नायब तहसीलदार पद पर चयनित तनवीर अहमद ने एशिया टाइम्स से कहा पिता के हर क़दम पर हौसला बढ़ाए रखने की बदौलत मिली कामयाबी

तनवीर UPPCS की परीक्षा पास कर नायब तहसीलदार बन गए हैं , उन्हों ने कहा नतीजे के दबाव में तैय्यारी को बोझ न बनाएं बल्कि उसे एन्जॉय करें

 

नई दिल्ली / बाघनगर : ( खास मुलाक़ात  ) उर्दू के किसी शायर ने क्या खूब कहा है  ‘क़दम चूम लेती है खुद बढ़कर मंजिल .मुसाफिर अगर अपनी हिम्मत न हारे.  यह शेर शत प्रतिशत सच साबित कर दिखाया है  पूर्वी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम बाहुल्य शेत्र तप्पा  उजियार के एक छोटे से कस्बे बाघनगर के  नौनिहाल  तनवीर अहमद  ने . तनवीर उत्तर प्रदेश की UPPCs की परीक्षा पास कर नायब तहसीलदार बन गए हैं . तनवीर 2014 में AMU से B Tech करने के बाद  TCS में जॉब करने लगे थे  लेकिन अपने सपने से एक लम्हे के लिए भी विचलित नहीं हुए .

खास बात यह है कि उन्हों ने यह कामयाबी  TCS में अपनी जॉब करने  के साथ साथ  बिना किसी कोचिंग के तैय्यारी करते हुए हासिल की है . तनवीर अहमद इस कामयाबी का श्रेय अपने  परिवार खास तौर से अपने पिता डॉक्टर शकील खान को देते हैं , डॉक्टर शकील खान ‘जीवन विकास संसथान’ के चेयरमैन हैं, एक प्रखर समाज सेवी एवं एक्टिव पॉलिटिशियन हैं .

एशिया टाइम्स  के चीफ एडिटर अशरफ बस्तवी ने तनवीर अहमद से राबिता किया और उनकी कामयाबी पर उनको और उनके परिवार को मुबारकबाद दी और इस अवसर पर उन से उनके इस सफ़र के बारे में जानने की कोशिश की तनवीर अहमद ने एशिया टाइम्स से अपने विचार साझा किये.

एशिया टाइम्स  : सबसे पहले तो आप को ढेरों बधाई कि आप ने अपनी इस कामयाबी से न सिर्फ अपने अपरिवर का बल्कि अपने शेत्र तप्पा उजियार का नाम रोशन किया  है , यवाओं के लिए एक मिसाल कायम की है  ,अपनी इस कामयाबी पर क्या कहेंगे और इस कामयाबी का श्रेय किसे देंगे ?

तनवीर अहमद : इस तरह की प्रतियोगी परीक्षा में तैय्यारी में आप के परिवार का  Background कैसा है यह काफी अहम होता है, आप जिस परिवार से आते हैं अगर उसमे पहले से लिखने पढने का माहौल हो तो बहुत कुछ  आसान होता है . जिन बच्चोंको ऐसा माहौल नहीं मिलता वह बहुत बाद में प्रतियोगी परीक्षा के बारे में जान और समझ पाते हैं इस बारे में  मैं बहुत खुशकिस्मत हूँ कि मेरे पिता इस सफ़र में पहले दिन से मेरे साथ  खड़े  रहे ,मेरे लिए सबसे बड़े मोटिवेशन का स्रोत रहे हैं उन्हों ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया .

एशिया टाइम्स  : इस सफ़र में हौसला बनाये रखना एक बड़ा चैलेंज होता है  क्या आप को भी इसका सामना करना पड़ा ?

तनवीर अहमद :  जी हाँ ! किसी भी प्रतियोगी परीक्षा का सफ़र लम्बा हो सकता है इस में हौसला बनाये रखना ही असल काम होता है ,कभी कभी आप कामयाबी के बहुत करीब पहुंच जाते हैं लेकिन फिर भी कामयाबी हाथ नहीं आती ऐसे मौके पर दोबारा जज़बे की ताजगी बनाये रखने के लिए खुद को तैयार करना बेहद अहम होता है यही कामयाबी की कुंजी है .

एशिया टाइम्स :  तैय्यारी करने वाले उन दोस्तों से क्या कहेंगे जिनका इस बार कामयाब लोगों की लिस्ट में  नाम नहीं आ सका ?

तनवीर अहमद : मैं अपने तैय्यारी करने वाले सभी दोस्तों से कहूँगा कि नतीजे के दबाव में तैय्यारी को बोझ न बनाएं बल्कि उसे एन्जॉय करें , क्योंकि इस सफ़र में बार बार नाकामी आती है उसका सामना करने के लिए तैयार रहें .

एशिया टाइम्स  ने   ख़ुशी के इस अवसर पर तनवीर अहमद के पिता डॉक्टर शकील खान से भी बात की और यह जानना चाहा कि बेटे की इस कामयाबी पर उनका क्या कहना है ?

डॉक्टर शकील खान : अपने सपनों को साकार करने में तनवीर की लगन और मेहनत का बड़ा दखल है . मैंने कुछ नहीं किया  बस उनके इस सफ़र में उन्हें  सिर्फ हौसला दिया है .

सही मायनों में  हम माता पिता का काम बच्चों को सिर्फ हौसला देने का ही है . मेरा बस इतना कहना  हैं कि सभी माता पिता अपने बच्चों पर भरोसा रखें उनके साथ खड़े रहें ,दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं जिसे हासिल ना किया जा सके  .

बेशक तनवीर अहमद  की यह कामयाबी तप्पा उजियार के हर उस नौजवान की कामयाबी है जो अपना सपना रखता है और उसे पूरा करने के लिए कोशिश कर रहा है . इतिहास गवाह है कि हमेशा कामयाबी उन्ही के हिस्से में आती है जो गिर कर संभलना जानते हैं और जो सपने रात में नहीं देखते बल्कि दिन में देखते हैं और फिर ये  सपने उन्हें रात को सोने नहीं देते  तनवीर भी उन्ही भाग्यशाली यवाओं में से एक हैं TCS की जॉब का दबाव उनके सपनो को दबा नहीं सका . हम उनके उज्ज्वल भविष्यकी दुआ करते हैं .



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