SC/ST एक्ट- कोर्ट के फैसले को गलत तरीके समझा जा रहा है- SC
एससी-एसटी एक्ट के मुद्दे पर केंद्र सरकार द्वारा दाखिल की गई पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोर्ट के दिए गए फैसले को गलत तरीके समझा जा रहा है, हमने कहा है कि FIR से पहले अफसर संतुष्ट हो कि किसी को झूठा नहीं फंसाया जा रहा है। किसी निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए लेकिन अगर जांच में जरूरत है तो गिरफ्तारी की जाए।
एससी-एसटी एक्ट के तहत तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगाने के आदेश पर केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है।
सुनवाई के दौरान अटर्नी जर्नल वेणुगोपाल ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के आदेश पर एससी-एसटी एक्ट के तहत गिरफ्तारी के पहले विभाग के अधिकारी या एसपी की इजाजत का प्रावधान करना सीआरपीसी में बदलाव जैसा है। हजारों साल से वंचित तबके को अब जाकर सम्मान मिलना शुरू हुआ है। इसलिए यह फैसला इस तबके के लिए बुरी भावना रखने वालों का मनोबल बढ़ा सकता है।
केंद्र ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस तरह नया कानून नहीं बना सकता है, ये कोर्ट का अधिकार क्षेत्र नहीं है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने कहा कि ये फैसला ये नहीं कहता कि कोई अपराध करे। दोषी को पूरी सजा मिले, लेकिन बेवजह कोई जेल क्यों जाए? हमने कई मौकों पर कानून की व्याख्या की है। अनुच्छेद 21 (सम्मान से जीवन का मौलिक अधिकार) की रक्षा भी हमारी जिम्मेदारी है।

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