आज 15 जून की देश दुनिया की अहम ख़बरें
यूपी में बढ़ता हुआ कट्टरपंथ, मुस्लिम बुज़ुर्ग के साथ हुई मारपीट, लगवाए जय श्री राम के नारे
इंटरनेट पर एक वीडियो सामने आया है जिसमें कुछ गुंडे एक बुज़ुर्ग को पीट रहें हैं और उनके साथ गाली-गलौज कर रहे हैं। दरअसल यह घटना उत्तर-प्रदेश के लोनी की है जहां अब्दुल समद नाम के शख़्स के साथ 5 मई को मारपीट की गई।
अब्दुल समद नमाज़ पढ़ने जा रहे थे जब रास्ते में गुंडों ने उन्हें पकड़ लिया और ज़बरदस्ती एक कुटिया में ले गए। वहां उनके साथ मारपीट की गई।
अब्दुल समद का कहना है कि उन्हें जय श्री राम के नारे लगाने के लिए कहा गया। ऐसा न करने पर उनके साथ मारपीट की गई और उनकी दाढ़ी भी काट दी गई।
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ़्तार जामिया छात्र आसिफ़ इक़बाल तन्हा को ज़मानत दे दी है। आसिफ़ के साथ पिंजरा तोड़ की कार्यकर्ता नताशा नरवाल और देवंगना कलिता को भी ज़मानत दी गई है। ज़मानत की शर्त है कि तीनों को अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और मामले में बाधा डालने वाली गतिविधियों में भाग लेने से बचना होगा।
दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले का स्वागत करते हुए स्टूडेंट्स इसलामिक ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया ने कहा है कि हम आशा करते हैं कि जेल में बंद सभी राजनीतिक क़ैदियों की जल्द से जल्द रिहाई हो और दिल्ली दंगों के वास्तविक दोषियों का इंसाफ़ से सामना हो।
कुंभ मेले के दौरान श्रद्धालुओं की फर्जी कोरोना रिपोर्ट जारी करने का मामला सामने आया है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक ख़बर के मुताबिक़ कम से कम एक लाख लोगों ने कोविड की नक़ली रिपोर्ट जमा कराई है। एक मिसाल ऐसी सामने आई जहां एक ही फ़ोन नंबर का इस्तेमाल कर 50 से ज्यादा लोगों का रजिस्ट्रेशन किया गया, जबकि एक सिंगल यूज़ एंटीजन परीक्षण किट ने 700 नमूनों का परीक्षण किया गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के आरोप में तीन महीने से ज़्यादा जेल में बिताने के बाद नौशाद को रिहा कर दिया गया है। गृह मंत्रालय द्वारा नौशाद के खिलाफ एनएसए रद्द करने की सिफारिश के बाद 24 साल के नौशाद को 14 मई को बाइज़्ज़त बरी कर दिया गया।
नौशाद को मेरठ पुलिस ने 20 फरवरी को तब गिरफ्तार कर लिया था जब हिंदू जागरण मंच के स्थानीय प्रमुख सचिन सिरोही ने एक वायरल वीडियो के आधार पर नौशाद के ऊपर आटे में थूकने का आरोप लगाया था। आरोप था कि नौशाद आटे में थूक कर कोरोना फैला रहा है जिसके बाद उसपर एफ़आईआर दर्ज कर ली गई थी।
अब नज़र डालते हैं अंतर्राष्ट्रीय ख़बरों पर
अमरीकी मीडिया घरानों में काम करने वाले 500 से ज़्यादा पत्रकारों ने फ़िलिस्तीन पर होने वाली मीडिया रिपोर्टिंग पर खुला ख़त लिखा है। इस ख़त में पत्रकारों ने कहा है कि मीडिया का नैरेटिव इज़राईल की तरफ़ झुका हुआ है।
ख़त में कहा गया है कि फ़िलिस्तीन की रिपोर्टिंग में मीडिया इज़राईल के सैन्य क़ब्ज़े और भेदभाव को नज़रंदाज़ करती है, जबकि यह कहानी का सबसे ज़रूरी पहलू है। इस ख़त पर 514 पत्रकारों ने दस्तख़त किए हैं जिसमें वॉशिंगटन टाइम्स और वॉल स्ट्रीट जनरल जैसे मीडिया घरानों के पत्रकार भी शामिल हैं।
अफ़रीकी पत्रकारों ने अफ़रीकी युनियन व सरकारों से अपील की है कि वह इज़राइल की तरफ़ से पत्रकारों और मीडिया घरानों पर होने वाले हमलों की निंदा करें। पत्रकारों ने यह भी मांग की है कि गाजा पट्टी और फ़िलिस्तीन में दूसरी जगहों पर हमलों के दौरान मीडिया कर्मियों के साथ हुई ज़्यादती के लिए इजरायल को कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जाए।
अफ़रीकी सरकारों से अपील की गई है कि वह इज़राइली सरकार द्वारा किये जाने वाले मानवाधिकार उल्लंघनों की आलोचना कर “तारीख़ की सही तरफ़ खड़े रहें।”

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