तमिल नाडू के मुख्यमंत्री का बयान, वापिस लिए जायेंगे प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले
विधानसभा सत्र के आख़री दिन घोषणा करते हुए स्टालिन ने कहा कि यह मामले अभिव्यक्ति की आज़ादी को बचाने के इरादे से वापिस लिये जा रहे हैं
तमिल नाडू के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने घोषणा की है कि राज्य में प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मामले वापिस लिये जाएंगे। पिछली सरकार ने सीएए और कृषि कानूनों का विरोध करने वालों पर केस दर्ज किया था। इसके अलावा चेन्नई-सलेम एक्सप्रेसवे, कुडानकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट, हाइड्रोकार्बन एक्सट्रैक्शन प्रोजेक्ट्स का विरोध करने वालों पर भी केस दर्ज किये गए थे।
विधानसभा सत्र के आख़री दिन घोषणा करते हुए स्टालिन ने कहा कि यह मामले अभिव्यक्ति की आज़ादी को बचाने के इरादे से वापिस लिये जा रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सिर्फ़ सलेम-चेन्नई एक्स्प्रेसवे मामले में प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ 10,000 से भी ज़्यादा मामले दर्ज किये गए थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हाइवे बनाने के लिए उनकी ज़मीन पर जबरन क़ब्ज़ा किया गया है।
मामले पर बात करते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा के राज्य सचिव ए चंद्रमोहन ने कहा, “हम इस फ़ैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन यह काफ़ी नहीं है। ज़मीन अधिग्रहण मामले में तमिल नाडू राजस्व विभाग के पास अधिकार हैं। उसके समर्थन के बिना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इस काम को अंजाम नहीं दे सकती।”
चंद्रमोहन की मांग है कि विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया जाए ताकि केंद्र सरकार इस परियोजना को रद्द करे।

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