सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान , पूछा मुफ़्त ज़मीन लेने वाले प्राइवेट अस्पताल मुफ़्त इलाज क्यों नहीं कर सकते

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से पूछा कि जिन निजी अस्पतालों को मुफ़्त जम़ीन दी गई है वो कोरोना वायरस मरीज़ों का मुफ़्त या मामूली फ़ीस में इलाज क्यों नहीं कर सकते.

 
कोर्ट ने केंद्र सरकार से एक सप्ताह के अंदर जवाब मांगा है और कहा है कि जो अस्पताल मरीज़ों का मुफ़्त या मामूली फ़ीस में इलाज कर सकते हैं उनकी पहचान की जाए.

 
सचिन जैन नामक व्यक्ति की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा था. इस याचिका में मांग की गई थी कि कोविड-19 मरीज़ों के लिए मुफ़्त या बहुत ही मामूली क़ीमत पर इलाज के लिए दिशानिर्देश जारी किए जाएं.


मुख्य न्यायाधीश एस.ए बोबड़े की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय पीठ ने इस पर सुनवाई की और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से एक सप्ताह के अंदर विस्तृत रिपोर्ट की मांग की.


सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा,“निजी अस्पतालों को जब मुफ़्त में ज़मीन दी जा सकती है तो वे कोविड-19 मरीज़ों का मुफ़्त इलाज क्यों नहीं कर सकते. उन्हें मुफ़्त में या बेहद मामूली क़ीमत पर ज़मीन दी गई हो तो उन चेरिटेबल अस्पतालों को उनका मुफ़्त में इलाज करना चाहिए.”
प्रवासी मज़दूरों के मामले पर कल सुनवाई


वहीं, कल सुप्रीम कोर्ट ने देश में फंसे प्रवासी मज़दूरों के हालात पर ख़ुद संज्ञान लेते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को उनके लिए उचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को कहा था कि उनके द्वारा उठाए गए क़दमों में कमियां हैं.
प्रवासी मज़दूरों से संबंधित मामले पर कल सुनवाई होगी.


26 फ़रवरी 2020 तक ब्राज़ील में कोरोना वायरस संक्रमण का कोई केस दर्ज नहीं हुआ था. यानी चीन के बाहर जब कोविड-19 का पहला केस दर्ज हुआ, तब से लगभग एक महीने बाद तक भी ब्राज़ील में कोई केस नहीं था.लेकिन 26 फ़रवरी को साओ पाउलो में, जो कि ब्राज़ील का सबसे घनी आबादी वाला शहर है, एक केस सामने आया.
मरीज़ एक 61 वर्षीय बुज़ुर्ग थे जो उत्तरी इटली के लॉमबार्डी इलाक़े की यात्रा करके लौटे थे.

लॉमबार्डी इटली का वो क्षेत्र है, जहाँ कोरोना वायरस ने सबसे अधिक नुकसान किया, एक बड़ी आबादी कोरोना से संक्रमित हुई और सबसे ज़्यादा मौतें भी वहीं हुईं.
आधिकारिक रूप से इन 61 वर्षीय बुज़ुर्ग को ही ब्राज़ील में कोविड-19 का पहला केस कहा जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों की राय है कि ‘वायरस इससे काफ़ी पहले ब्राज़ील में आ चुका होगा.’


जैसे अप्रैल के पहले सप्ताह तक ब्राज़ील में आधिकारिक रूप से मरने वालों की संख्या पर नज़र नहीं जा रही थी, लेकिन बाद में मानो एक विस्फोट हुआ और अब तक ब्राज़ील में कोविड-19 से 24,512 लोगों की मौत हो चुकी है.


11 अप्रैल को बताया गया कि दक्षिणी गोलार्ध पर स्थित देशों में ब्राज़ील पहला ऐसा देश है जहाँ मरने वालों की संख्या एक हज़ार से ज़्यादा हो गई है.
उस समय तक यह थ्योरी भी काफ़ी चल रही थी कि ‘गर्म देशों में कोरोना वायरस का वैसा असर नहीं होगा जैसा यूरोप के ठंडे देशों में देखना को मिला.’


17 मई तक ब्राज़ील में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या स्पेन और इटली से ज़्यादा हो गई थी और अब ब्राज़ील दुनिया का दूसरा ऐसा देश बन गया जहाँ कोरोना वायरस संक्रमण के सबसे ज़्यादा मामले दर्ज हुए हैं.


अमरीका, स्पेन, फ़्रांस, इटली और ब्रिटेन में अभी भी कोविड-19 से मरने वालों की संख्या ब्राज़ील से ज़्यादा है. मगर वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी ने एक अध्ययन के बाद यह चेतावनी दी है कि ब्राज़ील में मरने वालों की संख्या पाँच गुना बढ़कर, अगस्त तक एक लाख 25 हज़ार हो सकती है.
हाल ही में अमरीका ने कहा है कि ब्राज़ील से आने वाले किसी यात्री को वो अपने यहाँ एंट्री नहीं देंगे.


लेकिन फ़रवरी से लेकर अप्रैल तक ब्राज़ील के राष्ट्रपति ज़ायर बोलसेनारो कोरोना वायरस संक्रमण की तुलना ‘सामान्य सर्दी ज़ुकाम’ से करते रहे और वे दावा करते रहे कि ‘मीडिया देश में भय का माहौल बना रहा है, इस संक्रमण से इतना डरने की ज़रूरत नहीं है.’


उन्होंने यह भी कहा कि ‘अर्थव्यवस्था को जीवंत रखना ज़्यादा ज़रूरी है, इसलिए बुजुर्ग लोग घरों में रहें, लेकिन बाकी लोग अपने काम-धंधे करते रहें.’
नीचे दिए ग्राफ़ में आप देख सकते हैं कि कैसे चीन ने अपने यहाँ संक्रमण को एक स्तर पर रोक दिया, जबकि ब्राज़ील ने चीन को पीछे छोड़ दिया है.

 

BBC HINDI 

 

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