बिहार पर बाढ़ का साया गहराया ; इस बार भी तबाही निश्चित है
ग़ज़नफ़र इकबाल
देश भर में 100 स्मार्ट सिटी बनाने की प्रधानमंत्री की जो परियोजना है उसमें मुजफ्फरपुर का भी चयन हो चुका है,डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर जमीनी कारवाई के लिये चयनित एजेंसी को जिम्मेदारी दे दी गई है,दक्षिण बिहार की राजधानी कहे जाने वाला यह शहर आर्थिक,शैक्षणिक और चिकित्सकीय क्षेत्र में काफी संपन्न है,
बूढी गंडक नदी किनारे बसा परंतु यह शहर नगर निगम,मेयर ,विधायक और निकाय जनप्रतिनिधियों के राजनैतिक कलह का भुक्त भोगी रहा है,
शहरवासी मूलभूत सुविधाओं से आज भी वंचित हैं,शहर के भौगोलिक संरचना और विकास में अब तक कोई खास परिवर्तन नही आया है,
कई बार तो अधिकारियों,नगरआयुकत और मेयर के बीच टकराव की स्थिति बन चुकी है,आपसी वाद -विवाद के चलते विकास कार्यों में बाधा बनी रहती है,टेंडर होने के बावजूद भी निगम के कार्यों में कोई न कोई अर्चन लगा ही रहता है,
इस बार भी शहर की स्थिति नारकीय बनी हुई है, बरसात शुरु होते ही जल जमाव की समस्या बनने लगी है,आवासीय कालोनियों और बाजारों में जल जमाव शुरु होने लगा है,
समय पर नालों की उराही नही हो पाई है,टूटे सडकों की मरम्मत भी नही हुई है,नालों और सडकों से अतिक्रमण भी पूरी तरह नही हट पाया है,ऐसी स्थिति में शहर में बाढ की स्तिथि बनी हुई है,पिछले साल भी बरसात के दिनों में शहरवासियों को भाड़ी मुसीबतों का सामना करना पडा था,कई जगहों पर तो नाव चल रहे थे.
निगम के मोटर से जलनिकासी की वयवस्था की गई थी , इसी वजह से पिछले विधानसभा चुनाव में जलजमाव मुख्य मुद्दा था। इस आधार पर तत्कालीन भाजपा विधायक सह-शहरी विकास मंत्री सुरेश शर्मा हार गए और उनकी जगह कांग्रेस उम्मीदवार विजेंद्र चौधरी ने ले ली। लेकिन इस साल भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
मानसून अपनी ताकत और परिमाण में प्रवेश कर चुका है और इसका विस्तार कर रहा है, दुर्भाग्य से इस बार मानसून संभावित तिथि से 15-20 दिन पहले आ गया है,बारिश लगातार हो रही है,जनता के विरोध से बचने के लिए नगर विधायक ,पूर्व विधायक,मेयर और नगरआयुकत एक दूसरे पर तोहमत लगाकर पल्ला झारने की कोशिश कर रहे हैं ,स्थानीय जनप्रतिनिधि और निगम अधिकारी अपनी अपनी जिम्मेदारियों से बचते हुए एक दूसरे पर तोहमत लगा रहे हैं, लेकिन यहां के लोग फिर से बुद्धिमानी से मतदान करेंगे.
वे नगर निगम में अपने कदाचार और प्रमुख सामान्य न्यूनतम कार्यक्रम की अनदेखी का बदला लेंगे। लोग हलफनामे, घोषणापत्र और नेताओं द्वारा किए गए वादों को याद रखते हैं। शुरुआती रुझान अच्छा नहीं लग रहा है, हमेशा की तरह तैयारियों की कमी नज़र आरही है,मतलब इस बार भी तबाही निश्चित है,

0 comments