सुप्रीम कोर्ट बोला- आपराधिक कानून बदले की लड़ाई का हथियार नहीं बन सकता

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि आपराधिक कानून को निजी बदले और दुश्मनी निकालने का जरिया नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने धोखाधड़ी के एक मामले में दर्ज FIR और चार्जशीट को रद्द कर दिया।

जस्टिस बीवी नागरथना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि हाल के वर्षों में कुछ लोग अपने स्वार्थ और गलत मकसद से आपराधिक न्याय व्यवस्था का दुरुपयोग कर रहे हैं। कोर्ट ने चेताया कि ऐसे मामलों पर सतर्क रहना जरूरी है।

यह मामला 2023 में दर्ज FIR से जुड़ा था, जिसमें दो लोगों पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया था। लेकिन बेंच ने कहा कि शिकायत धोखाधड़ी की बुनियादी शर्तें पूरी नहीं करती। FIR 5 साल की देरी से दर्ज हुई और शिकायतकर्ता कारण भी नहीं बता सका।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुकदमे को जारी रखना अभियुक्तों के लिए "अनुचित उत्पीड़न" होगा और न्यायहित में भी नहीं है। कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर FIR, चार्जशीट और आगे की सभी कार्यवाही खत्म कर दी।

 

 

 

 

courtesy:www.bhaskar.com

0 comments

Leave a Reply