दिल्ली और उसके आसपास लगभग 50 दिन में यह छठा भूकंप ; हल्का है पर हल्के में ना लें

मालिक अश्तर
दिल्ली और उसके आसपास के इलाक़े में लगभग 50 दिन में यह छठा भूकंप है. केवल इस महीने में ही ये चौथी बार है जब दिल्ली एनसीआर में धरती हिली है. डरा देने वाली बात यह है कि कश्मीर से दिल्ली, बिहार, बंगाल होते हुए सुंदरबन तक की पट्टी 'हाई डैमेज रिस्क ज़ोन' (अधिक क्षति की आशंका वाला ज़ोन) में पड़ती है. देश को भूकंप के 5 ज़ोन में बांटा गया है.
कश्मीर से हिमाचल, उत्तराखंड और दिल्ली होते हुए उत्तर बंगाल के रास्ते सुंदरबन जाने वाली पट्टी चौथे ज़ोन में है. चिंतित करने वाली बात यह है कि दिल्ली और उसके पड़ोस में (छोटे ही सही लेकिन) बहुत जल्दी जल्दी भूकंप आ रहे हैं. कल ही फरीदाबाद में ढाई तीव्रता का भूकंप आया. 15 मई को दिल्ली में 2.2 तीव्रता का भूकंप आया था. 10 मई को नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में 3.4 तीव्रता का भूकंप आया था. 12 अप्रैल को दिल्ली में साढ़े तीन तीव्रता का भूकंप आया था. 3 जून को 3.2 तीब्रता का भूकंप आया।

उसके अगले ही दिन 2.7 तीव्रता का भूकंप फिर आया. बहुत से भूगर्भ शास्त्री (ज्योलॉजिस्ट) मानते हैं कि एक के बाद एक हल्के भूकम्पों को बिल्कुल भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए. यह किसी बड़े भूकंप के फोरशॉक्स (पहले के झटके) हो सकते हैं. पिछले साल 19 अप्रैल के 'दा हिन्दू' में एक रिपोर्ट छपी थी जिसके अनुसार हिमालय का अध्यन करने वाले भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि हिमालय क्षेत्र के बीच में स्थित 600 किलोमीटर की पट्टी पर एक बेहद तीव्र भूकंप का ख़तरा हर समय मंडरा रहा है.
आईआईटी (मंडी) में हुए एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन में आये दुनिया के बड़े भू-वैज्ञानिकों ने भी इसकी आशंका जताई थी. रिपोर्ट के मुताबिक़ इस क्षेत्र में ज़मीन के अंदर एक बड़ा दबाव बन चुका है जो किसी ऐसे बड़े भूकंप की शक्ल में रिलीज़ हो सकता है जिसकी तीव्रता आठ से भी ज़्यादा हो.
वैसे कुछ एक्सपर्ट इसे नहीं मानते. यह तो तय है कि इतने फ्रीक्वेंटली भूकंप आना सामान्य नहीं है. यह पहलु भी नहीं भूलना चाहिए कि यह लगातार भूकंप किसी दूरदराज़ भूकंप के झटके नहीं हैं बल्कि इन सभी का केंद्र दिल्ली या उसके आस पड़ोस में ही है. वैसे भी हमारे शहर के ज़्यादातर हिस्सों की इमारतें बस यूँ समझिये किसी तरह खड़ी ही हैं.


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