‘हक मारी’ के खिलाफ दिल्ली में एक जुट हुए दलित व अल्पसंख्यक ; मिलकर किया सेमिनार

लोकतंत्र में हक हासिल करने के लिए अपनी सियासी ताक़त काम आती है /कलीमुल हाफीज़

 

नई दिल्ली : (एशिया टाइम्स ) अब हमें कोई दलित ना कहे हम को बहुसंख्यक कह कर पुकारा जाये , हम इस देश की सबसे बड़ी संख्या हैं . हम सब बहुसंख्यकों की हकमारी को रोकने के लिए और अपनी वाजिब हिस्से दारी के लिए आज यहाँ जमा हैं  .

यह और इस तरह के अन्य विचार 25 मार्च को  दिल्ली के Constitution Club के Annexe में आयोजित एक सेमिनार में व्यक्त किये गए .

सेमिनार में दो मुख्य मुद्दों पर बात केन्द्रित थी 2021 में जातिगत जन गणना और आउटसोर्सिंग एवं निजीकरण .

सेमीनार का आयोजन  We The People और PAIGAAM नामी संगठन ने किया था.

खुद को बहुसंख्यक बताने का दलित समाज का यह नारा बहुत पुराना है  बसपा के मुखिया कांशीराम ने यह नारा दिया था “ जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी ”  लेकिन 1993 में उत्तर प्रदेश में सत्ता में आने के बाद  मायावती ने अल्पसंख्यक समाज को खुद अपनी पार्टी में हाशिये पर डाल दिया था .    

इस सेमिनार के  वक्ताओं ने भारत में अपनी विकास यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए उन सभी वर्गों से जो शोषित हैं एक साथ आने की अपील की , दलित मुस्लिम एक जुट हों इस पर गुफ्तगू हुई .

इस अवसर पर AIMIM दिल्ली के  नव नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष कलीमुल हफीज़ ने कहा कि “ अगर दलित और अल्पसंख्यक एक साथ आजायें तो दिल्ली का निजाम बदल देंगे ,आप अपनी ताकत को जानें और समझें ,वह लोग जो नहीं चाहते कि आप मजबूत हों वह हमेशा आप को कमज़ोर होने का एहसास कराते रहते हैं .

उन्हों ने दिल्ली वालों के सामने  एक अहम आंकड़ा पेश किया ,  बताया  कि दिल्ली के 272  MCD वार्ड में 46 रिज़र्व हैं और इनमे 28 वार्ड मुस्लिम बाहुल्य हैं .

इस से साफ़ पता चलता है की पिछली सरकारों ने दिल्ली के मुसलमानों पर कितना  जुल्म किया है. इस लिए सभी समाज के  लोग जो सरकार की ज्यादती का शिकार हैं मिलकर अपने हक को हासिल करने की लड़ाई शुरू करें ,और याद रहे हक मांगने से नहीं मिलता उसे छीनना पड़ता है और लोकतंत्र में  अपनी सियासी ताक़त काम आती है .

 

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