तालिबान विदेश मंत्री के भारत दौरे और भव्य स्वागत पर मोदी सरकार की आलोचना बढ़ी — मोहम्मद अदीब बोले, “जो कल तक आतंकी थे, आज रेड कार्पेट मेहमान!”

नई दिल्ली:इंडियन मुस्लिम्स फॉर सिविल राइट्स (IMCR) के चेयरमैन और पूर्व राज्य सभा सांसद मोहम्मद अदीब ने अफगानिस्तान की अमारात-ए-इस्लामिया के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी के भारत दौरे पर मोदी सरकार को कड़ी आलोचना का निशाना बनाया है। उन्होंने कहा कि “यह वही सरकार है जो कल तक तालिबान को ‘आतंकवादी’ और ‘मानवता विरोधी’ कहती थी, लेकिन आज उसी तालिबान नेता के लिए दिल्ली में रेड कार्पेट बिछाया जा रहा है।”


मोहम्मद अदीब ने अपने बयान में कहा कि मोदी सरकार और उससे जुड़ी संस्थाएं वर्षों से तालिबान का नाम लेकर भारतीय मुसलमानों को निशाना बनाती रही हैं। कई मुस्लिम युवाओं को केवल इस शक के आधार पर गिरफ्तार किया गया कि वो तालिबान के समर्थक हैं। उन्होंने सवाल उठाया, “जब वही तालिबान अब भारत सरकार के मेहमान हैं, तो क्या उन निर्दोष युवाओं के साथ हुई नाइंसाफी का अब कोई हिसाब लिया जाएगा?”


उन्होंने आगे कहा कि यह भारत की विदेश नीति की “दोहरी तस्वीर” है — एक ओर देश के अंदर मुसलमानों को तालिबान से जोड़कर बदनाम किया जाता है, और दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हीं तालिबान नेताओं से हाथ मिलाया जा रहा है। मोहम्मद अदीब ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह स्पष्ट करे कि उसकी विदेश नीति और उसके नैतिक मानदंड आखिर क्या हैं।
दारुल उलूम देवबंद में विदेश मंत्री मुत्तकी की यात्रा पर प्रतिक्रिया देते हुए अदीब ने कहा कि “उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद विधानसभा में अक्सर तालिबान समर्थकों को ‘तालिबानी’ कहकर निशाना बनाते रहे हैं, विपक्षी नेताओं को तालिबानी बता कर खिल्ली उड़ाई, मगर आज उन्हीं के प्रशासन के अफसर और पुलिस अधिकारी अमीर खान मुत्तकी के स्वागत में आगे आगे हैं।”


दिल्ली में अमीर खान मुत्तकी की प्रेस कॉन्फ्रेंस से महिला पत्रकारों को बाहर निकालने की घटना पर भी मोहम्मद अदीब ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “यह अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला है। मोदी सरकार का यह दोहरा चरित्र है — एक ओर ‘फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन’ की बातें, और दूसरी ओर महिला पत्रकारों को दरवाजे से बाहर करना।”


मोहम्मद अदीब के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना न केवल सरकार की विदेश नीति में विरोधाभास को उजागर करती है, बल्कि मोदी सरकार के मुस्लिम-विरोधी नैरेटिव की भी पोल खोल देती है।

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