अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में कोविड-19 वैक्सीन की भूमिका

 

न्यूयॉर्क : एस्ट्राजेन्का की बहुप्रतीक्षित कोरोना वेक्सीन का ट्रायल रोक दिया गया है। यह वैक्सीन की जल्द उपलब्धता की संभावनाओं को बहुत बड़ा झटका है। कल अमेरिकी शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखी गयी है।

अमेरिकी चुनाव में कोविड वैक्सीन को लेकर जंग शुरू हो गयी है। ट्रम्प चाहते हैं कि किसी भी स्थिति नागरिकों को यह वेक्सीन अक्टूबर अंत मे लगना शुरू हो जाए। इसके लिए वह तीसरे चरण के परिणामों की उपेक्षा करने तक को तैयार हैं। इसे ‘अक्टूबर सरप्राइज’ कहा जा रहा है इसे लांच करके ट्रम्प चुनाव जीतना चाहते हैं।

कल एक ओर बड़ी खबर आई लेकिन अफसोस उसकी अधिक चर्चा नही हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों से पहले अक्टूबर सरप्राइज के बतौर वैक्सीन लाने के दबाव को खारिज करते हुए नौ बिग फार्मा कंपनियों ने जॉइंट प्लेज जारी किया, उन्होंने इसमें कहा है कि जिन लोगों को वैक्सीन लगाया जाएगा, उनकी सेफ्टी सबसे ऊपर रहेगी। इन कम्पनियो में एस्ट्राजेनेका ओर मॉडर्ना भी शामिल हैं जो रेस में सबसे आगे हैं।

हम यहां भारत मे बैठे बैठे ये समझते हैं कि जैसे हमारे मोदी देश के सर्वेसर्वा हैं वैसा ही अमेरिका में ट्रम्प भी हैं लेकिन ऐसा नहीं है। मूल रूप से अमेरिका एक संघात्मक देश है, ट्रम्प चाहकर भी अपने क्षेत्र में मोदी जितने शक्तिशाली नहीं है।

3 नवम्बर से अमेरिका में चुनाव है, ट्रम्प रिपब्लिकन पार्टी से है जिसकी सबसे बड़ी फंडिंग मूलतः हथियारों से जुड़ी कंपनियां करती आई हैं। वही डेमोक्रेटिक पार्टी की सबसे बड़ी फंडिंग फार्मा बेस कंपनियों से आती है। ट्रम्प अमेरिका में फार्मा कम्पनियों पर दबाव बना रहे हैं। वह दवा कंपनियों पर दवा की कीमतों को काफी कम करने पर भी काम कर रहे हैं। साफ है कि फार्मा कंपनियों को ट्रम्प फूटी आंख नहीं सुहा रहे।

ट्रम्प के खिलाफ डेमोक्रेट पार्टी के राष्ट्रपति उम्मीदवार जो बिडेन ट्रम्प के विरुद्ध ताल ठोक रहे हैं। ट्रम्प राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार अभियान में बिडेन को फार्मा लॉबी के चहेते उम्मीदवार के रूप में विज्ञापनों में प्रस्तुत कर रहे हैं।

जो बिडेन जानते हैं कि यदि कोरोना वैक्सीन राष्ट्रपति चुनाव के पहले नागरिकों को लगना शुरू हो गयी तो ट्रम्प के दुबारा चुने जाने के चांस कई गुना बढ़ जाएंगे। 

चूंकि खबरें आ गयी हैं कि रूस और चीन वैक्सीन में अमेरिका से आगे निकल गए हैं इसलिए ट्रम्प पर भी वैक्सीन को लेकर बहुत दबाव है। लेकिन 9 दवा कंपनियों की कल की घोषणा ने बता दिया है कि वैक्सीन 'अक्टूबर सरप्राइज' नहीं होने जा रही है।

साफ है कि कोरोना अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाने जा रहा है और फार्मा कंपनियों खुलकर डेमोक्रेट के पक्ष आ गयी हैं। प्रश्न यह है कि अमेरिकी जनता क्या इस खेल को समझ रही है ? क्या कोरोना का पैनिक अमेरिकी चुनाव के कारण फैलाया गया है ? क्या आपको नही लगता कि नवम्बर में राष्ट्रपति चुनाव के बाद कोरोना अपने उतार पर होगा ?

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