तीन राज्यों में हुए श्रम कानून में बदलाव के खिलाफ जनहित याचिका दाखिल
झारखण्ड के सोशल एक्टिविस्ट पंकज कुमार यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की

नई दिल्ली :( एशिया टाइम्स / अवेस उस्मानी ) पंकज यादव ने जनहित याचिका के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट से यह मांग की है कि राज्य सरकारों के इन अध्यादेश को रद कर श्रम कानून को संरक्षित करें याचीका में कहा कि राज्य सरकारों ने फैक्ट्री एक्ट का संसोधन कर मजदूरों के मूल अधिकारों को हनन करने का प्रयास किया है।
8 घंटे की जगह बारह घण्टे कार्य करवाना तथा निम्नतम मजदूरी से भी वंचित रखना मानवाधिकार का हनन हैउतर प्रदेश ,मध्य प्रदेश ,गुजरात सहित अन्य राज्यों में मजदुर कानून को कमजोर और सिथिल बनाने का अध्यादेश जारी हुआ है

राज्य सरकारों ने श्रम कानून में बदलाव वॉर के दौरान मिलने वाले राज्य सरकार के अधिकारों के आधार पर किया है .जो ना तो राजनीतिक दृष्टि से सही है ना ही नैतिक दृष्टि से .लाखो मजदुर अभी बेइन्ताह पीड़ा को झेल रहे हैं .और लॉक डाउन के बाद जब वो वापस फैक्ट्री में जायेंगे तो नया अध्यादेश उन्हें अपने फसे हुए पैसे को निकालने में भी बड़ी अड़चन खड़ा करेगी।
मजदूरों को देश आज़ादी से पहले से मिलते आ रहे हर वो अधिकार और सुविधा से वंचित करने की कोशिस है जिसका वो हक़दार हैं .मजदुर के जान और जमीर के कीमत पर निवेशको को आमंत्रित करना कही से भी उचित नहीं है .पंकज यादव की तरफ एडवोकेट निर्मल अम्बष्ठा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है


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