शाहीनबाग प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा सड़कों पर अनिश्चितकाल के लिए कब्ज़ा नही किया जा सकता
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क जाम कर आये दिन हो रहे धरना प्रदर्शन को लेकर गाइड लाइन बनाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा केवल निर्धारित क्षेत्रों में ही विरोध प्रदर्शन किया जाए। आम जनता के आवागमन का अधिकार अनिश्चित काल तक रोका नहीं जा सकता हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीएए के मामले चुनौती देने वाली याचिकाएं अलग से इस अदालत के समक्ष लंबित है। शाहीन बाग में मध्यस्थता के प्रयास सफल नहीं हुए, लेकिन हमें कोई पछतावा नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले सुनते हुए कहा कि सार्वजनिक बैठकों पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है लेकिन उन्हें निर्दिष्ट क्षेत्रों में होना चाहिए। संविधान विरोध करने का अधिकार देता है लेकिन इसे समान कर्तव्यों के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान सदन जमा करने पर कहा कि विरोध के अधिकार को आवागमन के अधिकार के साथ संतुलित करना होगा। ऐसे मामलों में प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए, अदालत के आदेश का इंतजार नहीं करना चाहिए।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट में बीजेपी नेता नंद किशोर गर्ग और अन्य की ओर से याचिका तब दायर किया गया था जब सीएए को लेकर शाहीन बाग में धरना प्रदर्शन चल रहा था। हालांकि शाहीन बाग में धरना प्रदर्शन खत्म हो चुका है।
याचिकाकर्ता चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट इसके लिए गाइड लाइन बनाये ताकि सड़क जाम कर लगातार हो रहे धरना प्रदर्शन से लोगो को राहत मिल सके।
याचिककर्ता अमित सैनी ने कहा कि ऐसे विरोध जारी नहीं रह सकते, सड़कों को ब्लॉक करने के लिए SC निर्देश के बावजूद प्रदर्शन 100 दिनों के लिए चलते रहे, इस मामले में सुनवाई होनी चाहिए और दिशानिर्देश पास करना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान महमूद प्राचा ने कहा था कि लोगो को शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने का अधिकार है, सरकार प्रदर्शन कराने के लिए लोगो को जगह भी देती है,
प्राचा ने कहा कि प्रदर्शन के लिए समान पॉलिसी होनी चाहिए, अगर शांतिपूर्ण तरिके से प्रदर्शन जो रहा हज तो इसके लिए दिशानिर्देश की ज़रूरत नही है, कुछ लोगों को प्रदर्शन की शांति भंग करने के लिए भेजा गया इस तरह की घटना दुबारा नही होनी चाहिए।

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