शेख हसीना के तख्तापलट में शामिल पार्टी में फूट, चुनाव में कट्टरपंथियों से गठबंधन को लेकर कलह

बांग्लादेश में छात्रों के आंदोलन से बनी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) इन दिनों अंदरूनी कलह से जूझ रही है। यह वही पार्टी है, जो पिछले साल जुलाई में हुए आंदोलन के बाद बनी थी और जिसके चलते पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटना पड़ा था।

 

अब पार्टी में इस बात पर मतभेद हैं कि आने वाले राष्ट्रीय चुनाव में इस्लामी रूढ़िवादी पार्टी जमात-ए-इस्लामी से गठबंधन किया जाए या नहीं और सीटों का बंटवारा कैसे हो।

इन मतभेदों के बीच पार्टी की एक प्रमुख नेता तसनीम जारा ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने ऐलान किया है कि वह अब NCP की उम्मीदवार नहीं रहेंगी और अगले आम चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरेंगी। बांग्लादेश में चुनाव फरवरी में होने हैं।

तसनीम जारा ने फेसबुक पर पोस्ट कर कहा कि उनका सपना था कि वे किसी राजनीतिक पार्टी के मंच से संसद पहुंचें और अपने इलाके व देश की सेवा करें। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए उन्होंने किसी पार्टी या गठबंधन की उम्मीदवार बनकर चुनाव न लड़ने का फैसला किया है।

उन्होंने आगे लिखा कि मैंने लोगों से वादा किया था कि वे मैं लिए लड़ूंगी और देश में एक नई राजनीतिक संस्कृति बनाने की कोशिश करूंगी। हालात चाहे जैसे भी हों, मैं अपने वादे पर कायम रहूंगी। इसी वजह से वे ढाका-9 सीट से निर्दलीय चुनाव लडूंगी।

NCP के भीतर चल रही इस खींचतान से साफ है कि नई पार्टी अभी अपने रास्ते और रणनीति को लेकर पूरी तरह एकजुट नहीं हो पाई है। आने वाले चुनाव से पहले यह पार्टी के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है।

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नेपाल में PM पद के उम्मीदवार बने बालेन शाह, रैपर से नेता बने, फिलहाल काठमांडु के मेयर हैं

 

नेपाल की राजधानी काठमांडू के मेयर बालेन्द्र शाह को रविवार को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है। उन्हें बालेन शाह के नाम से जाना जाता है। बालेन शाह और नेपाल की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया।

नेपाल में 5 मार्च को चुनाव होने हैं। इसके लिए दोनों दलों के बीच रविवार को एक समझौता हुआ, जिसमें सात बातों में सहमति बनी है। बालेन शाह रैपर से नेता बने हैं।

बीबीसी नेपाली के मुताबिक, रात भर चली बातचीत के बाद यह समझौता हुआ। इसमें तय किया गया कि बालेन शाह चुनाव के बाद बनने वाले संसदीय दल के नेता होंगे और उन्हें प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाया जाएगा। वहीं, RSP के मौजूदा अध्यक्ष रवि लामिछाने अपनी ही पार्टी के अध्यक्ष बने रहेंगे।

इस समझौते में यह भी तय हुआ है कि बालेन का संगठन अब RSP में मिल जाएगा, लेकिन पार्टी का नाम, झंडा और चुनाव चिह्न वही रहेगा। यानी नई पार्टी का नाम भी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ही होगा।

बालेन शाह इससे पहले निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर काठमांडू के मेयर चुने गए थे। तब उन्होंने किसी पार्टी से जुड़ने की बात साफ तौर पर नहीं कही थी। लेकिन अब पहली बार वे किसी पार्टी के साथ मिलकर राष्ट्रीय राजनीति में उतर रहे हैं।

समझौते के मुताबिक, बालेन और उनकी टीम RSP के चुनाव चिह्न पर ही चुनाव लड़ेंगे। पार्टी को संसद में पहले से अच्छी मौजूदगी हासिल है और वह भंग हो चुकी संसद में चौथी सबसे बड़ी पार्टी थी।

पाकिस्तान ने अपनी ही सेना के पूर्व मेजर को आतंकी घोषित किया, उनके लंदन वाले घर में तोड़फोड़ की गई

 

पाकिस्तान सरकार ने अपनी ही सेना के पूर्व मेजर आदिल रजा को आतंकवादी घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद आदिल रजा ने कहा है कि उनके खिलाफ विदेश में रहते हुए दबाव बनाने की कोशिश हो रही है।

आदिल रजा इस समय ब्रिटेन में रहते हैं। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले लंदन के पास उनके घर में कुछ अज्ञात लोग घुस आए। घर में तोड़फोड़ की गई और सामान इधर-उधर फैला दिया गया। अच्छी बात यह रही कि उस वक्त घर में कोई नहीं था, इसलिए किसी को चोट नहीं लगी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी।

