रोजा गुनाहों से बचने के लिए ढाल है / जफीर करखी

माहे रमजान के रोज़े की फ़ज़ीलत एवं विशेषताएं

सेमरियावां। माहे रमजान अब अंतिम चरण में है।खुश नसीब है वह लोग जो इस महीने दिन भर भूखे प्यासे रहकर रोजे रखे ।खूब इबादत किया।मस्जिद को दिन रात आबाद रखा।विशेष नमाज तरावीह नियमित रात में पढ़ी।पवित्र धर्म ग्रन्थ कुरान शरीफ की तिलावत की।

अल्लाह के सामने अपने गुनाहों की माफी मांगी।अपने परिवार के बड़े बूढ़े बुजुर्गों और पूर्वजों के लिए दुआएं की।जफीर अली करखी ने बताया कि कुरान हदीस की किताबों में माहे रमजान के रोजे की बहुत विशेषताएं फजीलत बताई गई हैं। 

रोज़ेदार के तमाम गुनाह माफ़ हो जाते हैं।रोज़े का सवाब अल्लाह ने अपने ज़िम्मे लिया है।रोज़े के बराबर कोई चीज़ नहीं।रोज़ेदार के लिए जन्नत का वादा है।रोज़ेदार शहीदों के साथ होंगे। रोज़ेदार के हर अमल का अज्र सात सौ गुना तक बढ़ा दिया जाता है। जन्नत का दरवाज़ा 'रयान' रोज़ेदारों के लिए है।एक दिन का रोज़ा दोज़ख़ की आग से सत्तर साल दूर कर देगा। रोज़ा क़यामत के दिन सिफ़ारिश करेगा।

 रोज़ा गुनाहों से बचने के लिए ढाल है।  रोज़ेदार के मुँह की बू कस्तूरी से ज़्यादा पाकीज़ा है।रोज़ेदार को इफ़्तारी के वक़्त जहन्नम से आज़ादी दी जाती है। बदनसीब हैं वो लोग जिनकी ज़िंदगी में माहे रमज़ान जैसी नेमत आती है और वो रोज़े नहीं रखते हैं वो लोग अल्लाह से तौबा करें के उनके ऐसे कौन से अमल की वजह से अल्लाह ने उनको ऐसी नेमत से दूर रखा।

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