौर पर, आयोवा स्थित ड्रेक यूनिवर्सिटी के राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर डेनिस गोल्डफोर्ड पीबीएस के साथ एक साक्षात्कार में बताते हैं कि आयोवा राज्य में कॉकस व्यवस्था न सिर्फ कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को अपने मनपसंद उम्मीदवार चुनने की अनुमति देती है, बल्कि वह उन विषयों पर बात करने की इजाजत भी देती है, जिनको राज्यस्तरीय पार्टी मंच के मुद्दों में शामिल किया जा सके।   

20वीं शताब्दी के शुरु में कॉकस सिस्टम के प्राइमरी सिस्टम में बदलने की शुरुआत हुई। वर्ष 2020 में अब कुछ ही राज्य कॉकस का आयोजन करते हैं।

प्राइमरी चुनावों में, जिसका फॉर्मेट आम चुनाव सरीखा ही है, मतदाता मतदान केंद्रों पर जाकर गोपनीय बैलेट पेपर के जरिए अपना चुनाव कर सकते हैं या फिर डाक के जरिये उस उम्मीदवार का चयन कर सकते हैं, जो उनकी निगाह में उनका प्रतिनिधि बनने लायक है। कुछ राज्य ‘ओपन’ प्राइमरी का आयोजन करते हैं, जिसका मतलब है कि मतदाता विकल्प में मौजूद किसी भी उम्मीदवार को वोट कर सकते हैं, चाहे वे किसी भी पार्टी से पंजीकृत हों। लेकिन ‘क्लोज्ड’ प्राइमरी वाले राज्यों में मतदाता सिर्फ अपनी पार्टी के उम्मीदवारों में से ही चयन कर सकते हैं। ओपन या क्लोज्ड प्राइमरी प्रक्रिया में अर्द्ध-खुले और अर्द्ध-बंद जैसे विकल्पों की विविधता भी है।    

प्राइमरी चुनाव राज्य और स्थानीय सरकारें कराती हैं, जबकि कॉकस निजी आयोजन हैं और इनका संचालन सीधे राजनीतिक पार्टियां करती हैं।

कॉकस मॉडल के इन-पर्सन मॉडल के तहत पार्टी द्वारा वोटरों के समूह को चर्चों या जिमखानों में बुलाया जाता है, ताकि चुनाव से पहले अपने पसंदीदा उम्मीदवार के चयन के लिए बहस की जा सके और उसके लिए जनमत तैयार किया जा सके। यह चयन गोपनीय बैलेट पेपर के जरिये हो सकता है या किसी खास उम्मीदवार के पक्ष में समूह में खड़े होकर भी किया जा सकता है, उसके बाद दूसरों से गुजारिश की जाती है कि वे भी उनका साथ दें।  

कॉकस के आयोजन वाले प्रत्येक राज्य में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट अपने नियम-कायदे खुद तय करते हैं। ये कायदे एक-दूसरे से काफी भिन्न हो सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, आयोवा में पंजीकृत रिपब्लिकन 1,000 से भी अधिक जगहों पर किसी रात एकत्र होते हैं, अपने पसंदीदा उम्मीदवार का नाम लिखकर देते हैं और राष्ट्रीय सम्मेलनों में भेजे जाने वाले प्रतिनिधिमंडल का चयन करते हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रक्रिया के तहत पंजीकृत पार्टी सदस्य इसी तरह समान जगहों पर जमा होते हैं, जहां उन्हें अपने पसंदीदा उम्मीदवार के आधार पर समूह में अलग-अलग होने को कहा जाता है। अनिर्णय की स्थिति वाले सदस्य भी अपना समूह बना सकते हैं। इसके बाद प्रत्येक समूह के सदस्यों की संख्या गिनी जाती है और जिस-जिस उम्मीदवार के पक्ष में कम से कम 15 प्रतिशत सदस्य पाए जाते हैं, उसे सक्षम या डेलीगेट पाने के लायक माना जाता है। इसके बाद 15 मिनट की एक अवधि होती है, जिसमें भागीदारों को फिर से सोचने और निर्णय बदलने का मौका दिया जाता है। इस दौरान सदस्य दूसरों को अपने समूह में आने के लिए मना सकते हैं। इस साल पार्टी का नियम कहता है कि सिर्फ अक्षम समूहों के सदस्य ही 15 मिनट वाली प्रक्रिया में अपना पाला बदल सकते हैं। वे किसी सक्षम समूह में शामिल हो सकते हैं या किसी ऐसे उम्मीदवार की मदद में जा सकते हैं, जो 15 प्रतिशत का कटऑफ छूने में पीछे रह गए। 15 प्रतिशत का कटऑफ पार करने वाले सभी उम्मीदवारों को आयोवा डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा तय फॉर्मूले के आधार पर डेलीगेट यानी प्रतिनिधि मिलेंगे। ये प्रतिनिधि पूरे राज्य के काउंटी सम्मेलनों में जाएंगे। बाद में आयोवा के राज्य-व्यापी सम्मेलनों में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के नेशनल कन्वेंशन के लिए प्रतिनिधि चुने जाते हैं। नेवाडा में डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों के कॉकस आयोवा की तरह की प्रक्रिया अपनाते हैं।

कॉकस में अमूमन प्राइमरी के मुकाबले कम भागीदारी देखने को मिलती है, और इनमें उन्हीं उम्मीदवारों को ज्यादातर समर्थन मिलता है, जो काफी मुखर होते हैं और जिनके मुखर समर्थक होते हैं। कई लोगों के लिए कॉकस तक पहुंच का सवाल भी उठता है। ये एक तय समय व जगह पर आयोजित होते हैं और कई घंटे तक जारी रह सकते हैं और चूंकि इनके भागीदारों से यह अपेक्षा की होती है कि वे सार्वजनिक रूप से अपने वोट जाहिर करें, ऐसे में मुमकिन है कि वोटर इनमें भागीदारी के लिए बहुत इच्छुक न हों। इसी कारण से वाशिंगटन, मिनेसोटा और कलैराडो जैसे राज्यों ने 2020 के राष्ट्रपति उम्मीदवारों के चयन के लिए कॉकस मॉडल से प्राइमरी मॉडल की ओर कदम बढ़ाया है।

अमेरिकी मतदाता पहले उम्मीदवारों के चयन के लिए वोट नहीं करते थे। इसके बजाय उम्मीदवार राष्ट्रपति चुनाव वाले साल की गर्मियों में आयोजित पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन में डेलीगेट द्वारा चुने जाते थे। ये सम्मेलन आज भी आयोजित होते हैं, मगर अपनी पूर्ववर्ती भूमिका के मुकाबले अब वे महज प्रतीकात्मक रह गए हैं। सम्मेलनों में राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार के चयन के साथ पार्टियां सिद्धांतों और लक्ष्यों का खाका भी तैयार करती हैं, जिसे प्लेटफॉर्म के रूप में जाना जाता है। राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार अपने साथ उप-राष्ट्रपति पद के लिए किसी साथी को चुनते हैं और आम चुनाव की प्रक्रिया का शुभारंभ हो जाता है।

कैनडिस याकोनो पत्रिकाओं और अखबारों के लिए लिखती हैं और सदर्न कैलिफ़ोर्निया में रहती हैं।

साभार : स्पैन  हिंदी,  के मार्च अप्रेल अंक से 


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