आदिल रजा का कहना है कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। यह सब सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि वे अपनी पत्रकारिता के जरिए सरकार और ताकतवर लोगों के खिलाफ बोलते रहे हैं।

आदिल रजा ने साफ कहा कि इस तरह के दबाव से वे डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें चुप कराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन कोई भी उत्पीड़न उनकी आवाज नहीं रोक सकता। वे आगे भी लोकतंत्र, बोलने की आजादी और आम लोगों के हक में अपनी बात उठाते रहेंगे।

आदिल रजा ने कहा कि वह और उनका परिवार सुरक्षित हैं, लेकिन यह घटना उन्हें परेशान करने वाली लगी। उन्होंने बताया कि इससे कुछ ही समय पहले इमरान खान के करीबी माने जाने वाले शहजाद अकबर पर भी कैंब्रिज में हमला हुआ था। उनका कहना है कि इन घटनाओं से लगता है कि ब्रिटेन में रह रहे पाकिस्तान सरकार के आलोचकों को डराने की कोशिश हो रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सरकार पहले उन्हें यूके से वापस लाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन जब उसमें नाकाम रही तो अब उन्हें आतंकवादी घोषित कर दिया गया और उनके परिवार को निशाना बनाया गया।

बांग्लादेश की पूर्व PM खालिदा जिया की हालत नाजुक, डॉक्टर ने कहा - खालिदा 18 दिन से वेंटिलेटर पर

 

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की हालत अब भी बहुत गंभीर बनी हुई है। बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक, उनके निजी डॉक्टर डॉ. जाहिद हुसैन ने बताया है कि उनकी सेहत में अब तक कोई सुधार नहीं हुआ है।

80 साल की खालिदा जिया को 23 नवंबर को ढाका के एवरकेयर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें पहले से ही कई बीमारियां हैं, जिनमें डायबिटीज, किडनी की परेशानी, दिल और फेफड़ों से जुड़ी दिक्कतें शामिल हैं। अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत और ज्यादा बिगड़ गई।

डॉक्टरों ने उनकी हालत को देखते हुए उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया और फिर 11 दिसंबर से उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है, ताकि सांस लेने में मदद मिल सके। इस समय बांग्लादेश और विदेश से आए डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनका इलाज कर रही है।

खालिदा जिया के बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान भी अपनी मां से मिलने अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने 25 दिसंबर को खालिदा जिया से मुलाकात की। तारिक हाल ही में 17 साल के निर्वासन के बाद लंदन से बांग्लादेश लौटे हैं।

इसके बाद 27 दिसंबर को भी तारिक रहमान अस्पताल पहुंचे और करीब दो घंटे से ज्यादा समय तक वहीं रहे। इस दौरान वे डॉक्टरों से मां की हालत के बारे में जानकारी लेते रहे।

तारिक रहमान की पत्नी डॉ. जुबैदा रहमान भी डॉक्टर हैं और वे खालिदा जिया के इलाज से जुड़े मेडिकल बोर्ड की बैठकों में हिस्सा ले रही हैं, ताकि इलाज में हर संभव मदद मिल सके।

ब्रिटेन में इमरान समर्थक महिला ने आसिम मुनीर को मारने की धमकी दी, पाकिस्तान ने ब्रिटिश राजदूत को तलब किया

 

ब्रिटेन के ब्रैडफोर्ड शहर में एक रैली को दौरान पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की समर्थक महिला ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर को मारने की धमकी दी। इसके बाद पाकिस्तान ने ब्रिटेन से कड़ी नाराज़गी जताते हुए वहां के डिप्टी हाई कमिश्नर को तलब किया है।

वीडियो में महिला पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को कार बम से मारने की बात करती नजर आती है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने डिप्टी हाई कमिश्नर मैट कैनेल से कहा है कि इस महिला के खिलाफ जांच की जाए और सख्त कार्रवाई हो। पाकिस्तान का कहना है कि इस तरह की बातें बेहद गंभीर हैं।

इमरान खान इस समय जेल में हैं। उन्हें अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए प्रधानमंत्री पद से हटाया गया था। इसके बाद भ्रष्टाचार के एक मामले में उन्हें सजा हुई और वे करीब दो साल से जेल में बंद हैं। इसके बावजूद उनके समर्थक आज भी उनके साथ हैं।

यह रैली ऐसे समय में हुई, जब कुछ दिन पहले ही एक अदालत ने इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को सरकारी तोहफों के गलत इस्तेमाल के मामले में 17 साल की जेल की सजा सुनाई थी।

इस रैली का वीडियो इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की ब्रिटेन यूनिट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर डाला था, जिसे बाद में हटा लिया गया।

पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने कहा कि इमरान खान की पार्टी अपने समर्थकों को सेना के खिलाफ भड़का रही है और रैली में कार बम की धमकी देना सारी हदें पार करना है। उन्होंने कहा कि यह बोलने की आजादी नहीं है और ब्रिटेन को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।

