मनरेगा की जगह आए ‘वीबी-जी राम जी’ पर सियासी घमासान, 2026 में भी जारी रहने के आसार
ग्रामीण रोजगार के हालात में आने वाले समय में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी और ज्यादा चर्चा में आ सकता है। साल 2025 खास इसलिए रहा, क्योंकि इसी साल दो दशक पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को हटाकर उसकी जगह नया विकसित भारत–गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी लागू किया गया। मनरेगा को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के पहले कार्यकाल में लागू किया गया था।
विपक्षी दलों ने जताया कड़ा विरोध
इस कानून का संसद में विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया, वहीं संसद के बाहर सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने प्रदर्शन किए। आलोचकों का तर्क है कि नया कानून, पुराने अधिनियिम के अधिकार-आधारित रुख को कमजोर करता है। मूल अधिनियम से महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने पर भी विपक्ष ने जोरदार विरोध जताया।
‘वीबी-जी राम जी’ का विरोध “गलत सूचना” पर आधारित
इन आरोपों को खारिज करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वीबी-जी राम जी अधिनियम के खिलाफ विरोध “गलत सूचना” पर आधारित है और यह मनरेगा से एक कदम आगे है। मनरेगा के तहत जहां 100 दिन के मजदूरी कार्य की गारंटी थी, वहीं वीबी-जी राम जी अधिनियम में 125 दिन के काम का प्रावधान किया गया है। सरकार के अनुसार इससे रोजगार की गारंटी और मजबूत होती है। हालांकि, कार्यकर्ताओं का कहना है कि मनरेगा के तहत भी श्रमिकों को औसतन करीब 50 दिन का ही काम मिल पाता था।
मनरेगा में औसतन 50 दिन का ही काम मिला
शीतकालीन सत्र में राज्यसभा में पूछे गए एक लिखित प्रश्न के उत्तर में ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बताया कि 2024-25 में मनरेगा के तहत प्रति परिवार औसतन 50.24 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया गया। सरकार ने कहा कि नया अधिनियम स्पष्ट रूप से चार प्राथमिक क्षेत्रों में स्थायी सार्वजनिक संपत्ति के निर्माण के साथ जुड़ा हुआ है। इनमें जल सुरक्षा और जल से संबंधित कार्य, ग्रामीण बुनियादी ढांचे के मुख्य तत्व, आजीविका से संबंधित बुनियादी ढांचा, और चरम मौसमी घटनाओं के प्रभाव को कम करने के उपाय शामिल हैं।
ग्राम पंचायत स्तर पर तय होगा काम
सभी कार्य ग्राम पंचायत स्तर पर तैयार की गई विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं (वीजीपीपी) के तहत किए जाएंगे, जिन्हें ग्राम सभा की मंजूरी के बाद पीएम गति शक्ति समेत राष्ट्रीय डिजिटल मंच से जोड़ा जाएगा। एमजीएनआरईजीए एक मांग-आधारित योजना थी, जिसमें काम की मांग होने पर अतिरिक्त धन उपलब्ध कराना केंद्र की जिम्मेदारी थी। इसके विपरीत, वीबी-जी राम जी अधिनियम में राज्यों के लिए मानक आवंटन का प्रावधान है और इससे अधिक खर्च राज्यों को स्वयं वहन करना होगा।
पुराने कानून में मजदूरी लागत का 100 प्रतिशत और सामग्री लागत का 75 प्रतिशत केंद्र सरकार देती थी। नए अधिनियम में केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 का लागत-साझा मॉडल अपनाया गया है, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 और बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्तपोषण का प्रावधान है।
राज्यों पर पड़ेगा अतिरिक्त वित्तीय बोझ
कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह व्यवस्था कानून को कमजोर करती है और राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालती है, जिससे अंततः ग्रामीणों को रोजगार मिलने में कठिनाई हो सकती है। हालांकि, चौहान ने दावा किया कि योजना के तहत आवंटन रोजगार उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त होगा। वीबी-जी राम जी में एक व्यापक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की बात की गई है, जिसमें बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, वैश्विक स्थिति प्रणाली (जीपीएस) या मोबाइल-आधारित कार्यस्थल निगरानी, सक्रिय सार्वजनिक प्रकटीकरण और योजना, ऑडिट और धोखाधड़ी जोखिम न्यूनीकरण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) शामिल हैं। इनका उपयोग शासन, जवाबदेही और नागरिक सहभागिता को आधुनिक बनाने के लिए किया जाएगा।
डिजिटल अनुपालन पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता
मनरेगा पर काम करने वाले शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और कार्यकर्ताओं के समूह ‘लिबटेक इंडिया’ ने कल्याणकारी योजनाओं के अत्यधिक “एमआईएस-आधारित” होने को लेकर आगाह किया। इसका कहना है कि डिजिटल अनुपालन पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता के कारण कई वास्तविक गतिविधियां रिकॉर्ड में नहीं आ पातीं, जिससे अधिकारों से वंचित होना, शिकायत निवारण में देरी जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
कांग्रेस 5 जनवरी से शुरू करेगी देशव्यापी अभियान
कांग्रेस ने घोषणा की है कि वह पांच जनवरी से इसके खिलाफ देशव्यापी अभियान शुरू करेगी। वामपंथी दलों ने 22 दिसंबर को विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था, जबकि पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार ने इस कानून के विरोध में विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया। इस बीच, चौहान ने कहा कि वीबी-जी राम जी योजना के लिए 1,51,282 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे, ताकि ग्रामीण रोजगार के लिए धन की कोई कमी न हो।
courtesy:hindi.business-standard.com

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