वहीं, इस्लामाबाद में ब्रिटेन के हाई कमीशन ने कहा है कि अगर किसी देश को लगता है कि कोई अपराध हुआ है, तो वह सबूत ब्रिटिश पुलिस को दे सकता है। अगर मामला कानून के खिलाफ पाया गया, तो जांच की जाएगी।

पिछले कुछ समय से इमरान खान की पार्टी और पाकिस्तानी सेना के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। हाल ही में सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने इमरान खान को 'मानसिक रूप से बीमार' कहा था। इसके जवाब में इमरान खान के सोशल मीडिया अकाउंट से आसिम मुनीर को 'मानसिक रूप से अस्थिर' बताया गया था।

म्यांमार में पांच साल बाद आम चुनाव शुरू, तीन चरणों में आयोजित होगा; लोग बोले- ये चुनाव दिखावटी

 

म्यांमार में रविवार को पांच साल बाद पहली बार आम चुनाव की शुरुआत हुई। यह देश के कई हिस्सों में चल रहे गृहयुद्ध के बीच सेना की निगरानी में हो रहा है।

चुनाव तीन चरणों में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें पहला चरण 28 दिसंबर को 102 टाउनशिप्स में हुआ, दूसरा चरण 11 जनवरी को और तीसरा 25 जनवरी को होगा। नतीजे जनवरी के अंत तक आने की उम्मीद है।

यांगून जैसे बड़े शहरों, राजधानी नायप्यिताव और अन्य जगहों पर स्कूलों, सरकारी इमारतों और धार्मिक स्थलों को मतदान केंद्र बनाया गया है। इस बार पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

शनिवार को यांगून में सुरक्षा व्यवस्था काफी सख्त कर दी गई। मतदान केंद्रों के बाहर हथियारबंद गार्ड तैनात थे और सड़कों पर सेना के ट्रक गश्त लगा रहे थे। हालांकि विपक्षी संगठनों और सशस्त्र प्रतिरोध समूहों ने चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने की धमकी दी थी, लेकिन कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह चुनाव सेना के शासन को लोकतंत्र का मुखौटा पहनाने के लिए आयोजित किया जा रहा है। फरवरी 2021 में सेना ने नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची की निर्वाचित सरकार को तख्तापलट कर सत्ता हथिया ली थी।

सू ची की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) ने 2020 के चुनाव में भारी जीत हासिल की थी, लेकिन सेना ने उसे दूसरा कार्यकाल नहीं करने दिया। अब सू ची 80 साल की उम्र में राजनीतिक आरोपों में 27 साल की जेल काट रही हैं।

उनकी पार्टी को 2023 में सेना के नए नियमों के तहत रजिस्टर न करने पर भंग कर दिया गया। कई अन्य पार्टियां भी अनुचित शर्तों के कारण चुनाव में हिस्सा नहीं ले रही हैं या रजिस्ट्रेशन से इनकार कर दिया है। विपक्षी समूहों ने मतदान का बहिष्कार करने की अपील की है।

एशियन नेटवर्क फॉर फ्री इलेक्शंस के अनुसार, 2020 में 73 प्रतिशत मतदाताओं ने ऐसी पार्टियों को वोट दिया था जो अब अस्तित्व में नहीं हैं। सेना समर्थित यूनियन सॉलिडेरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी (यूएसडीपी) की जीत तय मानी जा रही है।

नए चुनाव कानून के तहत चुनाव की आलोचना पर कड़ी सजा का प्रावधान है, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूरी तरह दबा दी गई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा है कि देश में हिंसा और धमकियों का माहौल है, जहां अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा की आजादी के लिए कोई जगह नहीं है।

2021 के तख्तापलट के बाद प्रदर्शन शुरू हुआ, जो अब पूर्ण गृहयुद्ध का रूप ले चुका है। सहायता संघ के अनुसार, तख्तापलट के बाद से 22,000 से ज्यादा लोग राजनीतिक कारणों से जेल में हैं और सुरक्षा बलों ने 7,600 से अधिक नागरिकों की हत्या की है।

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, गृहयुद्ध से 36 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं।

मध्य अमेरिकी देश ग्वाटेमाला में बस खाई में गिरी; 15 की मौत, 19 घायल

मध्य अमेरिकी देश ग्वाटेमाला के पश्चिमी हिस्से में सड़क हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 19 लोग घायल हो गए। यह हादसा इंटर-अमेरिकन हाईवे पर हुआ, जहां एक यात्री बस गहरी खाई में जा गिरी।

फायर ब्रिगेड के प्रवक्ता लियान्द्रो अमाडो ने बताया कि मरने वालों में 11 पुरुष, 3 महिलाएं और एक नाबालिग शामिल है। घायलों को आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

 

 

 

courtesy:www.bhaskar.com

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